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Ambala News: जेल से बाहर आए सिख युवा, संगत स्वागत कर बोली- यह हमारी जीत
Sat, 22 Aug 2026 01:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sat, 22 Aug 2026 01:42 AM IST
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सिटी में सेंट्रल जेल से बाहर आने पर युवाओं का स्वागत करती संगत। स्वयं
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। पंजोखरा साहिब में खालिस्तान विरोधी नेता गुरसिमरन सिंह मंड पर हमले के आरोप में जेल भेजे गए पंजोखरा निवासी दोनों सिख युवाओं अनमोल सिंह और हरविंद्र सिंह को शुक्रवार शाम सेंट्रल जेल से बाहर आ गए। दोनों युवाओं के जेल से बाहर आते ही वहां मौजूद संगत और सिख समाज के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह हमारी जीत है।
14 दिन की न्यायिक हिरासत के बाद मिली राहत
गुरसिमरन सिंह मंड पर हमले के आरोप में पुलिस ने दोनों युवाओं को गिरफ्तार कर 12 अगस्त को अदालत में पेश किया था। जहां से कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
युवकों के अधिवक्ता रिपनजीत सिंह एवं हरमिंदर सिंह ने बताया कि शुक्रवार को हमने कोर्ट में जमानत की अर्जी लगाई थी। इसके बाद अदालत ने दोनों को 50-50 हजार के मुचलके पर जमानत दे कर रिहा कर दिया। उम्मीद है कि सरकार से हुए समझौते के क्रम में प्राथमिकी पहले ही रद्द हो जाए।
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केसरिया सिरोपा पहनाकर किया सम्मान
जेल के बाहर मौजूद सिख संगतों ने दोनों युवाओं को केसरिया सिरोपा पहनाकर और बोले सो निहाल के जयकारों के साथ सम्मानित किया। इस दौरान मौजूद सिख प्रतिनिधियों ने कहा कि समाज अपने युवाओं के साथ मजबूती से खड़ा है।
शिरोमणि अकाली दल हरियाणा के प्रधान हरकेश सिंह मोहड़ी ने युवाओं के साहसिक योगदान और संघर्ष की सराहना करते हुए इसे सिख कौम की एकजुटता की जीत बताया। संगत के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि युवाओं पर दर्ज सभी मुकदमों को वापस कराने और न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
इस दौरान किसान नेता अमरजीत सिंह मोहड़ी, हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के कार्यकारी सदस्य रुपिंदर सिंह, गुरबीर सिंह, बलकार सिंह व अन्य सिख समाज से जुड़े पदाधिकारी उपस्थित रहे।
निहंग सिंहों ने युवाओं और बुजुर्गों का किया बचाव
मोहड़ी ने कहा कि हरियाणा पुलिस ने दोनों युवकों को गिरफ्तार किया था, जिसके विरोध में पूरी सिख कौम और समाज ने बड़े स्तर पर लड़ाई लड़ी। इसके लिए नेशनल हाईवे जाम तक करना पड़ा। आखिर में सरकार को झुकना पड़ा और युवाओं की रिहाई में सहयोग करने के साथ-साथ दर्ज मामलों को वापस लेने का आश्वासन देना पड़ा।
उन्होंने कहा कि दोनों युवाओं की रिहाई हमारी पहली बड़ी जीत है और दोनों वीर आज हमारे बीच खड़े हैं। उन्होंने इस संघर्ष में साथ देने के लिए हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, किसान यूनियनों, निहंग सिंहों और विभिन्न सिख जत्थेबंदियों व संगतों का धन्यवाद किया।
उन्होंने कहा कि जो निहंग सिंह मौके पर डटे रहे और जिन्होंने युवाओं/बुजुर्गों का बचाव किया। सिख कौम हमेशा चढ़दी कला में रहेगी और हम हर लड़ाई जीतेंगे।
क्या है पूरा विवाद
दरअसल 7 अगस्त को खालिस्तान विरोधी नेता गुरसिमरन सिंह मंड अंबाला कैंट स्थित पंजोखरा साहिब गुरुद्वारा पहुंचे थे। इसी दौरान पार्किंग को लेकर स्थानीय लोगों से विवाद हुआ। मंड का आरोप था कि गुरुद्वारा साहिब में जाने पर निहंगों ने रोका व डंडों व तेजधार हथियारों से किया हमला। वह मौके से भागने लगे तो उग्र भीड़ ने हमला कर दिया। इस संबंध में पुलिस ने दोनों युवाओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
इसके बाद उनकी रिहाई की मांग पर मामला भड़का और सिख संगत ने जीटी रोड जाम कर दिया था, जिसमें पुलिस उपाधीक्षक समेत 9 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इसके बाद हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने 25 अगस्त को बैठक की कॉल दी। इससे पहले ही पदाधिकारियों और सरकार के बीच वार्ता में विवाद का हल निकल गया।
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अंबाला सिटी। पंजोखरा साहिब में खालिस्तान विरोधी नेता गुरसिमरन सिंह मंड पर हमले के आरोप में जेल भेजे गए पंजोखरा निवासी दोनों सिख युवाओं अनमोल सिंह और हरविंद्र सिंह को शुक्रवार शाम सेंट्रल जेल से बाहर आ गए। दोनों युवाओं के जेल से बाहर आते ही वहां मौजूद संगत और सिख समाज के पदाधिकारियों ने उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह हमारी जीत है।
14 दिन की न्यायिक हिरासत के बाद मिली राहत
गुरसिमरन सिंह मंड पर हमले के आरोप में पुलिस ने दोनों युवाओं को गिरफ्तार कर 12 अगस्त को अदालत में पेश किया था। जहां से कोर्ट ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था।
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युवकों के अधिवक्ता रिपनजीत सिंह एवं हरमिंदर सिंह ने बताया कि शुक्रवार को हमने कोर्ट में जमानत की अर्जी लगाई थी। इसके बाद अदालत ने दोनों को 50-50 हजार के मुचलके पर जमानत दे कर रिहा कर दिया। उम्मीद है कि सरकार से हुए समझौते के क्रम में प्राथमिकी पहले ही रद्द हो जाए।
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केसरिया सिरोपा पहनाकर किया सम्मान
जेल के बाहर मौजूद सिख संगतों ने दोनों युवाओं को केसरिया सिरोपा पहनाकर और बोले सो निहाल के जयकारों के साथ सम्मानित किया। इस दौरान मौजूद सिख प्रतिनिधियों ने कहा कि समाज अपने युवाओं के साथ मजबूती से खड़ा है।
शिरोमणि अकाली दल हरियाणा के प्रधान हरकेश सिंह मोहड़ी ने युवाओं के साहसिक योगदान और संघर्ष की सराहना करते हुए इसे सिख कौम की एकजुटता की जीत बताया। संगत के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि युवाओं पर दर्ज सभी मुकदमों को वापस कराने और न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
इस दौरान किसान नेता अमरजीत सिंह मोहड़ी, हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के कार्यकारी सदस्य रुपिंदर सिंह, गुरबीर सिंह, बलकार सिंह व अन्य सिख समाज से जुड़े पदाधिकारी उपस्थित रहे।
निहंग सिंहों ने युवाओं और बुजुर्गों का किया बचाव
मोहड़ी ने कहा कि हरियाणा पुलिस ने दोनों युवकों को गिरफ्तार किया था, जिसके विरोध में पूरी सिख कौम और समाज ने बड़े स्तर पर लड़ाई लड़ी। इसके लिए नेशनल हाईवे जाम तक करना पड़ा। आखिर में सरकार को झुकना पड़ा और युवाओं की रिहाई में सहयोग करने के साथ-साथ दर्ज मामलों को वापस लेने का आश्वासन देना पड़ा।
उन्होंने कहा कि दोनों युवाओं की रिहाई हमारी पहली बड़ी जीत है और दोनों वीर आज हमारे बीच खड़े हैं। उन्होंने इस संघर्ष में साथ देने के लिए हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, किसान यूनियनों, निहंग सिंहों और विभिन्न सिख जत्थेबंदियों व संगतों का धन्यवाद किया।
उन्होंने कहा कि जो निहंग सिंह मौके पर डटे रहे और जिन्होंने युवाओं/बुजुर्गों का बचाव किया। सिख कौम हमेशा चढ़दी कला में रहेगी और हम हर लड़ाई जीतेंगे।
क्या है पूरा विवाद
दरअसल 7 अगस्त को खालिस्तान विरोधी नेता गुरसिमरन सिंह मंड अंबाला कैंट स्थित पंजोखरा साहिब गुरुद्वारा पहुंचे थे। इसी दौरान पार्किंग को लेकर स्थानीय लोगों से विवाद हुआ। मंड का आरोप था कि गुरुद्वारा साहिब में जाने पर निहंगों ने रोका व डंडों व तेजधार हथियारों से किया हमला। वह मौके से भागने लगे तो उग्र भीड़ ने हमला कर दिया। इस संबंध में पुलिस ने दोनों युवाओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
इसके बाद उनकी रिहाई की मांग पर मामला भड़का और सिख संगत ने जीटी रोड जाम कर दिया था, जिसमें पुलिस उपाधीक्षक समेत 9 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इसके बाद हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने 25 अगस्त को बैठक की कॉल दी। इससे पहले ही पदाधिकारियों और सरकार के बीच वार्ता में विवाद का हल निकल गया।