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Ambala News: चाय के कप में खेल, 170 की जगह 150 एमएल में बेच रहे अवैध वेंडर
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अंबाला। नकली कप में चाय बेचने का खेल चल रहा है और रेलवे इससे अंजान है। अंबाला कैंट स्टेशन पर दिन में नियमों का पालन होता है और अंधेरा होते ही पक्की सराय के रास्ते दीवार फांदकर अवैध वेंडर हाथों में केतली व डुप्लीकेट कप लेकर स्टेशन पर पहुंच जाते हैं। वे पांच रुपये की जगह 10 रुपये में चाय बेचकर यात्रियों से अवैध वसूली कर रहे हैं। जबकि रेलवे ने केतली वाली चाय के पांच रुपये और टी बैग सहित चाय और कॉफी के 10 रुपये निर्धारित किए हुए हैं। यह चाय यात्री को 170 एमएल के कप में मिलेगी। लेकिन अंबाला कैंट स्टेशन पर ऐसा नहीं हो रहा है। अमर उजाला ने जब रेलवे स्टेशन पर जायजा लिया तो जानकारी मिली कि चाय के नाम पर यात्रियों से धोखा हो रहा है। असली कप से मिलते-जुलते 150 एमएल के कप में 120 एमएल चाय यात्रियों को परोसी जा रही है। जबकि असली 170 एमएल के कप में 150 एमएल चाय रेलवे की ओर से निर्धारित की गई है।
जानकारी के अनुसार अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर 300 ट्रेनों का रोजाना आवागमन होता है और यात्रियों की संख्या भी 50 हजार के करीब है। ऐसे में नकली कप में चाय बेचकर वैंडर कुछ ही घंटों में दोगुना मुनाफा कमा लेते हैं। कागज के असली कप की कीमत 55 पैसे और नकली छोटे कप की कीमत मात्र 35 पैसे है। वहीं जो चाय यात्रियों को परोसी जाती है, उसकी गुणवत्ता भी काफी घटिया होती है। प्राप्त जानकारी अनुसार स्टेशन पर और ट्रेनों में रोजाना 15 हजार से अधिक चाय के कप बिकते हैं और इससे वेंडरों को रोजाना एक से डेढ़ लाख रुपये की आमदनी हो रही है। नकली कप में चाय बेचने वालों पर कार्रवाई करने के लिए यात्री स्टेशन पर मौजूद अधीक्षक कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया के माध्यम व रेलवे के टोल फ्री नंबर 139 पर भी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
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स्टेशन व ट्रेन में रेलवे द्वारा निर्धारित किए गए कप में तय दाम पर ही चाय बेचने का नियम है। समय-समय पर वाणिज्य विभाग द्वारा जांच अभियान चलाकर अवैध वेंडरों पर शिकंजा कसा जाता है। अगर कोई भी वेंडर यात्री से ओवरचार्जिंग करता है या उसे अमान्य कप में चाय बेचता है तो उसकी शिकायत स्टेशन पर शिकायत पुस्तिका में दर्ज की जा सकती है।
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नवीन कुमार, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक।
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जानकारी के अनुसार अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर 300 ट्रेनों का रोजाना आवागमन होता है और यात्रियों की संख्या भी 50 हजार के करीब है। ऐसे में नकली कप में चाय बेचकर वैंडर कुछ ही घंटों में दोगुना मुनाफा कमा लेते हैं। कागज के असली कप की कीमत 55 पैसे और नकली छोटे कप की कीमत मात्र 35 पैसे है। वहीं जो चाय यात्रियों को परोसी जाती है, उसकी गुणवत्ता भी काफी घटिया होती है। प्राप्त जानकारी अनुसार स्टेशन पर और ट्रेनों में रोजाना 15 हजार से अधिक चाय के कप बिकते हैं और इससे वेंडरों को रोजाना एक से डेढ़ लाख रुपये की आमदनी हो रही है। नकली कप में चाय बेचने वालों पर कार्रवाई करने के लिए यात्री स्टेशन पर मौजूद अधीक्षक कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया के माध्यम व रेलवे के टोल फ्री नंबर 139 पर भी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं।
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स्टेशन व ट्रेन में रेलवे द्वारा निर्धारित किए गए कप में तय दाम पर ही चाय बेचने का नियम है। समय-समय पर वाणिज्य विभाग द्वारा जांच अभियान चलाकर अवैध वेंडरों पर शिकंजा कसा जाता है। अगर कोई भी वेंडर यात्री से ओवरचार्जिंग करता है या उसे अमान्य कप में चाय बेचता है तो उसकी शिकायत स्टेशन पर शिकायत पुस्तिका में दर्ज की जा सकती है।
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नवीन कुमार, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक।