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Ambala News: श्रीनृसिंह अवतार और नाम महिमा के सुनाए प्रसंग
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छावनी की रामबाग गोशाला में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते कथा व्यास जगदीश चंद्र शास्त्री। सभा
- फोटो : samvad
छावनी की रामबाग गोशाला में तीसरे दिन हुई भागवत कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। रामबाग गोशाला में तीसरे दिन श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। वृंदावन से पधारे कथा व्यास जगदीश चंद्र शास्त्री ने श्रद्धालुओं को प्रह्लाद चरित्र, भगवान श्रीनृसिंह अवतार और नाम महिमा के प्रसंग सुनाए। कथा के दौरान पंडाल भक्ति रस से सराबोर नजर आया।
कथा व्यास ने भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति का सजीव वर्णन किया। उन्होंने बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी प्रह्लाद का भगवान पर अगाध विश्वास था। भगवान ने अपने सच्चे भक्त की रक्षा के लिए खंभा फाड़कर श्रीनृसिंह अवतार लिया। उन्होंने अधर्मी हिरण्यकशिपु का संहार किया। इस प्रसंग के माध्यम से संगत को भक्ति, श्रद्धा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई। पंडाल भगवान के जयकारों से गूंज उठा।
सत्कर्म और नाम-स्मरण का महत्व
कथा व्यास ने चित्र केतु और राजा भरत के चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने जीवन में सत्कर्म, सच्ची भक्ति और वैराग्य के महत्व पर प्रकाश डाला। अजामिल उद्धार का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि भगवान के पवित्र नाम का स्मरण सभी कष्टों को हर लेता है। सच्चे भाव से किया गया नाम-स्मरण जीव के उद्धार और कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। इस अवसर पर नविता और उमेश गुप्ता तथा वृंदा और रोबर्ट सहित बड़ी संख्या में गणमान्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। रामबाग गोशाला में तीसरे दिन श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया गया। वृंदावन से पधारे कथा व्यास जगदीश चंद्र शास्त्री ने श्रद्धालुओं को प्रह्लाद चरित्र, भगवान श्रीनृसिंह अवतार और नाम महिमा के प्रसंग सुनाए। कथा के दौरान पंडाल भक्ति रस से सराबोर नजर आया।
कथा व्यास ने भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति का सजीव वर्णन किया। उन्होंने बताया कि विपरीत परिस्थितियों में भी प्रह्लाद का भगवान पर अगाध विश्वास था। भगवान ने अपने सच्चे भक्त की रक्षा के लिए खंभा फाड़कर श्रीनृसिंह अवतार लिया। उन्होंने अधर्मी हिरण्यकशिपु का संहार किया। इस प्रसंग के माध्यम से संगत को भक्ति, श्रद्धा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी गई। पंडाल भगवान के जयकारों से गूंज उठा।
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सत्कर्म और नाम-स्मरण का महत्व
कथा व्यास ने चित्र केतु और राजा भरत के चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने जीवन में सत्कर्म, सच्ची भक्ति और वैराग्य के महत्व पर प्रकाश डाला। अजामिल उद्धार का प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि भगवान के पवित्र नाम का स्मरण सभी कष्टों को हर लेता है। सच्चे भाव से किया गया नाम-स्मरण जीव के उद्धार और कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। इस अवसर पर नविता और उमेश गुप्ता तथा वृंदा और रोबर्ट सहित बड़ी संख्या में गणमान्य श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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