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कविता मन से तो दिमाग से गढ़ी जाती हैं कहानियां : डाॅ. राजेंद्र
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अंबाला के निजी रिजॉर्ट में लिटरेरिया कार्यक्रम में अपनी पुस्तक के बारे में बात करती लेखिकाएं।
- फोटो : स्वयं
अंबाला सिटी। निजी रिजॉर्ट में शनिवार को लिटरेरिया साहित्य महोत्सव का शुभारंभ हुआ। इसकी शुरुआत दीप प्रज्वलन और महोत्सव निदेशक डॉ. सोनिका सेठी के प्रेरक उद्घाटन भाषण के साथ हुई। इस अवसर पर डाॅ. राजेंद्र कनाैजिया ने कहा कि कविता मन से निकलती है तो दिमाग से गढ़ी जाती हैं कहानियां। वे बोले कि दोनों का अपना-अपना अलग महत्व है।
इस दौरान विभिन्न सत्रों में अंबाला ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों से आए लेखकों, कहानीकारों, साहित्यकारों ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में आसपास के शहरों से पुस्तक प्रेमी, लेखक, शिक्षाविद और कलाकार भी शामिल हुए। महोत्सव में मुख्य वक्ता के तौर पर राष्ट्रीय साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक पहुंचे। उन्होंने जीवन और साहित्य के बीच सहजीवी संबंध को स्पष्टता से खोज करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि एक शहर की आत्मा उसके साहित्य में सबसे अच्छी तरह से प्रतिबिंबित होती है।
लिटरेरिया ने अंबाला के लिए एक नया अध्याय खोला है। जहां कहानियों को न केवल बताया जाएगा बल्कि याद किया जाएगा। मुझे उम्मीद है कि ऐसे मंच हमारे युवाओं की सांस्कृतिक चेतना को गहरा करेंगे। महोत्सव में डॉ. सोनिका सेठी, डॉ. राजेंद्र कनौजिया, अलका कंसरा और सुरुचि कालरा की पुस्तकों का विमोचन भी हुआ।
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फोटो- 35
लिटरेरिया वह जहां शब्द सांस लेते हैं : डाॅ. सेठी
एक दिवसीय साहित्य उत्सव पुरानी यादों, रचनात्मकता और सांस्कृतिक विरासत के बीच निर्बाध रूप से चलने वाली बातचीत से भरपूर था। महोत्सव निदेशक डॉ. सेठी ने कहा कि लिटरेरिया सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है, यह एक शुरुआत है। कहानी कहने की एक शुरुआत जो अंबाला की आत्मा से मेल खाती है। हम एक ऐसी जगह बनाना चाहते थे जहां शब्द सांस लेते हैं और विचार खिलते हैं, और आज, हमने उस सपने को उड़ान भरते देखा।
गहराई से समझाई शब्दों की अहमियत
कार्यक्रम के एक सत्र में पैनल चर्चा (फ्रॉम इंक टू इम्पैक्ट) में डॉ. राजेंद्र कनौजिया और डॉ. पॉल कौर शामिल रहे। जहां विचार और कार्यवाही को आकार देने में साहित्य की परिवर्तनकारी क्षमता की बारीकियों और गहराई से जांच की गई। रिविसिटिंग लॉस्ट वर्ल्डस सत्र में हर्षाली सिंह, मोना वर्मा और प्रिया हजेला एक साथ आईं, हित्ती चोपड़ा के साथ बातचीत में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि साहित्य अतीत को कैसे याद रखता है और पुनर्जीवित करता है।
बैलेंसिंग प्रोफेशन एंड पैशन सत्र में रितु कामरा कुमार की ओर से संचालित डॉ. मंजू जैडका और नीना सिंह ने युवा मन को दिल और बुद्धि दोनों के साथ साहित्य को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। सुप्रसिद्ध डॉली गुलेरिया और सुनैनी शर्मा ने अपनी व्यक्तिगत और कलात्मक यात्रा साझा कीं। इस सत्र का कुशल संचालन पवन चोपड़ा ने किया। वंस अपॉन ए टाइम एंड बियॉन्ड सत्र में कहानीकारों डॉली सिंह, शैली विज और डॉ. योगेश कामथ को कहानियों की शाश्वत अपील को जीवंत करते देखा गया। इसमें सोनिया चौहान ने इन साहित्यकारों से विमर्श किया।
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इस दौरान विभिन्न सत्रों में अंबाला ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों से आए लेखकों, कहानीकारों, साहित्यकारों ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में आसपास के शहरों से पुस्तक प्रेमी, लेखक, शिक्षाविद और कलाकार भी शामिल हुए। महोत्सव में मुख्य वक्ता के तौर पर राष्ट्रीय साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक पहुंचे। उन्होंने जीवन और साहित्य के बीच सहजीवी संबंध को स्पष्टता से खोज करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि एक शहर की आत्मा उसके साहित्य में सबसे अच्छी तरह से प्रतिबिंबित होती है।
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लिटरेरिया ने अंबाला के लिए एक नया अध्याय खोला है। जहां कहानियों को न केवल बताया जाएगा बल्कि याद किया जाएगा। मुझे उम्मीद है कि ऐसे मंच हमारे युवाओं की सांस्कृतिक चेतना को गहरा करेंगे। महोत्सव में डॉ. सोनिका सेठी, डॉ. राजेंद्र कनौजिया, अलका कंसरा और सुरुचि कालरा की पुस्तकों का विमोचन भी हुआ।
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लिटरेरिया वह जहां शब्द सांस लेते हैं : डाॅ. सेठी
एक दिवसीय साहित्य उत्सव पुरानी यादों, रचनात्मकता और सांस्कृतिक विरासत के बीच निर्बाध रूप से चलने वाली बातचीत से भरपूर था। महोत्सव निदेशक डॉ. सेठी ने कहा कि लिटरेरिया सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है, यह एक शुरुआत है। कहानी कहने की एक शुरुआत जो अंबाला की आत्मा से मेल खाती है। हम एक ऐसी जगह बनाना चाहते थे जहां शब्द सांस लेते हैं और विचार खिलते हैं, और आज, हमने उस सपने को उड़ान भरते देखा।
गहराई से समझाई शब्दों की अहमियत
कार्यक्रम के एक सत्र में पैनल चर्चा (फ्रॉम इंक टू इम्पैक्ट) में डॉ. राजेंद्र कनौजिया और डॉ. पॉल कौर शामिल रहे। जहां विचार और कार्यवाही को आकार देने में साहित्य की परिवर्तनकारी क्षमता की बारीकियों और गहराई से जांच की गई। रिविसिटिंग लॉस्ट वर्ल्डस सत्र में हर्षाली सिंह, मोना वर्मा और प्रिया हजेला एक साथ आईं, हित्ती चोपड़ा के साथ बातचीत में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि साहित्य अतीत को कैसे याद रखता है और पुनर्जीवित करता है।
बैलेंसिंग प्रोफेशन एंड पैशन सत्र में रितु कामरा कुमार की ओर से संचालित डॉ. मंजू जैडका और नीना सिंह ने युवा मन को दिल और बुद्धि दोनों के साथ साहित्य को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। सुप्रसिद्ध डॉली गुलेरिया और सुनैनी शर्मा ने अपनी व्यक्तिगत और कलात्मक यात्रा साझा कीं। इस सत्र का कुशल संचालन पवन चोपड़ा ने किया। वंस अपॉन ए टाइम एंड बियॉन्ड सत्र में कहानीकारों डॉली सिंह, शैली विज और डॉ. योगेश कामथ को कहानियों की शाश्वत अपील को जीवंत करते देखा गया। इसमें सोनिया चौहान ने इन साहित्यकारों से विमर्श किया।