प्रधान सचिव, निदेशक, कमिश्नर, ईओ को नोटिस
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ट्विनसिटी में म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन अंबाला (एमसीए) के अंतर्गत इन दिनों भवन निर्माण को लेकर एक नया खेल चल रहा है। जिसका फायदा इस खेल में शामिल लोगों, एमसीए कर्मियों व अफसरों को तो हो रहा है, मगर सरकार को डेवलपमेंट चार्ज के रूप में करोड़ों की चपत लग रही है। यह खेल है रेजिडेंशियल नक्शा पास करवाकर कॉमर्शियल बिल्डिंग बनाने का।
अंबाला कैंट व अंबाला सिटी में इस तरह के कई मामले ऐसे हैं, जिन्हे एससीए की ओर से रेजिडेंशियल भवन बनाने की अनुमति दी जाती है। उसी के आधार पर लोग नक्शा भी पास कराते हैं। लेकिन बाद में कुछ एमसीए कर्मियों व अफसरों की मिलीभगत से वे संबंधित जगह पर रेजिडेंशियल की बजाए कॉमर्शियल भवन बना लेते हैं।
अब अंबाला सिटी के संजय खेड़ा ने इसी बाबत यूटीलिटी कोर्ट में याचिका लगाई है। जिसमें उक्त व्यक्ति ने इस खेल में एमसीए अफसरों व कर्मियों पर मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। कोर्ट ने इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए अर्बन लोकल बॉडी के आला अफसरों समेत एमसीए अफसरों को भी नोटिस जारी कर उनसे 19 अक्तूबर तक कोर्ट में जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। याची संजय खेड़ा के वकील ने गोपाल कृष्ण गुप्ता ने बताया कि अर्बन लोकल बॉडी विभाग के प्रधान सचिव, निदेशक के साथ-साथ एमसीए कमिश्नर, ईओ व डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर को भी कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। अदालत ने उक्त सभी अफसरों से याची द्वारा दी गई शिकायत पर 19 अक्तूबर तक जवाब तलब किया है।
इस तरह लग रही सरकार को चपत एमसीए के इस खेल में सरकार को काफी चपत लग रही है। दरअसल, रेजिडेंशियल भवन का नक्शा पास करवाने की डेवलपमेंट फीस कामर्शियल भवन का नक्शा पास करवाने से अपेक्षाकृत कम होती है। इसलिए लोग सरकार के खाते में कम फीस जमा करवाकर भवन का नक्शा को रेजिडेंशियल पास करवा लेते हैं और बाद में चुपचाप मिलीभगत कर वहां कामर्शियल भवन खड़ा कर उसमें अपने व्यवसायिक गतिविधियां शुरू कर देते हैं। यूटीलिटी कोर्ट में दाखिल की गई इस याचिका में याची ने अंबाला कैंट व अंबाला सिटी के विभिन्न इलाकों में इस तरह बनाए जा रहे भवनों की जानकारी भी कोर्ट को दी है। याची का कहना है कि इस तरह से सरकार को भारी नुकसान हो रहा है, मगर एमसीए अफसर व कर्मचारियों की मिलीभगत से ऐसा करने वाले लोगों के हौसले दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं। क्योंकि वे इन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करते।
मैं महीनों से उठा रहा हूं मुद्दा, सुनते नहीं एमसीए अफसर : मेयर मसीए मेयर रमेश लाल मल ने कहा कि इस बाबत तो कोर्ट में अब याचिका लगी है। लेकिन मैं तो ये मसला एमसीए कमिश्नर के संज्ञान में महीनों से ला रहा हूूं। मैने इस संबंध में सीएम को भी पत्र भेजा था। एमसीए कमिश्नर को तो मैने पत्र के जरिए व रूबरू होकर ऐसे मामलों से अवगत भी करवाया है। लेकिन एमसीए अफसरों ने मेरी एक न सुनी। मेयर ने साफ कहा कि ट्विनसिटी में इस तरह का खेल खूब खेला जा रहा है, जिससे सरकार का काफी नुकसान हो रहा है, लेकिन एमसीए अफसरों की मिलीभगत के चलते ऐसे लोगों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने जितने भी खत एमसीए अफसरों को लिखे, उसका आज तक कोई जवाब नहीं आया।
एमसीए अफसर नकार चुके हैं आरोप एमसीए मेयर रमेश लाल मल के आरोप पर एमसीए के निवर्तमान कमिश्नर शक्ति सिंह पहले ही कह चुके हैं कि अवैध भवन निर्माण मामलों को लेकर एमसीए अफसर चुप नहीं है। ऐसे लोगों को नोटिस जारी किया जाता है। उसके बाद भी यदि वे न माने तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। कुछ केसों में एमसीए अपना काम भी कर रही है। एमसीए अफसरों पर मिलीभगत के आरोप लगाना गलत है। सभी अफसर नियमानुसार काम कर रहे हैं।