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हिंदी के साथ मिलकर और मजबूत हुई पंजाबी भाषा
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पंजाबी साहित्य और जीएमएन कॉलेज द्वारा हरियाणा पंजाबी साहित्य अकादमी पंचकूला के सहयोग से एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में पंजाबी भाषा के वर्तमान और भविष्य पर आधारित रही। इस मौके पर पंजाबी भाषा की महत्ता को बताया गया।
संगोष्ठी का उद्घाटन कॉलेज प्रबंधक निकाय के प्रधान डॉ. गुरुदेव सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि हरियाणा बनने और हरियाणा का विकास होने के बाद पंजाबी भाषा की जड़ें हिंदी भाषा के साथ मिलकर और मजबूत हुई हैं। डॉ. जसविंदर, डॉ. धनवंत कौर, डॉ. योगराज ने भी पंजाबी भाषा से जुड़ी जानकारी दी। डॉ. कुलदीप सिंह अध्यक्ष पंजाबी विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने कहा कि पंजाबी भाषा के भविष्य को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि पंजाबी भाषा में स्वयं ही इतना बल और सामर्थ्य है कि पंजाबी भाषा को किसी भी भाषा से खतरा महसूस नहीं हो सकता।
डॉ. सुनील वशिष्ठ निदेशक हरियाणा साहित्य अकादमी ने कहा कि पंजाबी सिनेमा शिष्ट एवं दर्शनीय है। इस कार्यक्रम और सेमिनार के संयोजक कॉलेज के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ.सुदर्शन गासो ने सभी का आभार व्यक्त किया और कहा की पंजाबी भाषा अपने नाम के अनुरूप बता देती है कि मैं वह भाषा हूं, जिसे पंजाब के ही नहीं अपितु इसको प्रयोग करने वाले लोग अपने दुख-सुख, प्रेम-घृणा, वीरता-भय या किसी भी मनोभाव को अभिव्यक्त करने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
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कॉलेज प्राचार्य डॉ. राजपाल सिंह ने कहा कि पंजाबी भाषा और पंजाब की मिली जुली संस्कृति एक ऐसी अपूर्व पहचान देती है, जिस पहचान का सीधा रिश्ता हमारी भावनाओं से है। इस अवसर पर कॉलेज प्राध्यापक डॉ. सुदर्शन गासो की पुस्तक श्री गुरु नानक देव वाणी और विचार, किन्ना सोहना अंबर लगदा और खुशी को इंद्राणी का विमोचन भी किया गया। सेमीनार में पंजाब, हरियाणा और अन्य कई शहरों से लेखक साहित्यकार, शोधार्थी और प्राध्यापक मौजूद रहे।
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संगोष्ठी का उद्घाटन कॉलेज प्रबंधक निकाय के प्रधान डॉ. गुरुदेव सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि हरियाणा बनने और हरियाणा का विकास होने के बाद पंजाबी भाषा की जड़ें हिंदी भाषा के साथ मिलकर और मजबूत हुई हैं। डॉ. जसविंदर, डॉ. धनवंत कौर, डॉ. योगराज ने भी पंजाबी भाषा से जुड़ी जानकारी दी। डॉ. कुलदीप सिंह अध्यक्ष पंजाबी विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने कहा कि पंजाबी भाषा के भविष्य को लेकर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि पंजाबी भाषा में स्वयं ही इतना बल और सामर्थ्य है कि पंजाबी भाषा को किसी भी भाषा से खतरा महसूस नहीं हो सकता।
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डॉ. सुनील वशिष्ठ निदेशक हरियाणा साहित्य अकादमी ने कहा कि पंजाबी सिनेमा शिष्ट एवं दर्शनीय है। इस कार्यक्रम और सेमिनार के संयोजक कॉलेज के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ.सुदर्शन गासो ने सभी का आभार व्यक्त किया और कहा की पंजाबी भाषा अपने नाम के अनुरूप बता देती है कि मैं वह भाषा हूं, जिसे पंजाब के ही नहीं अपितु इसको प्रयोग करने वाले लोग अपने दुख-सुख, प्रेम-घृणा, वीरता-भय या किसी भी मनोभाव को अभिव्यक्त करने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
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कॉलेज प्राचार्य डॉ. राजपाल सिंह ने कहा कि पंजाबी भाषा और पंजाब की मिली जुली संस्कृति एक ऐसी अपूर्व पहचान देती है, जिस पहचान का सीधा रिश्ता हमारी भावनाओं से है। इस अवसर पर कॉलेज प्राध्यापक डॉ. सुदर्शन गासो की पुस्तक श्री गुरु नानक देव वाणी और विचार, किन्ना सोहना अंबर लगदा और खुशी को इंद्राणी का विमोचन भी किया गया। सेमीनार में पंजाब, हरियाणा और अन्य कई शहरों से लेखक साहित्यकार, शोधार्थी और प्राध्यापक मौजूद रहे।