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महाकाली शिव मंदिर : मन्नत पूरी होने पर लोग लगाते हैं भंडारा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 17 Sep 2024 12:38 AM IST
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Mahakali Shiv Temple: People organize a feast when their wish is fulfilled
नारायणगढ़। उप मंडल के लखनौरा गांव में स्थित प्राचीन महाकाली शिव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इस मंदिर में दूर-दूर से भक्तजन आकर पूजा अर्चना करते हैं। अंधेरी गांव के माड़ू राम और प्राचीन महाकाली शिव मंदिर कमेटी के प्रधान दलमीर सिंह ने बताया कि शनिवार के दिन यहां पर भक्तों की लंबी कतारें लगती हैं। मंदिर परिसर में एक बरगद का पेड़ भी है, जिसकी शाखाएं लगभग एक एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली हुई हैं।
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उन्होंने बताया कि बुजुर्ग बताते हैं, कि यह बरगद का पेड़ महाभारत काल का है। इस पेड़ से भी लोगों की आस्था जुड़ी है। लोगों का कहना है कि दंत कथाओं के अनुसार और बुजुर्गों के कहे अनुसार एक संत मां काली की ज्योत लेकर यहां से गुजर रहे थे और बरगद के वृक्ष के नीचे विश्राम करने के लिए रुक गए। जब वे यहां से गए तब वे ज्योत को तो अपने साथ ले गए और माता यहीं पर विराजमान हो गईं।
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मंदिर परिसर क्षेत्र में ही सिद्ध पुरुष संत किशन नाथ बाबा की समाधि भी बनी हुई है। संत बाबा किशन नाथ की कृपा दृष्टि गांव लखनौरा और अंधेरी में सदैव रही है, ग्रामीणों की मान्यता है कि दोनों गांवों पर माता का पहरा होने और उन्हीं कि दया दृष्टि से प्राकृतिक आपदा से बचाव हुआ और फसलों और ग्राम वासियों पर सदैव बाबा किशन नाथ की कृपा दृष्टि बनी रही है। बाबा की समाधी पर श्रद्धालु माथा टेकर अपनी मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद बाबा से प्राप्त करते हैं।
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मंदिर की देखरेख के लिए कमेटी के प्रधान दलमीर सिंह है। उन्होंने बताया कि मंदिर में दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के क्षेत्र से लोग पूजा अर्चना करने आते हैं।
उन्होंने कहा कि साल में एक बार मंदिर कमेटी की ओर से जागरण का आयोजन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु जाकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इसके अलावा मनोकामनाएं पूरी हो जाती है तो श्रद्धालु यहां पर भंडारा लगाने आते हैं। भंडारे का आयोजन बुकिंग के आधार पर होता है और कई बार तो श्रद्धालुओं को इसके लिए महीनों का इंतजार भी करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि मंदिर कमेटी और अंधेरी तथा लखनौरा गांववासियों का सदैव यह प्रयास रहता है कि इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को वे सभी सुविधा उपलब्ध हो। मंदिर की लगभग दो एकड़ भूमि में बाग लगाया गया है, जिसमें फलदार पौधे लगाए गए हैं। मंदिर परिसर में सीसीटीवी लगाने के साथ ही पेयजल की बेहतर व्यवस्था की गई है।
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