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Ambala News: करोड़ों से बने होस्टल में रहने की नहीं अनुमति, स्कूल ने दिया आसरा

Tue, 20 Jan 2026 12:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला Updated Tue, 20 Jan 2026 12:38 AM IST
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Not allowed to stay in hostel built at a cost of crores, school provided shelter
अनुज, फुटबॉल ​खिलाड़ी
अंबाला। खेलों को बढ़ावा देने की सरकारी नीतियां किस कदर जमीनी स्तर पर दम तोड़ रही हैं, इसका सबूत इन दिनों अंबाला में देखने को मिल रहा है। कैथल, यमुनानगर, पंचकूला से फुटबॉल खिलाड़ी बेहतरीन प्रशिक्षण की चाह में अपना घर छोड़कर अंबाला आ चुके हैं लेकिन करोड़ों रुपये की लागत से बने होस्टल में रहने की अनुमति नहीं मिली। दो साल से एक निजी स्कूल इन खिलाड़ियों को नि:शुल्क आसरा दे रहा है। खेल विभाग का कहना है कि बिना रेजिडेंशियल अकादमी में दाखिले के वहां पर बाहरी खिलाड़ियों को रहने की अनुमति नहीं है। खेल विभाग की यह पॉलिसी खिलाड़ियों के लिए चार साल से परेशानी बनी हुई है। फुटबॉल के खिलाड़ी 70 से 200 किलोमीटर दूर आकर रह रहे हैं।
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मैदान व कोच अच्छा मिला तो शुरू की पढ़ाई भी

कैथल, यमुनानगर व पंचकूला से आने वाले ये खिलाड़ी साल 2022-23-24 में रेजिडेंशियल अकादमी का हिस्सा बने थे। उस समय तो बेहतर प्रशिक्षण मिलने पर प्रतिभा में काफी सुधार पाया। बाद में उन्हें वापस लौटने के लिए बोला गया। इन खिलाड़ियों ने चार साल पहले ही अंबाला में रहकर स्कूल में पढ़ाई के साथ-साथ मैदान में सुबह व शाम को प्रशिक्षण लेने का निर्णय लिया। चार साल से वह फारुखा खालसा स्कूल में पढ़ाई करते हैं और वहीं कमरा लेकर रह रहे हैं।
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बिना खिलाड़ियों के धूल फांक रहा होस्टल
पंचकूला निवासी अनुज का कहना है कि अंबाला में खेल विभाग का आधुनिक हॉस्टल काफी समय से बना हुआ है। कमरों में बिस्तर और अन्य सुविधाएं तो हैं लेकिन वे खिलाड़ियों के लिए नहीं बल्कि धूल फांक रही है। वह कई बार रहने के लिए जा चुकी हैं। हर बार उन्हें मना कर दिया जाता है। जब सुविधाएं खिलाड़ियों के लिए हैं तो मिली चाहिए।
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अभ्यास के लिए रह रहे परिवार से दूर
यमुनानगर निवासी कृष ने बताया कि वह चार साल से रोजाना मैदान में जाकर सुबह व शाम प्रशिक्षण ले रहे हैं। जब होस्टल बना हुआ है तो उसमें रहने की अनुमति मिलनी चाहिए। विभाग को चाहिए तो वह किराया ले सकता है, तब भी उन्हें अनुमति नहीं मिल रही है। वह तो फुटबॉल के लिए अपने परिवार से दूर रह रहे हैं।
खाली होने के बावजूद रहने की अनुमति नहीं

हिसार निवासी योगेश ने बताया कि फुटबॉल के बेहतर प्रशिक्षण के लिए करीब 200 किलोमीटर दूर आकर रहना पड़ रहा है। खेल विभाग खाली होने के बावजूद रहने नहीं दे रहा तो वहीं स्कूल में नि:शुल्क रहने की अनुमति मिली है। विभाग को चाहिए कि कम से कम खिलाड़ियों को बढ़ावा देने के लिए अनुमति देने के लिए कदम उठाना चाहिए।


- रेजिडेंशियल अकादमी में दाखिले के बिना होस्टल में खिलाड़ी को रहने की अनुमति नहीं है। इस साल में रेजिडेंशियल अकादमी मिल सकती है। अकादमी खुलने के बाद खिलाड़ियों को खाना, रहना, प्रशिक्षण सब नि:शुल्क दिया जाता है।
- राम स्वरूप, कार्यवाहक जिला खेल अधिकारी अंबाला

अनुज, फुटबॉल खिलाड़ी

अनुज, फुटबॉल खिलाड़ी

अनुज, फुटबॉल खिलाड़ी

अनुज, फुटबॉल खिलाड़ी

अनुज, फुटबॉल खिलाड़ी

अनुज, फुटबॉल खिलाड़ी

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