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खाद्य सुरक्षा का अगला लक्ष्य जहर मुक्त पोषक खाद्यान्न :डॉ.चौहान
Sun, 04 Jan 2026 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sun, 04 Jan 2026 01:26 AM IST
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कुरुक्षेत्र। गुरुकुल कुरुक्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ करते हरियाणा ग्रामीण विकास संस
कुरुक्षेत्र। आज पूरी दुनिया जहर-मुक्त और रसायन-मुक्त भोजन की ओर बढ़ रही है। प्राकृतिक खेती केवल एक खेती पद्धति नहीं, बल्कि मानव स्वास्थ्य और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का आधार है। ये विचार हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने शनिवार को गुरुकुल कुरुक्षेत्र में क्षेत्रीय जैविक एवं प्राकृतिक खेती केंद्र, गाजियाबाद के तत्वावधान में प्राकृतिक खेती पर क्षेत्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को संबोधित कर रहे थे। गुरुकुल पहुंचने पर केंद्रीय मंत्रालय की ओर से निदेशक डॉ. हरीश वत्स और राज्य सरकार की तरफ से कृषि उपनिदेशक डॉ. करमचंद ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। उन्होंने कहा की खाद्य सुरक्षा का लक्ष्य हासिल कर चुके भारत के समक्ष अब जहर मुक्त खाद्यान्न उपलब्ध कराना अगला बड़ा लक्ष्य है।
हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ.वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती से न केवल भूमि की उर्वरता बनी रहती है, बल्कि उपभोक्ता को भी शुद्ध और पौष्टिक आहार प्राप्त होता है। डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने बढ़ती बीमारियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज समाज में अनेक गंभीर बीमारियों की एक बड़ी वजह रासायनिक खाद और कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग है। यदि हमें स्वस्थ समाज का निर्माण करना है तो जैविक एवं प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर अपनाना होगा। कार्यक्रम समन्वयक डॉ.श्रीवत्स, रीजनल डायरेक्टर, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी, जल और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार प्राकृतिक व जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान कर रही है।
पद्मश्री डॉ. हरिओम, सेवानिवृत्त प्रधान वैज्ञानिक कृषि विश्वविद्यालय हिसार ने कहा कि प्राकृतिक खेती वैज्ञानिक दृष्टि से प्रमाणित, टिकाऊ और भविष्य की आवश्यकता है। कार्यक्रम में किशोर शेड्ज, असिस्टेंट डायरेक्टर, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, विवेक चंद्र पांडे, टेक्निकल असिस्टेंट, श्री विशाल शर्मा, डॉ. बलजीत सहारण, वैज्ञानिक, हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, हिसार, राम निवास, व्यवस्थापक, गुरुकुल, डॉ नीलम छिकारा, डॉ करम चंद, डॉ संजय जाखड़, डॉ जितेंद्र खैरा सहित बड़ी संख्या में किसान, कृषि विशेषज्ञ एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ.वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती से न केवल भूमि की उर्वरता बनी रहती है, बल्कि उपभोक्ता को भी शुद्ध और पौष्टिक आहार प्राप्त होता है। डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने बढ़ती बीमारियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज समाज में अनेक गंभीर बीमारियों की एक बड़ी वजह रासायनिक खाद और कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग है। यदि हमें स्वस्थ समाज का निर्माण करना है तो जैविक एवं प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर अपनाना होगा। कार्यक्रम समन्वयक डॉ.श्रीवत्स, रीजनल डायरेक्टर, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी, जल और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार प्राकृतिक व जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान कर रही है।
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पद्मश्री डॉ. हरिओम, सेवानिवृत्त प्रधान वैज्ञानिक कृषि विश्वविद्यालय हिसार ने कहा कि प्राकृतिक खेती वैज्ञानिक दृष्टि से प्रमाणित, टिकाऊ और भविष्य की आवश्यकता है। कार्यक्रम में किशोर शेड्ज, असिस्टेंट डायरेक्टर, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, विवेक चंद्र पांडे, टेक्निकल असिस्टेंट, श्री विशाल शर्मा, डॉ. बलजीत सहारण, वैज्ञानिक, हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, हिसार, राम निवास, व्यवस्थापक, गुरुकुल, डॉ नीलम छिकारा, डॉ करम चंद, डॉ संजय जाखड़, डॉ जितेंद्र खैरा सहित बड़ी संख्या में किसान, कृषि विशेषज्ञ एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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