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Ambala News: खेती में सटीक सलाह देना अच्छा प्रयास, पीएम-किसान योजना को नहीं बढ़ाया
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किसान संजीव कुमार।
- किसान ने कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा का किया स्वागत, धरातल पर योजनाओं को लागू करने की भी मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। किसानों के लिए सरकार का मुख्य फोकस तकनीक (एआई), विविधता और पशुपालन के जरिए आय बढ़ाने पर रहेगा। इस बार का बजट केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की स्मार्ट खेती की नींव रखता है। इस बजट की किसानों ने सराहना की, लेकिन पशुपालन के लिए ज्यादा प्रयास नहीं किए। पीएम-किसान सम्मान निधि की राशि नहीं बढ़ाने पर निराशा भी रही। इस संबंध में किसानों ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी।
दो वर्ष पूर्व उनकी धान की फसल खराब हो गई थी, लेकिन उनको खराबे का पैसा नहीं मिला, क्योंकि जब किसान की फसल खराब होती है तो उस समय गिरादावरी के लिए अधिकारी नहीं आते। बारिश व ओलावृष्टि से अगर फसल खराब होती है तो दो दिन में ही सर्वे होना चाहिए।
संजीव कुमार, किसान।
किसानों को आधुनिक बनाया जाएगा, यह सरकार की अच्छी पहल है। बजट में नारियल व काजू को बढ़ावा देने की बात कही है, ये फसलें हरियाणा में नहीं होतीं हैं। पशुपालन क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी के जरिए डेयरी और मुर्गी पालन क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए आसान लोन और सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।
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बलजीत सिंह, किसान।
बकरी पालन के लिए सरकार पांच हजार प्रति नस्ल देती है, लेकिन सरकार को 15 हजार रुपये प्रत्येक नस्ल के लिए देना चाहिए। दूध का रेट 15 रुपये प्रति फैट या 50 रुपये लीटर होना चाहिए। तभी डेयरी संचालक आमजन को शुद्ध दूध पीला सकते हैं। कम दूध वाली गाय सड़कों पर उतर गई और बेसहारा हो गई हैं। गुरमीत सिंह माजरी, किसान।
इस बजट में पीएम-किसान सम्मान निधि की राशि 6 हजार रुपये सालाना में बढ़ोतरी की उम्मीद थी, लेकिन बजट भाषण में इसमें किसी बदलाव की घोषणा नहीं की गई है। सरकार सरकारी कर्मचारियों के लिए समय अनुसार वेतन में बढ़ोतरी करती है, लेकिन किसानों के लिए इस राशि में बढ़ोतरी नहीं की गई है।
सेवक सिंह, किसान।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। किसानों के लिए सरकार का मुख्य फोकस तकनीक (एआई), विविधता और पशुपालन के जरिए आय बढ़ाने पर रहेगा। इस बार का बजट केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की स्मार्ट खेती की नींव रखता है। इस बजट की किसानों ने सराहना की, लेकिन पशुपालन के लिए ज्यादा प्रयास नहीं किए। पीएम-किसान सम्मान निधि की राशि नहीं बढ़ाने पर निराशा भी रही। इस संबंध में किसानों ने अपनी प्रतिक्रिया भी दी।
दो वर्ष पूर्व उनकी धान की फसल खराब हो गई थी, लेकिन उनको खराबे का पैसा नहीं मिला, क्योंकि जब किसान की फसल खराब होती है तो उस समय गिरादावरी के लिए अधिकारी नहीं आते। बारिश व ओलावृष्टि से अगर फसल खराब होती है तो दो दिन में ही सर्वे होना चाहिए।
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संजीव कुमार, किसान।
किसानों को आधुनिक बनाया जाएगा, यह सरकार की अच्छी पहल है। बजट में नारियल व काजू को बढ़ावा देने की बात कही है, ये फसलें हरियाणा में नहीं होतीं हैं। पशुपालन क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी के जरिए डेयरी और मुर्गी पालन क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए आसान लोन और सब्सिडी का प्रावधान किया गया है।
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बलजीत सिंह, किसान।
बकरी पालन के लिए सरकार पांच हजार प्रति नस्ल देती है, लेकिन सरकार को 15 हजार रुपये प्रत्येक नस्ल के लिए देना चाहिए। दूध का रेट 15 रुपये प्रति फैट या 50 रुपये लीटर होना चाहिए। तभी डेयरी संचालक आमजन को शुद्ध दूध पीला सकते हैं। कम दूध वाली गाय सड़कों पर उतर गई और बेसहारा हो गई हैं। गुरमीत सिंह माजरी, किसान।
इस बजट में पीएम-किसान सम्मान निधि की राशि 6 हजार रुपये सालाना में बढ़ोतरी की उम्मीद थी, लेकिन बजट भाषण में इसमें किसी बदलाव की घोषणा नहीं की गई है। सरकार सरकारी कर्मचारियों के लिए समय अनुसार वेतन में बढ़ोतरी करती है, लेकिन किसानों के लिए इस राशि में बढ़ोतरी नहीं की गई है।
सेवक सिंह, किसान।

किसान संजीव कुमार।

किसान संजीव कुमार।

किसान संजीव कुमार।