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फिर से प्राइवेट स्कूलों में होगी बसों की चेकिंग

Sat, 18 Feb 2017 12:12 AM IST
ब्यूरो/अंबाला/अमर उजाला
ब्यूरो/अंबाला/अमर उजाला Updated Sat, 18 Feb 2017 12:12 AM IST
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कोर्ट ने ऐसे ही हादसों पर खुद संज्ञान लिया और इसी के चलते वर्ष 2009 में एक जनहित याचिका भी हाईकोर्ट में लगाई गई, जो अभी तक विचाराधीन है। इसी के चलते अब हाईकोर्ट के आदेश पर प्रदेश भर में स्कूली वाहनों की चेकिंग करवाई जाएगी। इसके लिए हाईकोर्ट के आदेश पर हरियाणा स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन चाइल्ड राइट ने स्पेशल टीम का गठन कर दिया है, जो प्रदेश भर में स्कूली वाहनों की चेकिंग करेगी।

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इसके लिए प्रदेश भर में शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है। हाईकोर्ट के आदेश पर गठित विभिन्न स्पेशल टीमों में हरियाणा स्टेट कमिश्न फॉर प्रोटेक्शन चाइल्ड राइट (एससीपीसीआर) के सदस्य बाल कृष्ण गोयल, परमजीत सिंह बड़ौला, सुनीता देवी, दीपा जैन, रमनदीप कौर, सुशील वर्मा समेत ट्रांसपोर्ट, शिक्षा और आरटीए विभाग के अफसर शामिल होंगे। ये टीम सभी जिलों में प्राइवेट स्कूलों की बसों का औचक निरीक्षण करेंगी और इस बात की तसदीक करेंगे कि संबंधित स्कूल बसें बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर फिट है या नहीं। इसके लिए कई नियम बनाए गए हैं, उन सभी नियमों पर ये स्कूली बसें खरी उतरती है या नहीं? इन बिंदुओं पर निरीक्षण करके टीम अपनी रिपोर्ट पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट को सौंपेंगी।
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जारी किए गए शेड्यूल के अनुसार स्कूली बसों का ये निरीक्षण एक मार्च से पंद्रह मार्च के बीच होगा। झज्जर, रेवाड़ी, गुडग़ांव व फरीदाबाद में टीम का नेतृत्व एससीपीसीआर मेंबर बालकृष्ण गोयल करेंगे। जबकि सोनीपत, पानीपत व करनाल में जांच टीम का नेतृत्व एससीपीसीआर सदस्य सुनीता देवी, रोहतक, महेंद्रगढ़ व हिसार में एससीपीसीआर सदस्य दीपा जैन, अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर व पंचकूला में एससीपीसीआर सदस्य परमजीत सिंह बड़ौला व भिवानी, पलवल, मेवात व सिरसा में जांच टीम का नेतृत्व एससीपीसीआर सदस्य सुशील वर्मा करेंगे। उनके साथ शिक्षा, परिवहन व पुलिस विभाग के अफसर भी रहेंगे।
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संतोषजनक नहीं था पुराना निरीक्षण

 उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के संज्ञान के बाद विचाराधीन जनहित याचिका के दौरान ही स्कूली बच्चों के लिए बनाई गई सुरक्षित स्कूल वाहन पॉलिसी के तहत सभी स्कूली वाहन नियमों के पैमाने पर खरे उतरते हैं या नहीं? इसकी ग्राउंड जानने के लिए हाईकोर्ट ने 18 दिसंबर 2015 को भी इसी तरह की कमेटियां गठित कर स्कूली बसों की निरीक्षण करवाया था।


इस दौरान प्रदेश भर में करीबन 1050 स्कूलों में स्कूली बसों का निरीक्षण किया गया, जिसमें से 90 फीसद बसें मानकों पर खरी नहीं उतरी। इसमें करीबन 65 बसें अंबाला के स्कूलों में भी चैक की गई, लेकिन उनमें भी अधिकतर नियमों पर पूरी तरह से फिट नहीं पाई गई। आयोग ने अपनी इस ग्राउंड रिपोर्ट से हाईकोर्ट को अवगत करवा दिया  था, अब फिर से हाईकोर्ट ने दोबारा बसों की जांच के आदेश दिए हैं, हाईकोर्ट ये देखना चाहता है कि सवा साल में स्कूलों ने संबंधित मामले में कितना सुधार किया है?

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