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पहला लैंटर का 40 तो दूसरे का रिश्वत रेट 50 हजार
अंबाला ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Sat, 21 May 2016 12:46 AM IST
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बैठक में माौजूद पार्षद
- फोटो : amar ujala
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आप म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन अंबाला के कमिश्नर हैं, ट्विनसिटी के एक सर्वोच्च पद पर आसीन हैं, कमिश्नर साहब बाजारों, मोहल्लों और कॉलोनियों से उठने वाली आवाज सुन लें तो बेहतर होगा, वरना भ्रष्टाचार इतना ज्यादा बढ़ जाएगा कि आप संभाल नहीं पाएंगे। आज बिना नक्शा पास करवाए अवैध कब्जे और निर्माण किए जा रहे हैं। यदि पहली मंजिल पर लेंटर डालना है तो रिश्वत का रेट है 40 हजार और यदि दूसरी मंजिल पर लेंटर डालना है, तो रिश्वत का रेट है 50 हजार...ये क्या हो रहा है कमिश्नर साहब! आज ही सख्त हो जाएं, वरना निचले अफसरों की करनी शहर और एमसीए को महंगी पड़ जाएगी’
यह गंभीर आरोप म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन अंबाला (एमसीए) की शुक्रवार को पंचायत भवन में आयोजित सदन की बैठक में एमसीए के डिप्टी मेयर सुधीर जयसवाल ने सदन में एमसीए के निचले अफसरों पर खुलकर लगाए। डिप्टी मेयर ने जैसे ही अवैध कब्जे का मुद्दा छेड़ा तो अन्य पार्षदगण भी उनके साथ हो लिए और सभी ने अपने-अपने वार्ड में इन अवैध कब्जों के बारे में एमसीए कमिश्नर सुरेंद्र सिंह व मेयर रमेश लाल मल को बताते हुए तुरंत कार्रवाई की मांग की।
एमसीए कमिश्नर ने भी इन मुद्दों को गंभीर बताते हुए सीनियर अकाउंट अफसर को इस आरोपों की जांच के आदेश दिए। इस बैठक में अवैध कब्जों के साथ-साथ स्ट्रीट लाइट में गड़बड़झाला और सफाई व्यवस्था में धांधली के भी आरोप लगाते हुए हंगामा किया। इस दौरान पार्षदों और निचले अफसरों में बहस भी हुई।
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अवैध कब्जों पर पार्षदों ने यूं घेरा, अफसर मौन
- डिप्टी मेयर सुधीर जयसवाल ने एमसीए कमिश्नर से कहा कि बाजारों में सरकारी नालों व जमीनों पर अवैध कब्जे हो रहे हैं, वे खुद सर्वे कर लें, कितना निर्माण हो रहा है और कितने नक्शे पास हैं? भ्रष्टाचार की कलई खुलकर आपके सामने आ जाएगी।
- वार्ड पार्षद सुरेंद्र बिंद्रा ने कहा कि उनके वार्ड नंबर सत्रह बिना नक्श के अवैध कब्जों की भरमार है। जब उन्होंने आवाज उठाई तो कब्जेधारी उनके पास डेढ़ लाख रुपये का ऑफर लेकर पहुंचे, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया। उन्होंने एमसीए में शिकायत की, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। उन्होंने अवैध निर्माण आराम से कर लिया। अब बताइए वो डेढ़ लाख रुपये किसने खाकर ये अवैध काम करवाया?
- वार्ड चौदह के पार्षद जसबीर सिंह जस्सी ने कहा पार्षद अवैध कब्जों की शिकायत एमसीए अफसरों को करते हैं, लेकिन हैरत की बात यह कि थोड़ी ही देर में कब्जेधारियों को एमसीए कार्यालय से ही मालूम चल जाता है कि उनकी शिकायत पार्षद ने की है। उसके बाद कब्जेधारी उनसे लड़ने पहुंच जाते हैं। इससे साबित होता है कि कब्जेधारियों और एमसीए कर्मियों की पूरी मिलीभगत से अवैध कब्जे व निर्माण होते हैं।
- वार्ड नंबर आठ के पार्षद पुष्पिंद्र हरीश ने कहा कि उनके वार्ड में करीबन अठारह एकड़ जमीन पर अवैध रूप से कॉलोनी काट दी गई। उन्होंने एमसीए में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं। अब प्लाटिंग के बाद वहां बिना नक्श के भवन खड़े हो रहे हैं, लेकिन एमसीए अफसर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं। आखिर अफसरों की मंशा क्या है?
- वार्ड नंबर छह के पार्षद पवन अग्रवाल डिंपी ने कहा कि एमसीए की शुकलकुंड पर जमीन है। उस पर करीबन 100 दुकानें अवैध रूप से तैयार हो गई है। एमसीए अफसर बताएं उन्होंने कितनी रिश्वत लेकर इन दुकानों को खड़ा किया है?
-वार्ड नंबर दो की पार्षद दर्शना मेहता ने कहा कि नेशनल हाइवे से धूलकोट स्टेशन तक दोनों ओर पंद्रह से बीस फीट तक अवैध कब्जे हो चुके हैं। कई बार एमसीए में शिकायत कर चुकी हूं। कोई सुनने वाला नहीं, सबकुछ मिलीभगत से चल रहा है।
-वार्ड नंबर एक की पार्षद सोनिया चौधरी ने कहा कि कमिश्नर साहब एक साल से ज्यादा समय से बस स्टैंड पर निगम की जमीन पर शराब का अवैध खोखा पड़ा है। जरा बताइए वो किसकी अनुमति से रखा गया और क्या उससे कोई रेंट वसूला जा रहा है या सुविधा शुल्क? ये भी बता दीजिए ठेका का खोखा सरकारी जमीन पर रखने का सुविधा शुल्क क्या है? ताकि और भी लोग ऐसा कर लें। इस पर निचले अफसर चुप बैठे रहे, कमिश्नर ने तुरंत ठेका हटवाने के आदेश दिए।
- एमसीए के कमिश्नर रमेश लाल मल की भी चुप्पी टूटी और वे भी बोले, कमिश्नर साहब कैंट व सिटी में अवैध कब्जे और अतिक्रमण की वाकई भरमार है। दुकानें छोड़कर लोगों ने सड़कों, नालों पर भी कब्जा कर लिया है। चौड़े बाजार तंग गलियों से लग रहे हैं। एमसीए अफसर आंखें मूंदे क्यों बैठे हैं। आप इन पर सख्त एक्शन क्यों नहीं लेते?
-जनप्रतिनिधियों के इन तीखे आरोपों पर निचले अफसर तो चुपचाप बैठे रहे, जबकि एमसीए कमिश्नर सफाई देते रहें। अंतत: उन्होंने कुछ गंभीर मामलों की जांच सीनियर अकाउंट अफसर से करवाने का फैसला लिया।
-इन पार्षदों ने अनोखे अंदाज में दिखाई नाराजगी
सीटू ने मुंह बांधी पट्टी, कमिश्नर ने खुलवाई
वार्ड नंबर सात के पार्षद दलजीत सिंह भाटिया सीटू ने सदन की बैठक शुरू होते ही मुंह पर पट्टी बांध ली और चुपचाप बैठ गए। मेयर रमेश लाल मल ने जब इसकी वजह पूछी तो दूसरे पार्षदों ने बताया कि यह दलजीत भाटिया का विरोध का तरीका है। काफी आग्रह के बाद एमसीए कमिश्नर सुरेंद्र सिंह ने पार्षद भाटिया के चेहरे के मुंह से पट्टी उतरवाकर विरोध की वजह पूछी। तो उन्होंने बताया कि उन्हें यहां सदन में तीन साल हो गए हैं। पहले उन्होंने स्ट्रीट लाइट घोटाला उठाया, फिर सफाई व स्ट्रीट का मसला। वह यहां सदन में बोल-बोलकर चले जाते हैं। एमसीए कार्यालयों में जाकर अपने वार्डवासियों की समस्याओं का रोना अफसरों को रो आते हैं, लेकिन जब उनकी कोई सुनता ही नहीं तो उन्हें सदन में बोलने का भी कोई हक नहीं है, इसलिए उन्हें पट्टी बांधकर चुप बैठना पड़ा।
रूपम पार्षदों, अफसरों को बांटने लाई मोमबत्तियां
वार्ड नंबर पांच की पार्षद रूपम गुगलानी ने कहा कि तीन साल हो चुके हैं सदन में, लेकिन आज तक वार्ड में स्ट्रीट लाइटों की समस्या ही खत्म नहीं हुई। ये समस्या मेरे वार्ड की नहीं, बल्कि ट्विनसिटी के सभी वार्डों की है। सौ-सौ स्ट्रीट लाइटें देने का वायदा करीबन साल पहले सदन में ही किया गया था, प्रस्ताव भी पास हुआ, लेकिन आज तक एक भी स्ट्रीट लाइटें नहीं मिली है। लोगों को वार्डों में जवाब देना मुश्किल हो रहा है। इसलिए मैंने सोचा स्ट्रीट लाइटें तो इस सदन की बैठक में भी नहीं मिलेगी, इसलिए ये मोमबत्तियां पार्षदों और अफसरों को बांट दूं, ताकि शाम ढलते अपने-अपने वार्डों में स्ट्रीट लाइटों की जगह जलाकर सड़कों के किनारे रख दें। इस पर कमिश्नर ने उन्हे शांत किया और बताया कि फिलहाल 25-25 स्ट्रीट लाइटें जल्द वार्डों में पहुंचने वाली है।
गंदगी के फ्लैक्स बनवाकर ले आए परविंद्र
वार्ड नंबर अठारह के पार्षद परविंद्र सिंह ने भी गंदगी और पॉलिथीन की वजह से बिगड़े रहे वार्डों के हालातों की आवाज उठाई। वह सभी वार्डों में गंदगी के हालात की तस्वीर फ्लैक्स के रूप में लेकर सदन में पहुंच गए। उन्होंने एक-एक वार्ड में गंदगी के हालातों को फ्लैक्सों के जरिये दिखाया और बाद में इसे मेयर व कमिश्रर को भेंट कर दी। फ्लैक्सों में वार्डों में गंदगी के हालात देखकर अफसर शर्मसार हो गए। कमिश्नर ने तुरंत सेनेटरी इंस्पेक्टर की फटकार लगाई। उसके बाद मेयर ने भी सेनेटरी इंस्पेक्टर को जमकर लताड़ा। मेयर ने कहा कि वे पॉलिथीन बेचने व निर्माता लोगों पर लगाम कसे और गंदगी रोजाना उठवाई जाए। कमिश्नर ने निर्देश दिए कि वार्डों में सफाई व्यवस्था पार्षदों से तालमेल के साथ करवाई जाए।
सोनिया ने कविता के जरिये किया शर्मसार
वार्ड नंबर एक की पार्षद सोनिया चौधरी हालात से इतनी ज्यादा दुखी थी कि उन्होंने एमसीए के तीन साल के कार्यकाल और वार्डवासियों की समस्याओं, पार्षदों की अनदेखी और सदन बैठकों की खानापूर्ति पर 13 लाइनों की कविता 'मेयर साहब तीन साल से एजेंडे ही बना रहे...अफसर सुविधा शुल्क के नाम पर मलाई खा रहे...Ó सदन में सुनाकर वहां बैठे अफसरों को शर्मसार कर दिया। उनकी कविता जब खत्म हुई तो सभी पार्षदों ने उनकी कविता की सराहना तालियों से की और कहा कि इस कविता में पार्षदों व वार्डवासियों के दर्द के साथ-साथ अफसरों की मनमानियों का सच्चा बखान है। इस दौरान अफसर चुपचाप बैठे रहे।
विज-सैलजा के मसले पर उलझ गए पार्षद
पार्षदों की अफसरों के साथ तो बहस हुई, लेकिन मंत्री अनिल विज और राज्यसभा सांसद कुमारी सैलजा द्वारा करवाए गए व करवाए जा रहे विकास कार्यों के मसले पर कांग्रेसी व भाजपा के पार्षद भी उलझ गए। इस दौरान डिप्टी मेयर सुधीर जयसवाल, सुरेंद्र बिंद्रा, ललता प्रसाद, रमेश लाल मल, सीनियर डिप्टी मेयर दुर्गा सिंह अत्रेय व परविंद्र सिंह में तीखी बहस हो गई। कांग्रेसी पार्षदों का कहना था सैलजा पूर्व लोकसभा सांसद रहते हुए ढेरों फंड लाई थी, लेकिन प्रशासन ने उस पर काम नहीं करवाया, लेकिन अब प्रशासन मंत्री अनिल विज के प्रभाव में काम कर रहा है और कांग्रेसी पार्षदों के वार्डों में इसी वजह से ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जबकि भाजपा पार्षदों का कहना था कि मंत्री विज पूरे कैंट विधानसभा का बिना पक्षपात के विकास करवा रहे हैं और ढेरों फंड ला रहे हैं। उनके अनुसार विज ने शहर के डेवलपमेंट के लिए सोच और सुझाव दिया है, जिस पर अफसरों को खरा उतरना है। उन पर लगाए आरोप निराधार है। इसी मसले पर थोड़ी देर तक पार्षदों में तीखी बहस होती रही। पार्षदों ने एक-दूसरे की सरकारों पर विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के भी आरोप मढ़े। बाद में मेयर व कमिश्नर ने पार्षदों को शांत करवाया।
बुलाने पर नहीं आते अफसर डीसी को होगी शिकायत
बैठक में न तो बिजली महकमे के, न जल महकमे के अफसर मौजूद थे, जबकि उन्हें भी एजेंडा भेजा जाता है। सिटी के बिल्डिंग क्लर्क भी बैठक में उपस्थित नहीं थे। इस पर पार्षदों ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि जब अफसर ही नहीं होते, तो संबंधित महकमे की शिकायतों पर कौन जवाब देगा। इसे गंभीरता से लेते हुए एमसीए कमिश्नर ने बिल्डिंग क्लर्क सिटी से स्पष्टीकरण मांगे जाने व अन्य विभागों के अफसरों की गैरहाजिरी की शिकायत डीसी अंबाला से किए जाने के आदेश दिए।
बैठक में कई विकास योजनाओं और गंभीर मसलों पर चर्चा व बहस हुई है। अवैध कब्जों, निर्माण व अवैध कॉलोनियों के गंभीर मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। अवैध निर्माण व कब्जे किसी सूरत में बरदाश्त नहीं होंगे। सफाई और स्ट्रीट लाइटों के हालात सुधारने के लिए भी सख्त हिदायत दी गई है। पार्षद सीधे अपनी शिकायत उनके पास लेकर आएं, सभी पार्षद सम्मान योग्य है, उनकी सुनवाई जरूर होगी।
-सुरेंद्र सिंह, कमिश्नर, एमसीए
बैठक में सभी पार्षदों ने अपने-अपने इलाकों की समस्याएं उठाई है। पार्षदों ने शिकायत की है कि अफसर उनकी सुनते नहीं। अवैध कब्जों व निर्माण की शिकायतों को तो एकदम से अनदेखा व अनसुना किया जाता है। अफसर बताएं इसके पीछे उनकी क्या मंशा है? अफसरों ने उन पर जो आरोप लगाए हैं, उस पर अफसर अपना स्पष्टीकरण दें।
-रमेशलाल मल, मेयर, एमसीए
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यह गंभीर आरोप म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन अंबाला (एमसीए) की शुक्रवार को पंचायत भवन में आयोजित सदन की बैठक में एमसीए के डिप्टी मेयर सुधीर जयसवाल ने सदन में एमसीए के निचले अफसरों पर खुलकर लगाए। डिप्टी मेयर ने जैसे ही अवैध कब्जे का मुद्दा छेड़ा तो अन्य पार्षदगण भी उनके साथ हो लिए और सभी ने अपने-अपने वार्ड में इन अवैध कब्जों के बारे में एमसीए कमिश्नर सुरेंद्र सिंह व मेयर रमेश लाल मल को बताते हुए तुरंत कार्रवाई की मांग की।
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एमसीए कमिश्नर ने भी इन मुद्दों को गंभीर बताते हुए सीनियर अकाउंट अफसर को इस आरोपों की जांच के आदेश दिए। इस बैठक में अवैध कब्जों के साथ-साथ स्ट्रीट लाइट में गड़बड़झाला और सफाई व्यवस्था में धांधली के भी आरोप लगाते हुए हंगामा किया। इस दौरान पार्षदों और निचले अफसरों में बहस भी हुई।
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अवैध कब्जों पर पार्षदों ने यूं घेरा, अफसर मौन
- डिप्टी मेयर सुधीर जयसवाल ने एमसीए कमिश्नर से कहा कि बाजारों में सरकारी नालों व जमीनों पर अवैध कब्जे हो रहे हैं, वे खुद सर्वे कर लें, कितना निर्माण हो रहा है और कितने नक्शे पास हैं? भ्रष्टाचार की कलई खुलकर आपके सामने आ जाएगी।
- वार्ड पार्षद सुरेंद्र बिंद्रा ने कहा कि उनके वार्ड नंबर सत्रह बिना नक्श के अवैध कब्जों की भरमार है। जब उन्होंने आवाज उठाई तो कब्जेधारी उनके पास डेढ़ लाख रुपये का ऑफर लेकर पहुंचे, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया। उन्होंने एमसीए में शिकायत की, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ। उन्होंने अवैध निर्माण आराम से कर लिया। अब बताइए वो डेढ़ लाख रुपये किसने खाकर ये अवैध काम करवाया?
- वार्ड चौदह के पार्षद जसबीर सिंह जस्सी ने कहा पार्षद अवैध कब्जों की शिकायत एमसीए अफसरों को करते हैं, लेकिन हैरत की बात यह कि थोड़ी ही देर में कब्जेधारियों को एमसीए कार्यालय से ही मालूम चल जाता है कि उनकी शिकायत पार्षद ने की है। उसके बाद कब्जेधारी उनसे लड़ने पहुंच जाते हैं। इससे साबित होता है कि कब्जेधारियों और एमसीए कर्मियों की पूरी मिलीभगत से अवैध कब्जे व निर्माण होते हैं।
- वार्ड नंबर आठ के पार्षद पुष्पिंद्र हरीश ने कहा कि उनके वार्ड में करीबन अठारह एकड़ जमीन पर अवैध रूप से कॉलोनी काट दी गई। उन्होंने एमसीए में शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं। अब प्लाटिंग के बाद वहां बिना नक्श के भवन खड़े हो रहे हैं, लेकिन एमसीए अफसर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं। आखिर अफसरों की मंशा क्या है?
- वार्ड नंबर छह के पार्षद पवन अग्रवाल डिंपी ने कहा कि एमसीए की शुकलकुंड पर जमीन है। उस पर करीबन 100 दुकानें अवैध रूप से तैयार हो गई है। एमसीए अफसर बताएं उन्होंने कितनी रिश्वत लेकर इन दुकानों को खड़ा किया है?
-वार्ड नंबर दो की पार्षद दर्शना मेहता ने कहा कि नेशनल हाइवे से धूलकोट स्टेशन तक दोनों ओर पंद्रह से बीस फीट तक अवैध कब्जे हो चुके हैं। कई बार एमसीए में शिकायत कर चुकी हूं। कोई सुनने वाला नहीं, सबकुछ मिलीभगत से चल रहा है।
-वार्ड नंबर एक की पार्षद सोनिया चौधरी ने कहा कि कमिश्नर साहब एक साल से ज्यादा समय से बस स्टैंड पर निगम की जमीन पर शराब का अवैध खोखा पड़ा है। जरा बताइए वो किसकी अनुमति से रखा गया और क्या उससे कोई रेंट वसूला जा रहा है या सुविधा शुल्क? ये भी बता दीजिए ठेका का खोखा सरकारी जमीन पर रखने का सुविधा शुल्क क्या है? ताकि और भी लोग ऐसा कर लें। इस पर निचले अफसर चुप बैठे रहे, कमिश्नर ने तुरंत ठेका हटवाने के आदेश दिए।
- एमसीए के कमिश्नर रमेश लाल मल की भी चुप्पी टूटी और वे भी बोले, कमिश्नर साहब कैंट व सिटी में अवैध कब्जे और अतिक्रमण की वाकई भरमार है। दुकानें छोड़कर लोगों ने सड़कों, नालों पर भी कब्जा कर लिया है। चौड़े बाजार तंग गलियों से लग रहे हैं। एमसीए अफसर आंखें मूंदे क्यों बैठे हैं। आप इन पर सख्त एक्शन क्यों नहीं लेते?
-जनप्रतिनिधियों के इन तीखे आरोपों पर निचले अफसर तो चुपचाप बैठे रहे, जबकि एमसीए कमिश्नर सफाई देते रहें। अंतत: उन्होंने कुछ गंभीर मामलों की जांच सीनियर अकाउंट अफसर से करवाने का फैसला लिया।
-इन पार्षदों ने अनोखे अंदाज में दिखाई नाराजगी
सीटू ने मुंह बांधी पट्टी, कमिश्नर ने खुलवाई
वार्ड नंबर सात के पार्षद दलजीत सिंह भाटिया सीटू ने सदन की बैठक शुरू होते ही मुंह पर पट्टी बांध ली और चुपचाप बैठ गए। मेयर रमेश लाल मल ने जब इसकी वजह पूछी तो दूसरे पार्षदों ने बताया कि यह दलजीत भाटिया का विरोध का तरीका है। काफी आग्रह के बाद एमसीए कमिश्नर सुरेंद्र सिंह ने पार्षद भाटिया के चेहरे के मुंह से पट्टी उतरवाकर विरोध की वजह पूछी। तो उन्होंने बताया कि उन्हें यहां सदन में तीन साल हो गए हैं। पहले उन्होंने स्ट्रीट लाइट घोटाला उठाया, फिर सफाई व स्ट्रीट का मसला। वह यहां सदन में बोल-बोलकर चले जाते हैं। एमसीए कार्यालयों में जाकर अपने वार्डवासियों की समस्याओं का रोना अफसरों को रो आते हैं, लेकिन जब उनकी कोई सुनता ही नहीं तो उन्हें सदन में बोलने का भी कोई हक नहीं है, इसलिए उन्हें पट्टी बांधकर चुप बैठना पड़ा।
रूपम पार्षदों, अफसरों को बांटने लाई मोमबत्तियां
वार्ड नंबर पांच की पार्षद रूपम गुगलानी ने कहा कि तीन साल हो चुके हैं सदन में, लेकिन आज तक वार्ड में स्ट्रीट लाइटों की समस्या ही खत्म नहीं हुई। ये समस्या मेरे वार्ड की नहीं, बल्कि ट्विनसिटी के सभी वार्डों की है। सौ-सौ स्ट्रीट लाइटें देने का वायदा करीबन साल पहले सदन में ही किया गया था, प्रस्ताव भी पास हुआ, लेकिन आज तक एक भी स्ट्रीट लाइटें नहीं मिली है। लोगों को वार्डों में जवाब देना मुश्किल हो रहा है। इसलिए मैंने सोचा स्ट्रीट लाइटें तो इस सदन की बैठक में भी नहीं मिलेगी, इसलिए ये मोमबत्तियां पार्षदों और अफसरों को बांट दूं, ताकि शाम ढलते अपने-अपने वार्डों में स्ट्रीट लाइटों की जगह जलाकर सड़कों के किनारे रख दें। इस पर कमिश्नर ने उन्हे शांत किया और बताया कि फिलहाल 25-25 स्ट्रीट लाइटें जल्द वार्डों में पहुंचने वाली है।
गंदगी के फ्लैक्स बनवाकर ले आए परविंद्र
वार्ड नंबर अठारह के पार्षद परविंद्र सिंह ने भी गंदगी और पॉलिथीन की वजह से बिगड़े रहे वार्डों के हालातों की आवाज उठाई। वह सभी वार्डों में गंदगी के हालात की तस्वीर फ्लैक्स के रूप में लेकर सदन में पहुंच गए। उन्होंने एक-एक वार्ड में गंदगी के हालातों को फ्लैक्सों के जरिये दिखाया और बाद में इसे मेयर व कमिश्रर को भेंट कर दी। फ्लैक्सों में वार्डों में गंदगी के हालात देखकर अफसर शर्मसार हो गए। कमिश्नर ने तुरंत सेनेटरी इंस्पेक्टर की फटकार लगाई। उसके बाद मेयर ने भी सेनेटरी इंस्पेक्टर को जमकर लताड़ा। मेयर ने कहा कि वे पॉलिथीन बेचने व निर्माता लोगों पर लगाम कसे और गंदगी रोजाना उठवाई जाए। कमिश्नर ने निर्देश दिए कि वार्डों में सफाई व्यवस्था पार्षदों से तालमेल के साथ करवाई जाए।
सोनिया ने कविता के जरिये किया शर्मसार
वार्ड नंबर एक की पार्षद सोनिया चौधरी हालात से इतनी ज्यादा दुखी थी कि उन्होंने एमसीए के तीन साल के कार्यकाल और वार्डवासियों की समस्याओं, पार्षदों की अनदेखी और सदन बैठकों की खानापूर्ति पर 13 लाइनों की कविता 'मेयर साहब तीन साल से एजेंडे ही बना रहे...अफसर सुविधा शुल्क के नाम पर मलाई खा रहे...Ó सदन में सुनाकर वहां बैठे अफसरों को शर्मसार कर दिया। उनकी कविता जब खत्म हुई तो सभी पार्षदों ने उनकी कविता की सराहना तालियों से की और कहा कि इस कविता में पार्षदों व वार्डवासियों के दर्द के साथ-साथ अफसरों की मनमानियों का सच्चा बखान है। इस दौरान अफसर चुपचाप बैठे रहे।
विज-सैलजा के मसले पर उलझ गए पार्षद
पार्षदों की अफसरों के साथ तो बहस हुई, लेकिन मंत्री अनिल विज और राज्यसभा सांसद कुमारी सैलजा द्वारा करवाए गए व करवाए जा रहे विकास कार्यों के मसले पर कांग्रेसी व भाजपा के पार्षद भी उलझ गए। इस दौरान डिप्टी मेयर सुधीर जयसवाल, सुरेंद्र बिंद्रा, ललता प्रसाद, रमेश लाल मल, सीनियर डिप्टी मेयर दुर्गा सिंह अत्रेय व परविंद्र सिंह में तीखी बहस हो गई। कांग्रेसी पार्षदों का कहना था सैलजा पूर्व लोकसभा सांसद रहते हुए ढेरों फंड लाई थी, लेकिन प्रशासन ने उस पर काम नहीं करवाया, लेकिन अब प्रशासन मंत्री अनिल विज के प्रभाव में काम कर रहा है और कांग्रेसी पार्षदों के वार्डों में इसी वजह से ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जबकि भाजपा पार्षदों का कहना था कि मंत्री विज पूरे कैंट विधानसभा का बिना पक्षपात के विकास करवा रहे हैं और ढेरों फंड ला रहे हैं। उनके अनुसार विज ने शहर के डेवलपमेंट के लिए सोच और सुझाव दिया है, जिस पर अफसरों को खरा उतरना है। उन पर लगाए आरोप निराधार है। इसी मसले पर थोड़ी देर तक पार्षदों में तीखी बहस होती रही। पार्षदों ने एक-दूसरे की सरकारों पर विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के भी आरोप मढ़े। बाद में मेयर व कमिश्नर ने पार्षदों को शांत करवाया।
बुलाने पर नहीं आते अफसर डीसी को होगी शिकायत
बैठक में न तो बिजली महकमे के, न जल महकमे के अफसर मौजूद थे, जबकि उन्हें भी एजेंडा भेजा जाता है। सिटी के बिल्डिंग क्लर्क भी बैठक में उपस्थित नहीं थे। इस पर पार्षदों ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि जब अफसर ही नहीं होते, तो संबंधित महकमे की शिकायतों पर कौन जवाब देगा। इसे गंभीरता से लेते हुए एमसीए कमिश्नर ने बिल्डिंग क्लर्क सिटी से स्पष्टीकरण मांगे जाने व अन्य विभागों के अफसरों की गैरहाजिरी की शिकायत डीसी अंबाला से किए जाने के आदेश दिए।
बैठक में कई विकास योजनाओं और गंभीर मसलों पर चर्चा व बहस हुई है। अवैध कब्जों, निर्माण व अवैध कॉलोनियों के गंभीर मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। अवैध निर्माण व कब्जे किसी सूरत में बरदाश्त नहीं होंगे। सफाई और स्ट्रीट लाइटों के हालात सुधारने के लिए भी सख्त हिदायत दी गई है। पार्षद सीधे अपनी शिकायत उनके पास लेकर आएं, सभी पार्षद सम्मान योग्य है, उनकी सुनवाई जरूर होगी।
-सुरेंद्र सिंह, कमिश्नर, एमसीए
बैठक में सभी पार्षदों ने अपने-अपने इलाकों की समस्याएं उठाई है। पार्षदों ने शिकायत की है कि अफसर उनकी सुनते नहीं। अवैध कब्जों व निर्माण की शिकायतों को तो एकदम से अनदेखा व अनसुना किया जाता है। अफसर बताएं इसके पीछे उनकी क्या मंशा है? अफसरों ने उन पर जो आरोप लगाए हैं, उस पर अफसर अपना स्पष्टीकरण दें।
-रमेशलाल मल, मेयर, एमसीए