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भगवान विष्णु जी ने त्रेतायुग व सतयुग में भक्तों के बीच रहकर ही अपनी लीलाओं के माध्यम से लोगों का किया मार्गदर्शन - आचार्य चैतन्य

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 12 Jun 2022 01:48 AM IST
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Lord Vishnu guided by Leelas
अंबाला सिटी मानव चौक स्थित श्री गोपीनाथ मंदिर एवं सत्संग भवन चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत अमर कथा के सातवें दिन श्रीमद् भागवत कथा के प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए आचार्य सनातन चैतन्य महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने द्वारिका में कई प्रकार की लीलाएं की थी। जिस प्रकार सतयुग में भगवान विष्णु की पत्नी माता लक्ष्मी जोकि समुद्र से उत्पन्न हुई थी और त्रेतायुग में वही विष्णु भगवान श्रीराम बनकर अवतार लेते हैं और और लक्ष्मी मां सीता बनकर पृथ्वी से उत्पन्न होती हैं। द्वापर में वही भगवान विष्णु श्रीकृष्ण बनकर मथुरा में जन्म लेते हैं और उस समय मां लक्ष्मी रुक्मिणी बनकर यज्ञ से उत्पन्न होती हैं।
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श्रीमद् भागवत के अठारह हजार श्लोकों में राधा जी का नाम उल्लेख नही हैं। श्री राधा जी भगवान श्रीकृष्ण की आह्लादिनी शक्ति है कृष्ण ही राधा है और राधा ही श्रीकृष्ण है यह दोनों ही एक है। आचार्य सनातन चैतन्य माहाराज ने कहा की श्रीराधा जी शुकदेव मुनि के गुरु थे पूर्व में श्रीराधा जी ने शुकदेव मुनि जो तोते के रुप में थे, तब राधाजी ने उन्हें श्रीकृष्ण नाम की दीक्षा प्रदान करवाई थी। राजा परीक्षित को ऋषि का श्रॉप मिला हुआ है कि सातवें दिन तक्षक नाग के डंसने से मृत्यु होगी। श्री शुकदेव मुनि विचारते हैं कि कहीं मैं श्री गुरु राधाजी का नाम स्मरण करु और अगर समाधी लग गई तो बिचारे परीक्षित का क्या होगा। इसलिए श्री शुकदेव जी गुरु का नाम नहीं लेते हैं। इसलिए भागवत में श्री राधाजी का नाम नहीं है। इसी प्रकार कथा आगे चली।
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कथा के अंत में आयोजक समिति के विनोद दास वैष्णव ने कथा व्यास आचार्य चैतन्य महाराज का भागवत पाठी पंडित रविन्द्र नाथ तिवारी, साध्वी रमा शास्त्री, कोमल महाराज, रामबिहारी मिश्रा, सत्यदेव गौड़, प्रेमनाथ मिश्रा, गोपीनाथ मंदिर कमेटी सदस्य व पूर्वांचल पूजा समिति के सभी सदस्यों ने भव्य स्वागत करते हुए अभार व्यक्त किया गया। तत्पश्चात भागवत भगवान की आरती की गई व प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर समिति के सदस्यों ने बताया कि रविवार को सुबह 10 बजे यज्ञ हवन, गीता प्रवचन, तुलसी वर्षा और संतों का आशीर्वाद वचन होगा। कार्यक्रम के समापन पर दोपहर के समय विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
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