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ध्यान करना जीव का स्वभाव : ज्ञाननाथ
Tue, 28 Oct 2025 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Tue, 28 Oct 2025 01:23 AM IST
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झरमड़ी गांव में संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। प्रवक्ता
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला सिटी। झरमड़ी गांव में संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान हरियाणा व पंजाब से श्रद्धालु पहुंचे। सम्मेलन में निराकारी जागृति मिशन के गद्दीनशीन चेयरमैन श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर एडवोकेट स्वामी ज्ञाननाथ महाराज ने कहा कि ध्यान करना जीव का स्वभाव है। ध्यान बाहरी नहीं आंतरिक यात्रा है। जिसका ध्यान करोगे वैसे हो जाओगे। जड़ का ध्यान करने से जड़ और चेतन का ध्यान करने से चेतन हो जाओगे। संसार का ध्यान करने से बंधन और निराकार का करने से मुक्त हो जाओगे। ध्यान एक कुदरती प्रक्रिया है। ध्यान करने से सांसारिक झंझटों और मानसिक तनाव से छुटकारा पाया जा सकता है और चंचल और चलायमान मन शांत होता है। संत सम्मेलन में महामाई देवा पीठ झरमड़ी के पीठाधीश्वर संत राम सिंह महाराज, संत जैनदास हितकारी दयालगढ, संत जगदीश मांडवी, महंत निर्मल दास कपालमोचन, संत मंदीप दास सिरसगढ, संत सुरेश दास अधोया और अन्य संत महापुरुषों ने श्रद्धालुओं को रुहानी प्रवचनों और गुरुवाणी के शब्दों से निहाल किया।
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अंबाला सिटी। झरमड़ी गांव में संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस दौरान हरियाणा व पंजाब से श्रद्धालु पहुंचे। सम्मेलन में निराकारी जागृति मिशन के गद्दीनशीन चेयरमैन श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर एडवोकेट स्वामी ज्ञाननाथ महाराज ने कहा कि ध्यान करना जीव का स्वभाव है। ध्यान बाहरी नहीं आंतरिक यात्रा है। जिसका ध्यान करोगे वैसे हो जाओगे। जड़ का ध्यान करने से जड़ और चेतन का ध्यान करने से चेतन हो जाओगे। संसार का ध्यान करने से बंधन और निराकार का करने से मुक्त हो जाओगे। ध्यान एक कुदरती प्रक्रिया है। ध्यान करने से सांसारिक झंझटों और मानसिक तनाव से छुटकारा पाया जा सकता है और चंचल और चलायमान मन शांत होता है। संत सम्मेलन में महामाई देवा पीठ झरमड़ी के पीठाधीश्वर संत राम सिंह महाराज, संत जैनदास हितकारी दयालगढ, संत जगदीश मांडवी, महंत निर्मल दास कपालमोचन, संत मंदीप दास सिरसगढ, संत सुरेश दास अधोया और अन्य संत महापुरुषों ने श्रद्धालुओं को रुहानी प्रवचनों और गुरुवाणी के शब्दों से निहाल किया।