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Ambala News: घने कोहरे में शाहबाद से रेहड़ी पर ड्रिप लगाकर अस्पताल पहुंचा मरीज
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अंबाला। जागरूकता की कमी के कारण स्वास्थ्य सेवाएं लाचार नजर आती है। ऐसा ही हुआ शाहाबाद के एक मरीज के साथ। शुक्रवार दोपहर 12 बजे वह एबुलेंस का किराया नहीं देने के कारण अपनी जुगाड़ रेहड़ी में ही ड्रिप के साथ ही शहर के नागरिक अस्पताल पहुंचा।
मरीज को पिछले दो दिनों से पेशाब करने में परेशानी आ रही थी। इसके चलते शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे परिजन मरीज को लेकर शाहबाद के एक निजी अस्पताल पहुंचे थे। जहां डाॅक्टर ने मरीज को ड्रिप लगा दी। इसके बाद डॉक्टर ने मरीज को शहर नागरिक अस्पताल में जाने को कहा, जिसके लिए चिकित्सक ने निजी एंबुलेंस को बुलाया और मरीज के परिजनों से 1500 रुपये मांगे, लेकिन पैसे के अभाव में मरीज के परिजन मजबूरन उसे रेहड़ी पर ही शहर नागरिक अस्पताल की ओर निकल पड़े। इस दौरान किसी ने मरीज को किसी ने यह नहीं बताया कि वह सरकारी नंबर पर फोन कर सरकारी एंबुलेंस सेवा को बुला सकता है।
मरीज को टीबी की थी समस्या
खानपुर गांव के रहने वाले महावीर ने बताया कि उसके पिता सतपाल टीबी से ग्रस्त हैं। पिछले 10 दिन से वे टीबी की दवा ले रहे हैं, लेकिन दो दिन पहले तबीयत ज्यादा खराब हो गई और पेशाब आना बंद हो गया। इसके बाद शुक्रवार सुबह 10 बजे वे उन्हें लेकर शाहबाद के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां पर डाॅक्टर ने ड्रिप लगा दी, लेकिन थोड़ी देर बाद ही डाॅक्टर ने उन्हें सिटी सिविल अस्पताल ले जाने को कहा। इसके बाद एक निजी एंबुलेंस को बुलाया।
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डॉक्टर ने उससे एबुलेंस के लिए 1500 रुपये मांगे, लेकिन उनके पास पैसे नहीं थे। इसके चलते घने कोहरे में वो अपने पिता को अपनी माता और अन्य परिजनों के साथ रेहड़ी में ही सिटी अस्पताल के लिए निकल पड़ा। महावीर ने बताया कि छावनी से कुछ ही दूरी पर उनकी रेहड़ी की चेन भी उतर गई। इस कारण उन्हें दो किलोमीटर तक रेहड़ी को घसीटकर ले जाना पड़ा। फिर रेहड़ी ठीक कराने के बाद वे सिटी के नागरिक अस्पताल पहुंचे। जहां पहुंचने पर अस्पताल परिसर के कर्मचारी भी उन्हें देख कर हैरान हो गए।
अस्पताल पहुंचने पर कर्मचारियों की मदद से मरीज को आपातकालीन में लाया गया। जहां डाॅक्टरों ने उसका उपचार शुरू किया। महावीर ने बताया कि वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले है। उन्हें सरकारी एंबुलेंस के बारे में जानकारी नहीं थी। बहरहाल नागरिक अस्पताल में अब मरीज का उपचार चल रहा है।
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मरीज को पिछले दो दिनों से पेशाब करने में परेशानी आ रही थी। इसके चलते शुक्रवार सुबह करीब 10 बजे परिजन मरीज को लेकर शाहबाद के एक निजी अस्पताल पहुंचे थे। जहां डाॅक्टर ने मरीज को ड्रिप लगा दी। इसके बाद डॉक्टर ने मरीज को शहर नागरिक अस्पताल में जाने को कहा, जिसके लिए चिकित्सक ने निजी एंबुलेंस को बुलाया और मरीज के परिजनों से 1500 रुपये मांगे, लेकिन पैसे के अभाव में मरीज के परिजन मजबूरन उसे रेहड़ी पर ही शहर नागरिक अस्पताल की ओर निकल पड़े। इस दौरान किसी ने मरीज को किसी ने यह नहीं बताया कि वह सरकारी नंबर पर फोन कर सरकारी एंबुलेंस सेवा को बुला सकता है।
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मरीज को टीबी की थी समस्या
खानपुर गांव के रहने वाले महावीर ने बताया कि उसके पिता सतपाल टीबी से ग्रस्त हैं। पिछले 10 दिन से वे टीबी की दवा ले रहे हैं, लेकिन दो दिन पहले तबीयत ज्यादा खराब हो गई और पेशाब आना बंद हो गया। इसके बाद शुक्रवार सुबह 10 बजे वे उन्हें लेकर शाहबाद के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां पर डाॅक्टर ने ड्रिप लगा दी, लेकिन थोड़ी देर बाद ही डाॅक्टर ने उन्हें सिटी सिविल अस्पताल ले जाने को कहा। इसके बाद एक निजी एंबुलेंस को बुलाया।
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डॉक्टर ने उससे एबुलेंस के लिए 1500 रुपये मांगे, लेकिन उनके पास पैसे नहीं थे। इसके चलते घने कोहरे में वो अपने पिता को अपनी माता और अन्य परिजनों के साथ रेहड़ी में ही सिटी अस्पताल के लिए निकल पड़ा। महावीर ने बताया कि छावनी से कुछ ही दूरी पर उनकी रेहड़ी की चेन भी उतर गई। इस कारण उन्हें दो किलोमीटर तक रेहड़ी को घसीटकर ले जाना पड़ा। फिर रेहड़ी ठीक कराने के बाद वे सिटी के नागरिक अस्पताल पहुंचे। जहां पहुंचने पर अस्पताल परिसर के कर्मचारी भी उन्हें देख कर हैरान हो गए।
अस्पताल पहुंचने पर कर्मचारियों की मदद से मरीज को आपातकालीन में लाया गया। जहां डाॅक्टरों ने उसका उपचार शुरू किया। महावीर ने बताया कि वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले है। उन्हें सरकारी एंबुलेंस के बारे में जानकारी नहीं थी। बहरहाल नागरिक अस्पताल में अब मरीज का उपचार चल रहा है।