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जातीय समीकरणों के बीच उलझा पालिका का किला, जीत के अपने-अपने दावे

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 20 Jun 2022 12:45 AM IST
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Municipality's fort entangled between caste equations, their own claims of victory
राजेश शांडिल्य/वाईएम शर्मा
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नारायणगढ़। जातीय समीकरणों के बीच उलझा नारायणगढ़ नगर पालिका का किला कौन फतेह करेगा? इसका फैसला ईवीएम में बंद हो चुका है। अब 22 जून को मतगणना के बाद नाम की घोषणा होना बाकी है। चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए सात और 15 वार्डों के पार्षद पद के लिए 45 उम्मीदवार पिछले कई दिनों से पसीना बहा रहे थे। यहां अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस समर्थित दो उम्मीदवारों का नाम ज्यादातर की जुबान पर है।
बता दें कि प्रधान पद के लिए भाजपा की प्रीतपाल कौर मक्कड़, इनेलो की अनीता दीवान, आम आदमी पार्टी की अनीता चौधरी और बसपा की कमला देवी के नाम प्रमुख हैं, जबकि एक कांग्रेस के शहरी अध्यक्ष देशबंधु जिंदल की धर्मपत्नी ममता रानी और कांग्रेस सरकार में नारायणगढ़ नगर पालिका प्रधान अमित वालिया की धर्मपत्नी रिंकी वालिया हैं। एक आजाद उम्मीदवार शैलजा शर्मा प्रधान पद की दावेदार हैं। मतदान के बाद भी इन सातों उम्मीदवारों के समर्थक अपने अपने प्रत्याशी की जीत का दावा ठोक रहे हैं। वहीं, जनता दबी आवाज में इस चुनाव को आमने-सामने और कुछेक तिकोने मुकाबले का बता रही है। आमने-सामने बताने वाले कुछ ऐसे भी हैं, जिनका कहना है कि चुनाव कांग्रेस बनाम कांग्रेस है, कुछ कांग्रेस और भाजपा का सीधा मुकाबला बता रहे हैं।
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पति लड़ रहे हैं असली जंग
पूर्व सीपीएस गुर्जर के नजदीकी देशबंधु जिंदल की धर्मपत्नी ममता रानी और पूर्व सीपीएस के दूसरे करीब व पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अमित वालिया की धर्मपत्नी रिंकी वालिया में से एक की जीत तय बताई जा रही है। सीधे तौर पर पलड़ा ममता रानी का भारी बताया जा रहा है। नपा अध्यक्ष पद की उम्मीदवार ममता रानी के पति देशबंधु जिंदल नगर के बड़े कारोबारी है और पूर्व संसदीय सचिव गुर्जर के नजदीकी होने के साथ कांग्रेस के शहरी प्रधान भी हैं। वहीं, रिंकी वालिया के पति अमित वालिया ने कांग्रेस सरकार में तत्कालीन नगर पालिका चेयरमैन संजीव वर्मा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर पूर्व सीपीएस गुर्जर के सहयोग से ढाई के लिए अध्यक्ष का पद हासिल किया था। नारायणगढ़ में वालिया बिरादरी की करीब 500 वोट हैं। अमित की वालिया समाज के वोट बैंक में जबरदस्त पकड़ बताई गई है। दूसरी बिरादरी के वोट बैंक में उनकी सेंधमारी ही जीत का पैमाना बनेगी।
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दिग्गजों के सहारे भाजपा कर रही है जीत का दावा
भाजपा की उम्मीदवार प्रितपाल कौर मक्कड़ निवर्तमान पार्षद हैं। यह पंजाबी खत्री समुदाय से हैं। मक्कड़ के पति राजू मक्कड़ कुरुक्षेत्र के सांसद नायब सैनी के नजदीकी हैं। सैनी, विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता और यमुनानगर के विधायक घनश्याम अरोड़ा उनके समर्थन में वोट मांग चुके हैं। यहां भाजपा को पूरी उम्मीद है कि उनकी उम्मीदवार बड़े अंतर से अपने प्रतिद्वंद्वी को मात देंगी।
आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार
पूर्व पार्षद अनीता चौधरी गुर्जर आप की टिकट मिलने से एक दिन पहले तक भाजपा की टिकट की दावेदार थीं। वह 2014 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुईं थी। उनके पति धर्मपाल गुर्जर कुरुक्षेत्र के सांसद नायब सैनी के नजदीकी रहे हैं। अनीता निकाय चुनाव में भाजपा की टिकट नहीं मिलने के कारण खफा थीं। इसका फायदा आम आदमी पार्टी ने उठाया और उन्हें टिकट थमा कर चुनाव मैदान में उतार दिया है। नगर पालिका क्षेत्र में गुर्जर समाज की वोट बहुत कम हैं। उनके समर्थन में चित्रा सरवारा वोट मांग चुकी हैं।
बसपा, इनेलो और आजाद उम्मीदवार
बसपा की कमला देवी दलित समाज से हैं। नारायणगढ़ में तीन हजार से ज्यादा दलित वोट हैं। इस वोट बैंक के दम पर वह जीत दर्ज करेंगी। इसकी उम्मीद क्षेत्रवासियों को नहीं है। इनेलो अनीता दीवान पंजाबी खत्री समाज से है। यह चुनाव अनीता दीवान की माता रजनी दीवान को लड़ना था, लेकिन कागजात पूरे नहीं होने के कारण बेटी चुनाव लड़ रही हैं। अनीता दीवान की माता रजनी दीवान पुरानी भाजपाई है। उनका चुनाव लड़ना प्रितपाल कौर मक्कड़ को नुकसान पहुंचाने वाला सिद्ध हो सकता है, क्योंकि वह ज्यादातर पंजाबी खत्री समाज की वोट में सेंधमारी करेंगी। शैलजा शर्मा ब्राह्मण समुदाय हैं। शैलजा का फिलहाल किसी राजनीतिक संगठन से सीधा कोई ताल्लुक नहीं है। ब्राह्मण समुदाय की वोट करीब दो हजार हैं। इसके बावजूद उनका प्रभाव नहीं दिख रहा है।

मतदाता को विकास की आस
वार्ड-10 वासी जगदीश और कुलवंत कौर के मुताबिक, वह जिस वार्ड में रहते हैं, वहां बिलकुल भी विकास नहीं हुआ। पालिका अध्यक्ष के लिए जिस उम्मीदवार को उन्होंने और उनके परिवार ने वोट डाला है, उससे उम्मीद है कि वह उनके वार्ड की सुध अवश्य ली जाएगी।
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