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मां के पावन नवरात्र आज से, बहेगी भक्ति की बयार, सजे मंदिर
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अंबाला सिटी। माता रानी के पावन नवरात्र सोमवार से आरंभ हो गए हैं जोकि पांच अक्तूबर तक चलेंगे। जिलेभर के मंदिरों को नवरात्र से पहले भव्य रूप से सजाया गया है। नवरात्र सभी मंदिरों में माता के जयकारों की गूंज रहेगी। वहीं मंदिरों में विभिन्न भजन मंडलियों की ओर से माता जी का गुणगान किया जाएगा। मंदिर भवनों को सजाने की तैयारियां मंदिर पुजारियों व मंदिर कमेटियों कर रही हैं। हालांकि, पुजारियों का कहना है कि बीते चार दिनों से हो रही बरसात के कारण मंदिर परिसरों को सजाने में कुछ परेशानियां जरूर हुई हैं लेकिन रविवार की रात भर मंदिर सजाने का कार्यक्रम जारी रहेगा।
वहीं मंदिर में माता जी के सुंदर दरबार को सजाया गया है। सोमवार से सुबह से भक्तों के लिए माता जी के भव्य सुंदर दरबार को खोल दिया जाएगा। मंदिरों के बाहर माता जी के आभूषणों, चुनरिया, नारियल आदि भेंट करने के लिए दुकानें भी सज चुकी हैं। सिटी के मां दुखभंजनी मंदिर, मां अंबिका देवी मंदिर, माता वैष्णो मंदिर, नौ दुर्गा मंदिर प्रेम नगर, श्री महादेव मंदिर एवं सत्संग भवन सेक्टर-9 में मां का भव्य स्वरूप सजाया गया। इसी प्रकार सिटी के सेक्टर-7 स्थित श्री महादेव नीलकंठ मंदिर में भी दरबार सजाया है। विभिन्न ज्योतिषियों व पंडितों का कहना है कि इस बार माता जी के नवरात्रे बहुत फलदायक हैं।
नियमों का पालन बहुत जरूरी
नवरात्र में नौ दिनों तक देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। कहा गया है कि नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा अर्चना और व्रत रखने से भक्तों की मनोकामना जल्द पूरी होती है। वहीं नवरात्र के व्रत में कुछ नियम हैं। उनका पालन करना बेहद जरूरी है।
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-पंडित सुरेश शर्मा, नदी महोल्ला, सिटी।
सच्चे मन से रखे नवरात्र व्रत
नवरात्र व्रत रखने वाले को झूठ व छल कपट जैसे विचार मन में नहीं रखने चाहिए। व्रत में कुछ लोग एक समय भोजन करते हैं तो कुछ फलाहार, कुछ जल लेकर, कुछ तुलसी व गंगाजल पीकर ही नवरात्र व्रत रखते हैं। आमतौर पर गृहस्थ लोग एक समय भोजन करके व्रत रखते हैं।
-पंडित कन्हैया लाल, सेक्टर- 9, सिटी।
ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए
पावन नवरात्र व्रत रखने के दौरान भक्तों को लकड़ी के तख्त पर नहीं सोना चाहिए। साथ ही ब्रह्मचर्य का पालन करना बहुत जरूरी है। इस दौरान क्षमा, दया, उदारता एवं उत्साह आदि दिव्य भावों से युक्त रहें और क्रोध, लोभ, मोह को अपने मन में बिल्कुल न आने दें।
-पंडित धर्मपाल शास्त्री, शर्मा कॉलोनी सिटी।
व्रत को बीच में नहीं तोड़ना चाहिए
अगर कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं है और उसको लग रहा है कि उसका व्रत भंग हो सकता है तो व्रत नहीं रखना चाहिए। किसी को जरूरी यात्रा पर जाना है, तो ऐसे व्यक्ति को व्रत नहीं रखना चाहिए। ऐसी स्थिति में व्रत का पालन करना मुश्किल हो जाता है।
-पंडित भगवती प्रसाद, श्री महादेव नीलकंठ मंदिर पुजारी, सिटी।
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वहीं मंदिर में माता जी के सुंदर दरबार को सजाया गया है। सोमवार से सुबह से भक्तों के लिए माता जी के भव्य सुंदर दरबार को खोल दिया जाएगा। मंदिरों के बाहर माता जी के आभूषणों, चुनरिया, नारियल आदि भेंट करने के लिए दुकानें भी सज चुकी हैं। सिटी के मां दुखभंजनी मंदिर, मां अंबिका देवी मंदिर, माता वैष्णो मंदिर, नौ दुर्गा मंदिर प्रेम नगर, श्री महादेव मंदिर एवं सत्संग भवन सेक्टर-9 में मां का भव्य स्वरूप सजाया गया। इसी प्रकार सिटी के सेक्टर-7 स्थित श्री महादेव नीलकंठ मंदिर में भी दरबार सजाया है। विभिन्न ज्योतिषियों व पंडितों का कहना है कि इस बार माता जी के नवरात्रे बहुत फलदायक हैं।
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नियमों का पालन बहुत जरूरी
नवरात्र में नौ दिनों तक देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। कहा गया है कि नवरात्र में मां दुर्गा की पूजा अर्चना और व्रत रखने से भक्तों की मनोकामना जल्द पूरी होती है। वहीं नवरात्र के व्रत में कुछ नियम हैं। उनका पालन करना बेहद जरूरी है।
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-पंडित सुरेश शर्मा, नदी महोल्ला, सिटी।
सच्चे मन से रखे नवरात्र व्रत
नवरात्र व्रत रखने वाले को झूठ व छल कपट जैसे विचार मन में नहीं रखने चाहिए। व्रत में कुछ लोग एक समय भोजन करते हैं तो कुछ फलाहार, कुछ जल लेकर, कुछ तुलसी व गंगाजल पीकर ही नवरात्र व्रत रखते हैं। आमतौर पर गृहस्थ लोग एक समय भोजन करके व्रत रखते हैं।
-पंडित कन्हैया लाल, सेक्टर- 9, सिटी।
ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए
पावन नवरात्र व्रत रखने के दौरान भक्तों को लकड़ी के तख्त पर नहीं सोना चाहिए। साथ ही ब्रह्मचर्य का पालन करना बहुत जरूरी है। इस दौरान क्षमा, दया, उदारता एवं उत्साह आदि दिव्य भावों से युक्त रहें और क्रोध, लोभ, मोह को अपने मन में बिल्कुल न आने दें।
-पंडित धर्मपाल शास्त्री, शर्मा कॉलोनी सिटी।
व्रत को बीच में नहीं तोड़ना चाहिए
अगर कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं है और उसको लग रहा है कि उसका व्रत भंग हो सकता है तो व्रत नहीं रखना चाहिए। किसी को जरूरी यात्रा पर जाना है, तो ऐसे व्यक्ति को व्रत नहीं रखना चाहिए। ऐसी स्थिति में व्रत का पालन करना मुश्किल हो जाता है।
-पंडित भगवती प्रसाद, श्री महादेव नीलकंठ मंदिर पुजारी, सिटी।