सड़कों और खेल मैदानों में उतारना पड़ रहा धान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धान की आवक तेज हो रही है, मगर अनाज मंडियों में धान का उठान धीमा पड़ा हुआ है। इसी वजह से अंबाला की तमाम छोटी बड़ी 14 अनाज मंडियों व खरीद केंद्रों पर हालात खराब बने हुए है। सबसे ज्यादा हालात तो अंबाला कैंट व अंबाला सिटी अनाज मंडियों के बने हुए हैं। क्योंकि इन मंडियों में तो धान बेचने में किसानों का पसीना छूट रहा है। आलम यह है कि अंबाला कैंट में तो धान सड़कों पर उतारना पड़ रहा है, जिस वजह से आसपास की सड़कें कई दिनों से जाम है। जबकि सिटी अनाज मंडी पूरी तरह से फुल हो गई है और मजबूरन अब धान को सेक्टर नौ के हुडा खेल मैदान में उतारना पड़ रहा है। इसी के चलते हालात खासे खराब है। इससे किसानों और लोगों को बहुत ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अंबाला कैंट अनाज मंडी इलाके की सड़के जाम अंबाला कैंट की अनाज मंडी दशकों पुरानी मंडी है। लेकिन आज के परिवेश में ये अनाज मंडी बहुत ही छोटी हो गई है। मंडी में अनाज की आवक ज्यादा होती है। दूसरा, बाजारों में आने वाले चौपहिया व दोपहिया वाहन भी मंडियों में खड़े कर दिए जाते हैं, इसलिए इस मंडी में अनाज उतारने को जगह ही नहीं मिलती। मजबूरन धान सड़कों पर उतारा जा रहा है, जिस वजह से अनाज मंडी के आसपास की सड़कें कई दिनों से पूरी तरह जाम है। यहां किसानों के लिए रेस्ट हाउस, अथवा धान बचाने के लिए शेड इत्यादि की भी कोई व्यवस्था नहीं है। लिहाजा यहां लोगों व किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। धान बेचने आए किसान गुलजार सिंह, संतोख सिंह, करनैल, जसबीर सिंह के अनुसार पांच साल गुजर चुके हैं, ये सुनते ही अंबाला कैंट की मंडी बुहावा में ट्रांसफर होगी, लेकिन आज तक ये परियोजना सिरे नहीं चढ़ी। यहीं हर साल परेशानियों के साथ धान उतारना पड़ता है।
अंबाला सिटी में धान बेचने को घंटों इंतजार अंबाला सिटी में भी अनाज मंडी इस वक्त पूरी तरह से फुल है। उठान हो नहीं रहा है, इसलिए लाखों बोरिया अनाज मंडी के शेडों में ही पड़ी हुई है। किसानों को इसी वजह से अपनी धान बेचने में काफी समय लग रहा है। किसान सज्जन सिंह ने बताया कि उसे यहां अपने ट्रेक्टर में ही धान रखे करीबन बीस घंटे बीत चुके हैं, मंडी में जगह ही नहीं है। किसान पालाराम के अनुसार मंडी में धान लेकर आया था, नमी की बात कहकर यहीं पड़ी सूख रही है, अभी तक खरीद नहीं हुई। किसान फूल सिंह के अनुसार यदि अनाज मंडी में जगह नहीं है, तो यहां पड़ी धान को क्यों नहीं उठवाया जा रहा है। स्थिति यह है कि उठान हो नहीं रहा है और बिकने के लिए धान की आवक जारी है, ऐसी स्थिति में धान को हुडा मैदान में उतारा जा रहा है।
मंत्री के दावे पर भारी पड़ी आढ़तियों की चेतावनी अंबाला कैंट के विधायक एवं मंत्री अनिल विज ने गेहूं के सीजन में दावा किया था कि इसी सीजन का धान हर हालत में बुहावा मंडी में ही गिरेगा। क्योंकि कैंट अनाज मंडी के मौजूदा हालात बहुत ज्यादा खराब हो चुके हैं और हर सीजन में यहां बाजार के बीचोंबीच बनी अनाज मंडी से जबरदस्त जाम के हालात पैदा होते हैं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मंत्री के इस दावे पर कैंट के आढ़तियों की जिद भारी पड़ गई। विभागीय सूत्रों की माने तो मंत्री के निर्देशों के चलते मार्केट कमेटी कैंट ने इस सीजन की धान को बुहावा मंडी में उतरवाने के चलते आढ़तियों को इस सीजन में नोटिस भी दे दिया था। इतना नहीं आनन-फानन में निर्माणाधीन बुहावा मंडी मेतं धान उतारने के लिए कुछ जरूरी इंतजाम भी करवा दिए थे। लेकिन आढ़ती इस नोटिस के खिलाफ लामबंद हो गए। आढ़तियों ने मार्केट कमेटी के अफसरों से साफ कह दिया कि बुहावा अनाज मंडी अभी तक पूरी तरह तैयार नहीं हुई है। वहां आढ़तियों के बैठने को जगह नहीं, किसानों को बैठने व पल्लेदारों को आराम करने को जगह नहीं। शौचालय, पीने के पानी के पुख्ता इंतजाम नहीं। अनाज मंडी के साथ-साथ चारा व सब्जी मंडी का काम वहां चल रहा है, सुविधाओं के नाम पर वहां कुछ भी नहीं है। ऐसे में वहां आढ़ती और किसान बैठकर धान की खरीद-फरोख्त कैसे कर सकते हैं? आढ़तियों ने मार्केट कमेटी के अफसरों से साफ कह दिया है कि जब तक बुहावा मंडी पूरी तरह तैयार नहीं हो जाती और सरकार ने डिनोटिफाई नहीं हो जाती, तब तक वे वहां शिफ्ट नहीं करेंगे। आढ़तियों ने ये भी चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने दबाव में आकर उनके साथ धक्का किया, तो वे अदालत की शरण लेंगे। आढ़तियों की यही जिद मंत्री के दावे पर फिलहाल भारी पड़ गई है और प्रशासन फिलहाल मंडी का काम पूरा करवाने में लगा हुआ है।
धान की आवक थोड़ी ज्यादा हो रही है। दूसरा मंडियों में धान भी नमी वाला आ रहा है, इसलिए उसे सूखाकर खरीदा जा रहा है। उठान के काम को भी और तेज करवाया जाएगा। इसी वजह से धान को हुडा मैदान में उतरवाना पड़ रहा है। -कविता नरवाल, सचिव, मार्केट कमेटी सिटी
हमारी कौशिश थी कि इस बार धान बुहावा मंडी में ही उतरवाया जाए। मार्केट कमेटी की ओर से फिलहाल तैयारियां भी पूरी कर ली गई थी। लेकिन चूंकि अभी मंडी का निर्माण पूरा नहीं हुआ है, इसलिए आढ़तियों ने फिलहाल वहां शिफ्ट करने से इंकार कर दिया। बहरहाल, मंडी का निर्माण जल्द से जल्द पूरा करने का प्रयास जारी है। -सतीश कुमार, सचिव, मार्केट कमेटी कैंट
मंडी पॉलीटिक्स से किसानों को राहत नहीं मंडियों में किसानों की समस्याओं को लेकर राजनीति पूरी तरह से हावी है। खट्टर सरकार जहां मंडियों में किसानों को बढिय़ा सुविधाएं उपलब्ध करवाने का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष इस दावे को झूठ करार दे रही है। इसलिए विभिन्न पार्टियों के नेता अनाज मंडियों में किसानों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं पर राजनीति कर रहे हैं। पिछले दिनों अंबाला की मंडियों में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद दीपेंद्र हुड्डा समेत इनेलो व भाजपा के कई नेता मंडियों का दौरा कर चुके हैं। लेकिन किसानों की समस्याएं आज भी वहीं की वहीं है।