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Ambala News: बॉर्डर खुलने से यात्रियों के समय की होगी बचत, ट्रांसपोर्ट कारोबारी भी हुए खुश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 21 Mar 2025 03:37 AM IST
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Passengers will save time due to border opening, transport businessmen are also happy
अंबाला। 13 महीने बाद शंभू बॉर्डर खुलने से परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों ने राहत की सांस ली है। एक तरफ जहां लोगों को ग्रामीण मार्गों से लंबे लंबे जाम को झेलना पड़ रहा था तो वहीं ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को करोड़ों का फटका लग रहा था। इसी प्रकार सार्वजनिक परिवहन भी शंभू बॉर्डर बंद होने से प्रभावित हो रहा था। रोडवेज बसों के चालकों को पंजाब जाने के लिए 70 से 80 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा था, इस दौरान यात्रियों का समय भी काफी खराब होता था। इसके कारण था कि रोडवेज ने बसों को इस रूट पर कम कर दिया था। आंदोलन से पहले शंभू बॉर्डर खुला होने पर लोग 20 मिनट में पंजाब के राजपुरा पहुंच जाते थे। ठीक ऐसा ही असर ट्रांसपोर्ट कारोबारियों पर पड़ रहा था।
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एक से दो घंटे तक फंसे रहते थे जाम में
यमुनानगर डिपो के चालक मंजीत सिंह ने बताया कि वह पोंटा साहिब से अमृतसर मार्ग पर बस का संचालन करता है। अमृतसर जाने के लिए उसे जीरकपुर या फिर लोह सिम्बली मार्ग का इस्तेमाल करना पड़ता है। कई बार दोनों मार्ग पर जाम की स्थिति बनी रहती थी, ऐसे में उसे जाम एक से दो घंटे का समय तक लग जाता था। इससे समय और डीजल अतिरिक्त लगता था। लेकिन अब शंभू बार्डर खुलने से राहत मिलेगी।
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20 बसें कम आ रही थी अंबाला
हरविंदर सिंह ने बताया कि पंजाब से रोजाना करीब 50 बसें अंबाला भेजी जाती थी। शंभू बार्डर बंद होने के कारण बसों को अंबाला आने में अतिरिक्त समय लगता था। जिसके कारण रोजाना ही 20 से ज्यादा बसों के समय मिस हो रहा था। बसें भी कम चल रहीं थी। ऐसे में यात्रियों के साथ साथ उन्हें भी परेशानी का सामना करना पड़ता था।
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ग्रामीण रूट से जाते हुए लगता था 20 लीटर अतिरिक्त डीजल
करनाल डिपो के चालक विपिन ने बताया कि वह दिल्ली से पटियाला मार्ग पर बस चलाते हैं। शंभू बार्डर बंद के चलते वह लोह सिम्बली, देवीगढ, नन्यौला के ग्रामीण मार्ग से होते हुए पटियाला जाते थे। इस दौरान कई गांव में सड़कें टूटी हुई हैं। जिसके कारण उनकी बस की क्षतिग्रस्त हो गई है। वहीं कई गांव के लोग उनसे लड़ते थे वह बस को गांव से गुजरने नहीं देते थे। ऐसे में समय के साथ साथ 20 लीटर डीजल अतिरिक्त लग रहा था। वहीं पटियाला निवासी 60 वर्षीय सुरजीत कौर ने बताया कि उनका अंबाला में आना जाना लगा रहता है। एक साल से उन्हें घर जाने में एक से दो घंटे तक समय लगता था। जिसके कारण बहुत परेशानी होती थी।

ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन अंबाला ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का धन्यवाद किया है। पूर्व प्रधान संजीव पराशर ने बताया कि 13 महीने से ट्रांसपोर्टर दुखी हैं। उन्होंने अपना लाखों रुपये का डीजल और समय व्यर्थ में जाया किया। इसके कारण कई बार उनकी गाड़ी की किस्त भी लेट हुई। इसके अलावा कई ट्रांसपोर्टरों को जुर्माना भी लगा है।
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