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दबाव में पुलिस, मानवाधिकार आयोग को भेजी रिपोर्ट
अंबाला
Updated Sat, 19 Oct 2013 12:00 AM IST
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अंबाला में बेड़ियों से बंधे रविदास माजरी निवासी रामकुमार की मौत के मामले में पुलिस की मुश्किलें बढ़ती ही जा रही हैं।
दबाव के कारण ही पुलिस ने पहले आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में एससी एक्ट की धारा जोड़ी, वहीं अब इस पूरे मसले की एक अंतरिम रिपोर्ट मानवाधिकार आयोग को भेज दी है।
गौरतलब है कि बीते 15 अक्तूबर को रामकुमार नामक युवक का शव रेलवे ट्रैक पर मिला था। उसके पैरों में बेड़ी थी, जबकि उसका दूसरा साथी विक्रम गायब था।
देर रात विक्रम भी बदहवास हालत में घर पहुंच गया। विक्रम ने घर पहुंचने के बाद जो खुलासा किया, उससे पुलिस की मुसीबतें और बढ़ गई।
पुलिस ने विक्रम का बयान लेना चाहा, मगर रविदास माजरी के लोगों ने पुलिस को वहां से निकाल दिया और केवल मजिस्ट्रेट के सामने ही बयान दिलवाने की बात कही।
रिपोर्ट से बढ़ी आरोपियों की मुश्किलें
मानवाधिकार आयोग को भेजी अंतरिम रिपोर्ट में पुलिस ने आयोग को सारी परिस्थितियों से अवगत करवाया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों युवक कैसे चौकी में पहुंचे। उन्हें वहा बेड़ियों और संगल से बांधकर क्यों रखा गया। आयोग को पुलिस ने बताया कि चौकी में जब उन युवकों को हिरासत में रखा गया, तब तक उनके खिलाफ कोई केस भी दर्ज नहीं किया गया।
इसके अलावा अभी तक इस मामले की सारी बातों को इस रिपोर्ट में शामिल कर आयोग को भेजा गया है। यदि देखा जाए तो पुलिस की मानवाधिकार आयोग को भेजी गई ये अंतरिम रिपोर्ट आरोपी पुलिस वालों की मुश्किलें और बढ़ा देंगी। केस दर्ज किए बिना किसी को बेड़ियां पहनाकर अवैध हिरासत में रखना मानवाधिकार का हनन है।
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दबाव के कारण ही पुलिस ने पहले आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में एससी एक्ट की धारा जोड़ी, वहीं अब इस पूरे मसले की एक अंतरिम रिपोर्ट मानवाधिकार आयोग को भेज दी है।
गौरतलब है कि बीते 15 अक्तूबर को रामकुमार नामक युवक का शव रेलवे ट्रैक पर मिला था। उसके पैरों में बेड़ी थी, जबकि उसका दूसरा साथी विक्रम गायब था।
देर रात विक्रम भी बदहवास हालत में घर पहुंच गया। विक्रम ने घर पहुंचने के बाद जो खुलासा किया, उससे पुलिस की मुसीबतें और बढ़ गई।
पुलिस ने विक्रम का बयान लेना चाहा, मगर रविदास माजरी के लोगों ने पुलिस को वहां से निकाल दिया और केवल मजिस्ट्रेट के सामने ही बयान दिलवाने की बात कही।
रिपोर्ट से बढ़ी आरोपियों की मुश्किलें
मानवाधिकार आयोग को भेजी अंतरिम रिपोर्ट में पुलिस ने आयोग को सारी परिस्थितियों से अवगत करवाया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों युवक कैसे चौकी में पहुंचे। उन्हें वहा बेड़ियों और संगल से बांधकर क्यों रखा गया। आयोग को पुलिस ने बताया कि चौकी में जब उन युवकों को हिरासत में रखा गया, तब तक उनके खिलाफ कोई केस भी दर्ज नहीं किया गया।
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इसके अलावा अभी तक इस मामले की सारी बातों को इस रिपोर्ट में शामिल कर आयोग को भेजा गया है। यदि देखा जाए तो पुलिस की मानवाधिकार आयोग को भेजी गई ये अंतरिम रिपोर्ट आरोपी पुलिस वालों की मुश्किलें और बढ़ा देंगी। केस दर्ज किए बिना किसी को बेड़ियां पहनाकर अवैध हिरासत में रखना मानवाधिकार का हनन है।
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