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मिड डे मील : खाद्य पदार्थों की कीमत बढ़ी पर बजट कम
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सरकारी स्कूल में मिड डे मील खाते बच्चे। संवाद
अंबाला सिटी। जिले में 50 हजार से ज्यादा विद्यार्थियों को मिड डे मील मिलता है। विद्यार्थियों को मिलने वाली मिड डे मील राशि शिक्षा विभाग ने दो वर्ष से नहीं बढ़ाई।
इससे राजकीय स्कूलों में शिक्षकों को मिड डे मील पकाने में दिक्कत आ रही है, क्योंकि विभाग प्रति विद्यार्थी बजट कम दे रहा है, जबकि खाद्य पदार्थ महंगे होने से स्कूलों में मिड डे मील पकाने में ज्यादा खर्च आ रहा है। शिक्षकों को अपनी जेब से भी खाद्य पदार्थों पर खर्च करना पड़ता है। इसको लेकर शिक्षक मांग उठा चुके हैं, लेकिन अभी तक इस राशि को रिवाइज नहीं किया गया।
आठवीं कक्षा तक मिलता है मिड डे मील
राजकीय स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक विद्यार्थियों को मिड डे मील में दोपहर का खाना मिलता है। विभाग स्कूलों में आटा व चावल देता है और प्रत्येक विद्यार्थी के हिसाब से पहली से पांचवीं तक पांच रुपये 45 पैसे और छठी से आठवीं तक आठ रुपये 17 पैसे मिलते हैं। यह राशि भी समय पर नहीं आती। इससे शिक्षकों के सामने दिक्कत आ रही है। इस बजट में करीब दो वर्ष से बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसके साथ ही महंगाई भत्ता भी समय पर नहीं बढ़ता।
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छह महीने बाद बढ़ना चाहिए भत्ता
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राज्य प्रवक्ता अमित छाबड़ा ने बताया कि मिड डे मील के लिए विद्यार्थियों को दी जानी वाली राशि कम है। प्राथमिक विद्यालयों में इसे पांच रुपये 45 पैसे से बढ़ाकर 10 रुपये किया जाना चाहिए। इसके साथ ही महंगाई भत्ता के रेट भी हर छह महीने बाद रिवाइज होना चाहिए। यह भत्ता दो वर्ष बाद भी रिवाइज नहीं होता, जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है। विभाग की ओर से आटा व चावल की सप्लाई होती है, जबकि स्कूल शिक्षकों को बच्चों को मिलने वाली राशि में से ही गैस, तेल, रिफाइंड, दाल, सब्जी, मसाले, दही का इंतजाम करना होता है।
वर्जन
अभी विभाग की ओर से मिड डे मील को लेकर पैसे नहीं बढ़ाए गए हैं। उनके पास मिड डे मील से संबंधित जो भी मांग शिक्षकों की ओर से आती है, वह मुख्यालय भेजी जाती है। अगर इस संबंध में शिक्षक उनको अवगत करवाएंगे तो मुख्यालय में यह मांग भी भेजी जाएगी।
सुधीर कालड़ा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, अंबाला।
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इससे राजकीय स्कूलों में शिक्षकों को मिड डे मील पकाने में दिक्कत आ रही है, क्योंकि विभाग प्रति विद्यार्थी बजट कम दे रहा है, जबकि खाद्य पदार्थ महंगे होने से स्कूलों में मिड डे मील पकाने में ज्यादा खर्च आ रहा है। शिक्षकों को अपनी जेब से भी खाद्य पदार्थों पर खर्च करना पड़ता है। इसको लेकर शिक्षक मांग उठा चुके हैं, लेकिन अभी तक इस राशि को रिवाइज नहीं किया गया।
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आठवीं कक्षा तक मिलता है मिड डे मील
राजकीय स्कूलों में पहली से आठवीं कक्षा तक विद्यार्थियों को मिड डे मील में दोपहर का खाना मिलता है। विभाग स्कूलों में आटा व चावल देता है और प्रत्येक विद्यार्थी के हिसाब से पहली से पांचवीं तक पांच रुपये 45 पैसे और छठी से आठवीं तक आठ रुपये 17 पैसे मिलते हैं। यह राशि भी समय पर नहीं आती। इससे शिक्षकों के सामने दिक्कत आ रही है। इस बजट में करीब दो वर्ष से बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसके साथ ही महंगाई भत्ता भी समय पर नहीं बढ़ता।
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छह महीने बाद बढ़ना चाहिए भत्ता
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राज्य प्रवक्ता अमित छाबड़ा ने बताया कि मिड डे मील के लिए विद्यार्थियों को दी जानी वाली राशि कम है। प्राथमिक विद्यालयों में इसे पांच रुपये 45 पैसे से बढ़ाकर 10 रुपये किया जाना चाहिए। इसके साथ ही महंगाई भत्ता के रेट भी हर छह महीने बाद रिवाइज होना चाहिए। यह भत्ता दो वर्ष बाद भी रिवाइज नहीं होता, जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है। विभाग की ओर से आटा व चावल की सप्लाई होती है, जबकि स्कूल शिक्षकों को बच्चों को मिलने वाली राशि में से ही गैस, तेल, रिफाइंड, दाल, सब्जी, मसाले, दही का इंतजाम करना होता है।
वर्जन
अभी विभाग की ओर से मिड डे मील को लेकर पैसे नहीं बढ़ाए गए हैं। उनके पास मिड डे मील से संबंधित जो भी मांग शिक्षकों की ओर से आती है, वह मुख्यालय भेजी जाती है। अगर इस संबंध में शिक्षक उनको अवगत करवाएंगे तो मुख्यालय में यह मांग भी भेजी जाएगी।
सुधीर कालड़ा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, अंबाला।