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मोदी की ताजपोशी पर ‘खुशी’ और ‘खामोशी’
अंबाला
Updated Sun, 15 Sep 2013 12:38 AM IST
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अंबाला में नरेंद्र भाई भाजपा के नए नायक के रूप में उभरकर सामने आ गए हैं। उनकी ताजपोशी को लेकर एक ओर जहां भाजपा हाईकमान में थोड़ा मतभेद चल रहा है।
वहीं अंबाला में भी नरेंद्र मोदी की ताजपोशी पर ‘खुशी’ और ‘खामोशी’ का माहौल है। मोदी के समर्थक तो खूब आतिशबाजी और लड्डू बांटकर जश्न मना रहे हैं, मगर वहीं सुषमा स्वराज के समर्थक इस जश्न से काफी दूरी बनाए हुए हैं। शहर व छावनी दोनों जगह यहां अंबाला में सुषमा के समर्थक जश्न के इस माहौल से दूर ही रहे।
बाकायदा अंबाला छावनी भाजपा कार्यालय पर मोदी की ताजपोशी का बढ़िया जश्न हुआ, आतिशबाजी हुई, मिठाइयां बंटी, मगर सुषमा स्वराज के समर्थक वहां कोई नहीं पहुंचा। उल्लेखनीय है कि सुषमा स्वराज यहां अंबाला की ही बेटी है।
यह और बात है कि अंबाला लोकसभा सीट आरक्षित होने की वजह से वह यहां से लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ सकती। मगर यहां विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान सीटों के बंटवारे से लेकर प्रचार अभियान तक सुषमा स्वराज का पूरा दखल रहता है। दिल्ली में ही बैठकर सुषमा स्वराज यहां अंबाला में भाजपा की राजनीतिक और नेताओं की गतिविधियों पर पूरी नजर रखती है।
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इसी की बदौलत यहां अंबाला में सुषमा की अच्छी खासी भाजपाइयों की फौज है, जो सुषमा को अब विपक्ष की नेता बनने के बाद प्रधानमंत्री की कुर्सी पर देखना चाहती थी। उनके डाक्टर भाई व अन्य परिजन भी ऐसा ही चाहते थे।
इसलिए समर्थकों को थी उम्मीद
सुषमा के समर्थकों ने बताया कि उन्हें बहुत उम्मीद थी कि वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव का नेतृत्व कौन करेगा? मोदी और आडवाणी में वैचारिक मतभेद में सुषमा का नाम उभरकर सामने आने की संभावना थी।
भाजपा हाईकमान व संघ सुषमा स्वराज को आगे करके मोदी और आडवाणी सरीखे आला नेताओं के वैचारिक मतभेद को ही खत्म कर दें, लेकिन सुषमा के समर्थकों की सोच के अनुरूप कुछ नहीं हुआ और हाईकमान ने मोदी को भाजपा का नया नायक घोषित कर दिया।
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वहीं अंबाला में भी नरेंद्र मोदी की ताजपोशी पर ‘खुशी’ और ‘खामोशी’ का माहौल है। मोदी के समर्थक तो खूब आतिशबाजी और लड्डू बांटकर जश्न मना रहे हैं, मगर वहीं सुषमा स्वराज के समर्थक इस जश्न से काफी दूरी बनाए हुए हैं। शहर व छावनी दोनों जगह यहां अंबाला में सुषमा के समर्थक जश्न के इस माहौल से दूर ही रहे।
बाकायदा अंबाला छावनी भाजपा कार्यालय पर मोदी की ताजपोशी का बढ़िया जश्न हुआ, आतिशबाजी हुई, मिठाइयां बंटी, मगर सुषमा स्वराज के समर्थक वहां कोई नहीं पहुंचा। उल्लेखनीय है कि सुषमा स्वराज यहां अंबाला की ही बेटी है।
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यह और बात है कि अंबाला लोकसभा सीट आरक्षित होने की वजह से वह यहां से लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ सकती। मगर यहां विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान सीटों के बंटवारे से लेकर प्रचार अभियान तक सुषमा स्वराज का पूरा दखल रहता है। दिल्ली में ही बैठकर सुषमा स्वराज यहां अंबाला में भाजपा की राजनीतिक और नेताओं की गतिविधियों पर पूरी नजर रखती है।
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इसी की बदौलत यहां अंबाला में सुषमा की अच्छी खासी भाजपाइयों की फौज है, जो सुषमा को अब विपक्ष की नेता बनने के बाद प्रधानमंत्री की कुर्सी पर देखना चाहती थी। उनके डाक्टर भाई व अन्य परिजन भी ऐसा ही चाहते थे।
इसलिए समर्थकों को थी उम्मीद
सुषमा के समर्थकों ने बताया कि उन्हें बहुत उम्मीद थी कि वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव का नेतृत्व कौन करेगा? मोदी और आडवाणी में वैचारिक मतभेद में सुषमा का नाम उभरकर सामने आने की संभावना थी।
भाजपा हाईकमान व संघ सुषमा स्वराज को आगे करके मोदी और आडवाणी सरीखे आला नेताओं के वैचारिक मतभेद को ही खत्म कर दें, लेकिन सुषमा के समर्थकों की सोच के अनुरूप कुछ नहीं हुआ और हाईकमान ने मोदी को भाजपा का नया नायक घोषित कर दिया।