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Ambala News: सांस की दिक्कत से जूझने वाले नवजातों को मिलेगा सहारा
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नागरिक अस्पताल के एमएसएनसीयू में पहुंचा वेंटिलेटर। संवाद
- फोटो : बेतवा नदी का जलस्तर। संवाद
अंबाला सिटी। नागरिक अस्पताल में सांस संबंधी संवेदनशील परिस्थितियों से जूझने वाले नवजातों को अब नागरिक अस्पताल से रेफर करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्योंकि नागरिक अस्पताल में बने एसएनसीयू वार्ड में अब 68 लाख रुपये की लागत से दो वेंटिलेटर की व्यवस्था कर दी गई है। बीते सप्ताह ही वेंटिलेटर को लगाया गया है। अब नवजात का संवदेनशील परिस्थिति में उपचार संभव होगा, इसके साथ ही गरीब परिवारों को भी अपने बच्चे के उपचार के लिए महंगे अस्पतालों में धक्के नहीं खाने पड़ेंगे, वहीं बच्चों को भी पीजीआई में रेफर नहीं करना पड़ेगा।
शट डाउन कैटेगरी के बाद ही नवजात को मिलेगी छुट्टी
वेंटिलेटर की सुविधा लेने के बाद जैसे ही नवजात का स्वास्थ्य संतुलित हो जाता है, तो उसे चिकित्सक की निगरानी में जच्चा के साथ शट डाउन कैटेगरी में रखा जाएगा ताकि पता रहे कि वेंटिलेटर के बिना नवजात की हालत स्थिर है या नहीं। यदि जच्चा-बच्चा का स्वास्थ्य ठीक रहता है तो उसे तीन से चार दिन के अंदर छुट्टी दे दी जाएगी।
नवजातों की मौत में आएगी कमी
कई बार देखने में आता है कि जिन नवजात को सांस की समस्या होती है उन्हें पीजीआई भेज दिया जाता है। मगर वेंटिलेटर के अभाव में बच्चों की जान को खतरा बना रहता है। वर्तमान में एक वर्ष में 12 नवजात दम तोड़ देते हैं। निदेशालय की ओर से इस आंकड़े को एकल अंक में करने का लक्ष्य दिया गया है। वेंटिलेटर की मदद से यह आंकड़ा जल्द ही कम हो जाएगा।
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वार्मर से भी मिलती है मदद
नागरिक अस्पताल में नवजात के लिए 26 वार्मर भी उपलब्ध है, इनमें समय से पहले जन्मे बच्चों को रखा जाता है। वार्मर नवजात के शरीर के तापमान को स्थिर रखने में मदद करता है। वहीं वार्मर नवजात के शरीर के तापमान को स्थिर करके, रक्त परिसंचरण को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, जिससे शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति में सुधार होता है।
सरकार के निर्देशों पर ही वेंटिलेटर स्थापित किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल भी शुरू किया जा चुका है, इससे नवजात को रेफर करने की जरूरत नहीं रहेगी।
- डॉ सुखप्रीत सिंह, नोडल अधिकारी एमएसएनसीयू स्वास्थ्य विभाग अंबाला।
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शट डाउन कैटेगरी के बाद ही नवजात को मिलेगी छुट्टी
वेंटिलेटर की सुविधा लेने के बाद जैसे ही नवजात का स्वास्थ्य संतुलित हो जाता है, तो उसे चिकित्सक की निगरानी में जच्चा के साथ शट डाउन कैटेगरी में रखा जाएगा ताकि पता रहे कि वेंटिलेटर के बिना नवजात की हालत स्थिर है या नहीं। यदि जच्चा-बच्चा का स्वास्थ्य ठीक रहता है तो उसे तीन से चार दिन के अंदर छुट्टी दे दी जाएगी।
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नवजातों की मौत में आएगी कमी
कई बार देखने में आता है कि जिन नवजात को सांस की समस्या होती है उन्हें पीजीआई भेज दिया जाता है। मगर वेंटिलेटर के अभाव में बच्चों की जान को खतरा बना रहता है। वर्तमान में एक वर्ष में 12 नवजात दम तोड़ देते हैं। निदेशालय की ओर से इस आंकड़े को एकल अंक में करने का लक्ष्य दिया गया है। वेंटिलेटर की मदद से यह आंकड़ा जल्द ही कम हो जाएगा।
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वार्मर से भी मिलती है मदद
नागरिक अस्पताल में नवजात के लिए 26 वार्मर भी उपलब्ध है, इनमें समय से पहले जन्मे बच्चों को रखा जाता है। वार्मर नवजात के शरीर के तापमान को स्थिर रखने में मदद करता है। वहीं वार्मर नवजात के शरीर के तापमान को स्थिर करके, रक्त परिसंचरण को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, जिससे शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति में सुधार होता है।
सरकार के निर्देशों पर ही वेंटिलेटर स्थापित किए गए हैं, जिनका इस्तेमाल भी शुरू किया जा चुका है, इससे नवजात को रेफर करने की जरूरत नहीं रहेगी।
- डॉ सुखप्रीत सिंह, नोडल अधिकारी एमएसएनसीयू स्वास्थ्य विभाग अंबाला।