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धान से अटी पड़ी मंडियां, आई फार्म न कटने से नहीं हो रहा धान का उठान
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Mandis littered with paddy, paddy is not being lifted due to non-cutting of I form
- फोटो : Ambala
अंबाला सिटी। चार दिन पहले खरीद शुरू होने के बाद भी जिलेभर की मंडियों से धान के एक भी दाने का उठान नहीं हुआ है। आई फार्म न कटने के कारण राइस मिलर भी धान का उठान नहीं कर पा रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर जिले भर की मंडियों में तेजी के साथ धान की आवक हो रही है।
हालात यहां तक है कि अब मंडियों में अब पैर रखने तक की जगह नहीं है। इस कारण मजबूरी में किसानों को मंडी के बाहर अपनी धान को रखना पड़ रहा है। अंबाला शहर की नई अनाज मंडी की बात करें तो यहां से किसान अब हुडा ग्राउंड की ओर रुख कर रहे हैं। जहां पर किसानों को मजबूरी में अपनी फसल उतारनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि सरकार को तेजी के साथ मंडी से धान का उठान करना चाहिए, जिससे कि वह मंडी में अपनी फसल को ला सके। इसके अलावा आढ़ती व राइस मिलर भी धान का उठान न होने से पूरी तरह खफा हैं।
राइस मिलर बोले हमने दी सहमति, डीएफएसी ने कहा बैंक गारंटी पर अड़ रहा पेच
राइस मिलर एसोसिएशन प्रधान विनोद अग्रवाल का कहना है कि पहले तो सरकार हमारी सहमति न आने का बहाना देकर आई फार्म नहीं काट रही थी। मगर, अब तो जिले भर के राइस मिलरों ने सरकार को अपनी सहमति दे दी है। इसके बाद भी सरकार ने आई फार्म काटने का पोर्टल शुरू नहीं किया है। ऐसे में अब राइस मिलर भी क्या कर सकते हैं। हमने इस संबंध में अधिकारियों से भी बात की थी। वहीं, जब इस संबंध में डीएफएससी से बात की तो उन्होंने बताया कि आई फार्म कट रहे हैं, मगर बैंक गारंटी को लकर पेंच फंसा हुआ है। उसी पर बातचीत जारी है।
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एक एकड़ पर 31 क्विंटल धान खरीदने की सहमति
धान खरीद को लेकर किसानों द्वारा किया संघर्ष सफल रहा है। सरकार ने किसानों की सभी मांगों को मान लिया है। इसमें सबसे पहले मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल को खोलने, उसके बाद मैसेज सिस्टम को बंद करने और इसके बाद एक एकड़ जमीन से केवल 25 क्विंटल के स्थान पर 31 क्विंटल धान खरीद की मांग को किसानों ने की थी। इन सभी मांगों को मान लेने के बाद मंडियों में धान की खरीद शुरू हो गई है। भाकियू जिलाध्यक्ष मलकीत सिंह ने बताया कि अगर इसके बाद सरकार धान खरीद में किसी तरह का अड़ंगा लगाती है तो किसान आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
राइस मिलरों के साथ बैठक हुई थी। उसमें अधिकतर मुद्दों पर सहमति बन गई है। मगर, बैंक गारंटी को लेकर अभी बातचीत जारी है। जब तक इस पर सहमति नहीं बनती तब तक उठान की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकेगी। हमारा प्रयास है कि जल्द ही इस समस्या का हल करें।
- राजेश्वर मुदगिल, डीएफएससी, अंबाला।
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हालात यहां तक है कि अब मंडियों में अब पैर रखने तक की जगह नहीं है। इस कारण मजबूरी में किसानों को मंडी के बाहर अपनी धान को रखना पड़ रहा है। अंबाला शहर की नई अनाज मंडी की बात करें तो यहां से किसान अब हुडा ग्राउंड की ओर रुख कर रहे हैं। जहां पर किसानों को मजबूरी में अपनी फसल उतारनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि सरकार को तेजी के साथ मंडी से धान का उठान करना चाहिए, जिससे कि वह मंडी में अपनी फसल को ला सके। इसके अलावा आढ़ती व राइस मिलर भी धान का उठान न होने से पूरी तरह खफा हैं।
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राइस मिलर बोले हमने दी सहमति, डीएफएसी ने कहा बैंक गारंटी पर अड़ रहा पेच
राइस मिलर एसोसिएशन प्रधान विनोद अग्रवाल का कहना है कि पहले तो सरकार हमारी सहमति न आने का बहाना देकर आई फार्म नहीं काट रही थी। मगर, अब तो जिले भर के राइस मिलरों ने सरकार को अपनी सहमति दे दी है। इसके बाद भी सरकार ने आई फार्म काटने का पोर्टल शुरू नहीं किया है। ऐसे में अब राइस मिलर भी क्या कर सकते हैं। हमने इस संबंध में अधिकारियों से भी बात की थी। वहीं, जब इस संबंध में डीएफएससी से बात की तो उन्होंने बताया कि आई फार्म कट रहे हैं, मगर बैंक गारंटी को लकर पेंच फंसा हुआ है। उसी पर बातचीत जारी है।
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एक एकड़ पर 31 क्विंटल धान खरीदने की सहमति
धान खरीद को लेकर किसानों द्वारा किया संघर्ष सफल रहा है। सरकार ने किसानों की सभी मांगों को मान लिया है। इसमें सबसे पहले मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल को खोलने, उसके बाद मैसेज सिस्टम को बंद करने और इसके बाद एक एकड़ जमीन से केवल 25 क्विंटल के स्थान पर 31 क्विंटल धान खरीद की मांग को किसानों ने की थी। इन सभी मांगों को मान लेने के बाद मंडियों में धान की खरीद शुरू हो गई है। भाकियू जिलाध्यक्ष मलकीत सिंह ने बताया कि अगर इसके बाद सरकार धान खरीद में किसी तरह का अड़ंगा लगाती है तो किसान आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे।
राइस मिलरों के साथ बैठक हुई थी। उसमें अधिकतर मुद्दों पर सहमति बन गई है। मगर, बैंक गारंटी को लेकर अभी बातचीत जारी है। जब तक इस पर सहमति नहीं बनती तब तक उठान की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकेगी। हमारा प्रयास है कि जल्द ही इस समस्या का हल करें।
- राजेश्वर मुदगिल, डीएफएससी, अंबाला।