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Ambala News: प्रधानमंत्री मोदी हरियाणा दिवस पर दे सकते हैं शहीद स्मारक की सौगात
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अंबाला-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्मित शहीद स्मारक। सोशल मीडिया
संभावित एक नवंबर की तारीख मिली, 700 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है शहीद स्मारक तैयार
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। छावनी में 700 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित शहीद स्मारक अब उद्घाटन के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा दिवस पर इस स्मारक का उद्घाटन कर सकते हैं। स्थानीय अधिकारियों को संभावित एक नवंबर की तारीख मिली है। यह स्मारक 1857 की क्रांति के अनसुने नायकों को समर्पित है। इतिहासकारों के अनुसार, 1857 का स्वतंत्रता संग्राम मेरठ से कुछ घंटे पहले 9 मई 1857 को अंबाला में शुरू हुआ था। यह स्मारक देश की आजादी की लड़ाई की कहानियों को जीवंत करेगा।
वर्चुअल रियलिटी तकनीक लोगों को आजादी के समय में ले जाएगी। इस कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक से जानकारी ली जा रही है। स्थानीय स्तर पर भी अधिकारियों ने अपने स्तर से प्रबंधन शुरू कर दिया है। शहीद स्मारक परियोजना के निदेशक कुलदीप सैनी ने बताया कि एक नवंबर की संभावित तारीख मिली है। उन्होंने कहा कि सभी तैयारियां की जा रही हैं। जैसे ही आधिकारिक तारीख फाइनल होगी, सूचित किया जाएगा।
स्मारक की प्रमुख विशेषताएं
यह स्मारक 20 एकड़ में फैला हुआ है। इसमें भूतल, प्रथम तल और द्वितीय तल पर कुल 22 गैलरियां हैं। इन गैलरियों में अंग्रेजों के आगमन और क्रांति के कारणों को दर्शाया गया है। अंबाला की घटनाओं और हरियाणा के प्रतिरोध को भी यहां प्रदर्शित किया गया है। आगंतुक यहां भारत को सोने की चिड़िया कहे जाने से लेकर यूरोपीय लोगों के आगमन तक का इतिहास देख सकते हैं।
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इतिहास और बलिदान का प्रदर्शन
प्राचीन सभ्यता, धर्म और कुरुक्षेत्र के महत्व को भी स्मारक में प्रदर्शित किया गया है। स्मारक में एक 200 वर्ष पुराना बूढ़ा बरगद वृक्ष भी है। इसकी छत्रछाया में क्रांतिकारियों ने 1857 के संग्राम की योजना बनाई थी। कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने इस स्मारक की परिकल्पना की थी। उनका उद्देश्य देश के गौरवशाली इतिहास और बलिदान को दुनिया को दिखाना था।
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। छावनी में 700 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित शहीद स्मारक अब उद्घाटन के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हरियाणा दिवस पर इस स्मारक का उद्घाटन कर सकते हैं। स्थानीय अधिकारियों को संभावित एक नवंबर की तारीख मिली है। यह स्मारक 1857 की क्रांति के अनसुने नायकों को समर्पित है। इतिहासकारों के अनुसार, 1857 का स्वतंत्रता संग्राम मेरठ से कुछ घंटे पहले 9 मई 1857 को अंबाला में शुरू हुआ था। यह स्मारक देश की आजादी की लड़ाई की कहानियों को जीवंत करेगा।
वर्चुअल रियलिटी तकनीक लोगों को आजादी के समय में ले जाएगी। इस कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय तक से जानकारी ली जा रही है। स्थानीय स्तर पर भी अधिकारियों ने अपने स्तर से प्रबंधन शुरू कर दिया है। शहीद स्मारक परियोजना के निदेशक कुलदीप सैनी ने बताया कि एक नवंबर की संभावित तारीख मिली है। उन्होंने कहा कि सभी तैयारियां की जा रही हैं। जैसे ही आधिकारिक तारीख फाइनल होगी, सूचित किया जाएगा।
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स्मारक की प्रमुख विशेषताएं
यह स्मारक 20 एकड़ में फैला हुआ है। इसमें भूतल, प्रथम तल और द्वितीय तल पर कुल 22 गैलरियां हैं। इन गैलरियों में अंग्रेजों के आगमन और क्रांति के कारणों को दर्शाया गया है। अंबाला की घटनाओं और हरियाणा के प्रतिरोध को भी यहां प्रदर्शित किया गया है। आगंतुक यहां भारत को सोने की चिड़िया कहे जाने से लेकर यूरोपीय लोगों के आगमन तक का इतिहास देख सकते हैं।
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इतिहास और बलिदान का प्रदर्शन
प्राचीन सभ्यता, धर्म और कुरुक्षेत्र के महत्व को भी स्मारक में प्रदर्शित किया गया है। स्मारक में एक 200 वर्ष पुराना बूढ़ा बरगद वृक्ष भी है। इसकी छत्रछाया में क्रांतिकारियों ने 1857 के संग्राम की योजना बनाई थी। कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने इस स्मारक की परिकल्पना की थी। उनका उद्देश्य देश के गौरवशाली इतिहास और बलिदान को दुनिया को दिखाना था।