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Ambala News: टेक्नीशियन के छोड़ने पर 15 दिन से नहीं हो रही कैंसर महिला मरीजों की मेमोग्राफी
Sat, 04 Oct 2025 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Sat, 04 Oct 2025 11:47 PM IST
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अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल में मैमोग्राफी के कमरे पर जड़ा ताला: संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए कैंट के नागरिक अस्पताल में पड़ी लाखों रुपये की मेमोग्राफी मशीन बिना टेक्नीशियन के पिछले 15 दिन से धूल फांक रही है। इस कारण अटल कैंसर केयर केंद्र की ओपीडी में हरियाणा सहित आसपास के राज्यों व महिला ओपीडी में आने वाली महिला मरीजों के लिए परेशानी बढ़ गई है। एक ओर इन महिला मरीजों को कैंट के नागरिक अस्पताल में पिछले 15 दिन से टेक्नीशियन के काम छोड़ने की बात बोलकर लौटाया जा रहा है, वहीं मरीजों के लिए सबसे बड़ी आफत निजी सेंटरों व रोटरी अस्पताल द्वारा हाथ खड़े किए जाने के कारण हो रही है, उनकी भी मशीनें खराब पड़ी है। यही कारण है कि महिला मरीजों को इस स्क्रीनिंग के लिए भटकना पड़ रहा है। सिटी के निजी सेंटरों में जाकर अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है या फिर चंडीगढ़ पीजीआई का चक्कर काटना पड़ता है।
महिलाओं में सबसे ज्यादा पाया जाता है स्तन कैंसर
अटल कैंसर केयर केंद्र व कैंट नागरिक अस्पताल की महिला ओपीडी में सबसे ज्यादा महिलाएं स्तन कैंसर से पीड़ित पाई जाती है। हालांकि अधिकतर महिलाओं का उपचार पहली व दूसरी स्टेज पर दवाओं से ठीक किया जाता है। स्थिति बिगड़ने पर ही ऑपरेशन की नौबत आती है। महिलाओं द्वारा स्तन में गांठ को अनदेखा किए जाने पर स्तन कैंसर बढ़ता जाता है। निजी अस्पतालों में इसका करीब ढाई से तीन हजार रुपये खर्च आता है तो कैंट के नागरिक अस्पताल में यह नि:शुल्क है। हर माह कैंट के नागरिक अस्पताल में 70 के करीब मैमोग्राफी हो जाती है।
मेमोग्राफी में छोटी से छोटी गांठ का चल जाता है पता
मेमोग्राफी टेस्ट से ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षणों का पता लगाया जाता है। स्क्रीनिंग मेमोग्राफी के जरिये छोटी से छोटी गांठ का पता चल जाता है। यदि कैंसर की शुरुआती अवस्था और गांठ बहुत छोटी है तो स्क्रीनिंग के जरिये दिख जाता है। ऐसे में शुरुआती चरण में ही बीमारी का पता चलने से महिला रोगी को समय पर उपचार मिल पाएगा।
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मेमोग्राफी की मशीन ठीक है लेकिन टेक्नीशियन छोड़कर चला गया है। सिविल सर्जन कार्यालय में पत्र भेजकर नए टेक्नीशियन की भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि मरीजों को परेशानी न आए।
- डॉक्टर जितेंद्र, आरएमओ, कैंट का नागरिक अस्पताल
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अंबाला। स्तन कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए कैंट के नागरिक अस्पताल में पड़ी लाखों रुपये की मेमोग्राफी मशीन बिना टेक्नीशियन के पिछले 15 दिन से धूल फांक रही है। इस कारण अटल कैंसर केयर केंद्र की ओपीडी में हरियाणा सहित आसपास के राज्यों व महिला ओपीडी में आने वाली महिला मरीजों के लिए परेशानी बढ़ गई है। एक ओर इन महिला मरीजों को कैंट के नागरिक अस्पताल में पिछले 15 दिन से टेक्नीशियन के काम छोड़ने की बात बोलकर लौटाया जा रहा है, वहीं मरीजों के लिए सबसे बड़ी आफत निजी सेंटरों व रोटरी अस्पताल द्वारा हाथ खड़े किए जाने के कारण हो रही है, उनकी भी मशीनें खराब पड़ी है। यही कारण है कि महिला मरीजों को इस स्क्रीनिंग के लिए भटकना पड़ रहा है। सिटी के निजी सेंटरों में जाकर अपनी जेब ढीली करनी पड़ रही है या फिर चंडीगढ़ पीजीआई का चक्कर काटना पड़ता है।
महिलाओं में सबसे ज्यादा पाया जाता है स्तन कैंसर
अटल कैंसर केयर केंद्र व कैंट नागरिक अस्पताल की महिला ओपीडी में सबसे ज्यादा महिलाएं स्तन कैंसर से पीड़ित पाई जाती है। हालांकि अधिकतर महिलाओं का उपचार पहली व दूसरी स्टेज पर दवाओं से ठीक किया जाता है। स्थिति बिगड़ने पर ही ऑपरेशन की नौबत आती है। महिलाओं द्वारा स्तन में गांठ को अनदेखा किए जाने पर स्तन कैंसर बढ़ता जाता है। निजी अस्पतालों में इसका करीब ढाई से तीन हजार रुपये खर्च आता है तो कैंट के नागरिक अस्पताल में यह नि:शुल्क है। हर माह कैंट के नागरिक अस्पताल में 70 के करीब मैमोग्राफी हो जाती है।
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मेमोग्राफी में छोटी से छोटी गांठ का चल जाता है पता
मेमोग्राफी टेस्ट से ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षणों का पता लगाया जाता है। स्क्रीनिंग मेमोग्राफी के जरिये छोटी से छोटी गांठ का पता चल जाता है। यदि कैंसर की शुरुआती अवस्था और गांठ बहुत छोटी है तो स्क्रीनिंग के जरिये दिख जाता है। ऐसे में शुरुआती चरण में ही बीमारी का पता चलने से महिला रोगी को समय पर उपचार मिल पाएगा।
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मेमोग्राफी की मशीन ठीक है लेकिन टेक्नीशियन छोड़कर चला गया है। सिविल सर्जन कार्यालय में पत्र भेजकर नए टेक्नीशियन की भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि मरीजों को परेशानी न आए।
- डॉक्टर जितेंद्र, आरएमओ, कैंट का नागरिक अस्पताल

अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल में मैमोग्राफी के कमरे पर जड़ा ताला: संवाद