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Ambala News: किसान आंदोलन के एक केस में नवदीप को जमानत
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अंबाला सिटी। किसान आंदोलन में वाटर कैनन का मुंह पुलिस की तरफ मोड़कर चर्चा में आए किसान नेता नवदीप जलबेड़ा को एक केस में कोर्ट से राहत मिल गई है। 13 फरवरी को शंभू बॉर्डर पर हुए उपद्रव में दर्ज मामले में अभी याचिका हाईकोर्ट में लंबित है।
ऐसे में नवदीप को जमानत मिलने के बाद भी अभी बाहर नहीं आ सकेंगे। बचाव पक्ष के अधिवक्ता रोहित जैन ने बताया कि पुलिस की ओर से 15 फरवरी को दर्ज एफआईआर संख्या 43 के मामले में एडीजे कोर्ट में शनिवार को सुनवाई हुई थी। इस केस में धारा 307 के साथ अन्य धाराओं में किसान नेता नवदीप जलबेड़ा व अन्य किसान नेताओं पर मुकदमा पंजीकृत है।
इस मामले में सुनवाई हुई तो कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों पर गौर करते हुए नवदीप को जमानत दे दी है। वहीं इससे पहले 13 फरवरी को दर्ज मामले में अभी मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इसके लिए कोशिश की जा रही है। वहीं अधिवक्ता रोहित जैन ने बताया कि पहले पुलिस की तरफ से यह तर्क दिया गया था कि नवदीप पर 16 केस दर्ज हैं, जिसमें से छह केस तो पहले ही खत्म हो चुके हैं। वहीं इन मामलों में जो धारा 307 लगाई है उस पर भी बहस हुई।
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यह था 15 फरवरी में उपद्रव का मामला
थाना अंबाला सदर में दर्ज मुकदमा संख्या 43 में नवदीप को मुख्य आरोपी बनाया है। इसमें सिपाही रजत की तरफ से दी शिकायत में बताया कि 15 फरवरी को वह और पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी शंभू बॉर्डर पर तैनात थे। यहां पर 13 और 14 फरवरी को भारी संख्या में किसान ट्रैक्टरों के साथ आए। पहले तो पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया कि धारा 144 लागू है पांच से अधिक लोग एकत्रित नहीं हो सकते हैं। समझाने के बाद भी आंदोलनकारी नहीं माने तो बेरिकेड को तोड़ने का प्रयास किया। नंगी तलवारों, गुलेल, पत्थर, मिर्ची पाउडर, गुलेलों में नुकीले कांच से उन्हें जान से मारने की नियत से हमला कर दिया। जिसमें पुलिस कर्मी व अधिकारी घायल हुए। इस आंदोलन में किसान नेता सरवन सिंह पंधेर, अमरजीत मोहड़ी, जय सिंह जलबेड़ा, नवदीप जलबेड़ा, सुखचैन बड़ौग, गुरकीरत शाहपुर, बलजिंद्र सिंह चुडियाला, विक्रम रााणा, मंजीत सिंह, तेजबीर सिंह, गुरमीत सिंह माजरी, बलकार सिंह, मनजीत सिंह, गुरजीत सिंह धमौली, अरविंद्र मोहड़ा, कुलदीप मोहड़ी, कर्म सिंह, जसप्रीत सिंह व अन्य किसान नेताओं ने जानलेवा हमला किया व सरकारी कार्य में बाधा डाली।
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ऐसे में नवदीप को जमानत मिलने के बाद भी अभी बाहर नहीं आ सकेंगे। बचाव पक्ष के अधिवक्ता रोहित जैन ने बताया कि पुलिस की ओर से 15 फरवरी को दर्ज एफआईआर संख्या 43 के मामले में एडीजे कोर्ट में शनिवार को सुनवाई हुई थी। इस केस में धारा 307 के साथ अन्य धाराओं में किसान नेता नवदीप जलबेड़ा व अन्य किसान नेताओं पर मुकदमा पंजीकृत है।
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इस मामले में सुनवाई हुई तो कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों पर गौर करते हुए नवदीप को जमानत दे दी है। वहीं इससे पहले 13 फरवरी को दर्ज मामले में अभी मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इसके लिए कोशिश की जा रही है। वहीं अधिवक्ता रोहित जैन ने बताया कि पहले पुलिस की तरफ से यह तर्क दिया गया था कि नवदीप पर 16 केस दर्ज हैं, जिसमें से छह केस तो पहले ही खत्म हो चुके हैं। वहीं इन मामलों में जो धारा 307 लगाई है उस पर भी बहस हुई।
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यह था 15 फरवरी में उपद्रव का मामला
थाना अंबाला सदर में दर्ज मुकदमा संख्या 43 में नवदीप को मुख्य आरोपी बनाया है। इसमें सिपाही रजत की तरफ से दी शिकायत में बताया कि 15 फरवरी को वह और पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी शंभू बॉर्डर पर तैनात थे। यहां पर 13 और 14 फरवरी को भारी संख्या में किसान ट्रैक्टरों के साथ आए। पहले तो पुलिस अधिकारियों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया कि धारा 144 लागू है पांच से अधिक लोग एकत्रित नहीं हो सकते हैं। समझाने के बाद भी आंदोलनकारी नहीं माने तो बेरिकेड को तोड़ने का प्रयास किया। नंगी तलवारों, गुलेल, पत्थर, मिर्ची पाउडर, गुलेलों में नुकीले कांच से उन्हें जान से मारने की नियत से हमला कर दिया। जिसमें पुलिस कर्मी व अधिकारी घायल हुए। इस आंदोलन में किसान नेता सरवन सिंह पंधेर, अमरजीत मोहड़ी, जय सिंह जलबेड़ा, नवदीप जलबेड़ा, सुखचैन बड़ौग, गुरकीरत शाहपुर, बलजिंद्र सिंह चुडियाला, विक्रम रााणा, मंजीत सिंह, तेजबीर सिंह, गुरमीत सिंह माजरी, बलकार सिंह, मनजीत सिंह, गुरजीत सिंह धमौली, अरविंद्र मोहड़ा, कुलदीप मोहड़ी, कर्म सिंह, जसप्रीत सिंह व अन्य किसान नेताओं ने जानलेवा हमला किया व सरकारी कार्य में बाधा डाली।