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Haryana Election: नारायणगढ़ में कमल खिलाना साख का सवाल... सभी दलों की नजर; नायब इस बार नहीं लड़ेंगे चुनाव

Sat, 31 Aug 2024 01:58 PM IST
शाहरुख खान वैभव शर्मा, अमर उजाला, अंबाला
वैभव शर्मा, अमर उजाला, अंबाला Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 31 Aug 2024 01:58 PM IST
सार

हरियाणा के नारायणगढ़ विधानसभा सीट पर सभी दलों की नजर है। नारायणगढ़ में कमल खिलाना साख का सवाल है। सीएम का गृह क्षेत्र होने के कारण यह सीट चर्चा का विषय है। 

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Narayangarh Assembly seat All parties are eyeing it as it is CM home constituency
Haryana Election - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नारायणगढ़ विधानसभा सीट पर इस बार पूरे प्रदेश की निगाहें टिकी हैं। कारण कि सीएम नायब सिंह सैनी का गांव मिर्जापुर माजरा इसी हलके में आता है। ऐसे में यहां कमल खिलाना भाजपा की साख का सवाल भी रहेगा। इसी कारण हाल ही में जन आशीर्वाद रैली की शुरुआत सीएम ने इसी हलके से की।
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वैसे तो नारायणगढ़ सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा है, मगर इनेलो और बसपा का जनाधार भी पूर्व के चुनावों में दिखता रहा है। वर्ष 2014 में मोदी लहर में नायब सिंह सैनी यहां से जीते लेकिन 2019 में कांग्रेस ने एक बार फिर कब्जा जमा लिया।
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चुनावी माहौल में एक बार फिर से नारायणगढ़ सबसे अधिक चर्चा में है। कांग्रेस से मौजूदा विधायक शैली चौधरी के मैदान में उतरने की चर्चा हैं, वहीं भाजपा के चेहरे पर संशय बरकरार है। शुक्रवार को प्रदेशाध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली साफ कर चुके हैं कि सैनी लाडवा सीट से ही लड़ेंगे।
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 कांग्रेस का गढ़, बसपा-इनेलो का भी रहा आधार 
2019 में कांग्रेस से शैली चौधरी ने 39.56 प्रतिशत मत पाकर भाजपा के सुरेंद्र सिंह को पछाड़ा था। 2014 में नायब सिंह सैनी के सामने कांग्रेस के रामकिशन गुर्जर थे। सैनी को 39.8 प्रतिशत मत मिले थे। बसपा ने भी अच्छा प्रदर्शन किया था। बीते चुनाव में बसपा प्रत्याशी को 30,736 मत मिले थे। 2009 में इनेली के राम सिंह को भी 28,978 मत मिले थे।

लंबे समय से जिला बनाने की उठ रही मांग
नारायणगढ़ को लंबे समय से जिला बनाने की मांग की जा रही है। सीएम नायब सैनी से भी यह मांग की गई, लेकिन पूरी नहीं हुई। नारायणगढ़ का रेल लाइन से जुड़ने का सपना भी अधूरा है।
 

साथ ही शुगर मिल से भुगतान की किसानों को हमेशा से ही दिक्कत रही है। स्थानीय लोग बताते हैं कि यहां सरकारी अस्पताल तो है, लेकिन चिकित्सक नहीं हैं। लोग कालाअंब के उद्योगों पर ही निर्भर हैं।
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