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नवंबर माह में होगा शहीद स्मारक का उद्घाटन : विज
Fri, 24 Oct 2025 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Fri, 24 Oct 2025 01:41 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंबाला छावनी में बन रहे 1857 में आजादी की पहली लड़ाई को समर्पित व एशिया के सबसे बड़े शहीद स्मारक का उद्धाटन नवंबर में कर सकते हैं। ये जानकारी हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी। उन्होंने कहा कि शहीद स्मारक बनकर लगभग तैयार हो चुका है। उन्होंने इसके उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रार्थना की है। उन्हाेंने बताया कि अंबाला-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगभग 600 करोड़ की लागत से शहीदी स्मारक का निर्माण करवाया गया है।
स्मारक में नजर आएगी शहीदी गाथाएं : विज ने कहा कि जितनी क्रूरता आजादी की पहली लड़ाई में हुई, लोगों को पेड़ों से बांध-बांधकर गोलियों से मारा गया, कोल्हू के नीचे सिर रखकर उनको कुचला गया, कई सालों तक उन्हें जेलों में डाला गया, कई रेजिमेंट को भंग कर दिया गया। यह कहानियां लोगों के सामने नहीं आई, इसलिए उन्होंने 20-25 साल लड़ाई लड़ी ताकि सच्चाई लोगों के सामने लाई जा सके जोकि शहीदी स्मारक में जीवंत प्रदर्शित की जाएंगी। उन्होंने शहीद स्मारक बनाने के लिए सरकार से अनुरोध किया और अब यह बनकर लगभग तैयार हो चुका है।
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अंबाला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अंबाला छावनी में बन रहे 1857 में आजादी की पहली लड़ाई को समर्पित व एशिया के सबसे बड़े शहीद स्मारक का उद्धाटन नवंबर में कर सकते हैं। ये जानकारी हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी। उन्होंने कहा कि शहीद स्मारक बनकर लगभग तैयार हो चुका है। उन्होंने इसके उद्घाटन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रार्थना की है। उन्हाेंने बताया कि अंबाला-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगभग 600 करोड़ की लागत से शहीदी स्मारक का निर्माण करवाया गया है।
स्मारक में नजर आएगी शहीदी गाथाएं : विज ने कहा कि जितनी क्रूरता आजादी की पहली लड़ाई में हुई, लोगों को पेड़ों से बांध-बांधकर गोलियों से मारा गया, कोल्हू के नीचे सिर रखकर उनको कुचला गया, कई सालों तक उन्हें जेलों में डाला गया, कई रेजिमेंट को भंग कर दिया गया। यह कहानियां लोगों के सामने नहीं आई, इसलिए उन्होंने 20-25 साल लड़ाई लड़ी ताकि सच्चाई लोगों के सामने लाई जा सके जोकि शहीदी स्मारक में जीवंत प्रदर्शित की जाएंगी। उन्होंने शहीद स्मारक बनाने के लिए सरकार से अनुरोध किया और अब यह बनकर लगभग तैयार हो चुका है।
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