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लोकल कमिश्नर के सामने भिड़े याची, दुकानदार और निगम अफसर
अंबाला /अमर उजाला/ ब्यूरो
Updated Sun, 27 Sep 2015 12:53 AM IST
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अंबाला कैंट के तमाम बाजारों से अवैध कब्जे हटाए जाने के मामले में म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला (एमसीए) गंभीरता से हाईकोर्ट के आदेशों की पालना नहीं कर रहा है। इसके चलते याची के आग्रह पर हाईकोर्ट ने इस मामले में हाईकोर्ट के एडवोकेट आदित्य जैन को बतौर लोकल कमिश्नर बनाकर अंबाला कैंट भेजा।
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शनिवार को ये लोकल कमिश्नर अंबाला कैंट पहुंचे और अवैध कब्जों का जायजा लिया। इस दौरान हाईकोर्ट में इस बाबत जनहित याचिका डालने वाले याची एडवोकेट एसकेएस बेदी भी उनके साथ मौजूद रहे। जैसे ही लोकल कमिश्नर ने याची के साथ अपना दौरा शुरू किया, तो बाजारों में हड़कंप मच गया।
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विभिन्न बाजारों में दुकानदार एकत्रित हो गए और पहले तो बाजार में ही और फिर बाद में रेस्ट हाउस में आकर याची से भिड़ गए और हंगामा करने लगे। इस दौरान याची और दुकानदारों के बीच तीखी बहस हुई। जबकि याची ने खुलकर एमसीए अफसरों की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़ा कर दिए। अंत में लोकल कमिश्नर ने तमाम बाजारों में अवैध कब्जों का जायजा लिया, रेस्ट हाउस में दुकानदार, याची और नगर निगम अफसरों की बात भी सुनी और रवाना हो गए। लोकल कमिश्नर अब 15 अक्तूबर को हाईकोर्ट में इस सर्वे रिपोर्ट को हाईकोर्ट के समक्ष रखेंगे।
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एमसीए की कार्यप्रणाली से नाखुश दिखे लोकल कमिश्नर
लोकल कमिश्नर ने ईदगाह रोड पर अवैध कब्जों का जायजा लिया। उन्होंने देखा कि अभी तक सड़कों व नालों पर पक्के अवैध कब्जे काबिज है। एमसीए की कार्रवाई के बावजूद अवैध कब्जेधारियों के हौसले पूरी तरह से बुलंद है। इतना ही बाजारों में अतिक्रमण का हालात भी बहुत ज्यादा खराब है। दुकानदार पक्के कब्जों के बावजूद पांच से पंद्रह फीट तक सड़कों पर भी काबिज है। जबकि ईदगाह रोड पर एमसीए ने जो अवैध कब्जे हटाए थे, वो फिर से काबिज हो गए हैं। इस सारी स्थिति को देखने के बाद अब लोकल कमिश्नर अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे। इस दौरान एमसीए कर्मी व अफसर भी लोकल कमिश्नर को वो साइट दिखाते रहे, जहां-जहां से उन्होंने कब्जा हटाया है।
रेस्ट हाउस में दुकानदारों का हंगामा
सर्वे करने के बाद लोकल कमिश्नर, याची और एमसीए अफसरों की रेस्ट हाउस कैंट में बातचीत चल रही थी। लेकिन तभी दुकानदार भी वहां रेस्ट हाउस में पहुंच गए और देखते ही देखते याची से भिड़ गए। याची एडवोकेट एसकेएस बेदी की दुकानदारों से तीखी बहस हुई। दुकानदारों ने याची पर अपनी जमकर भड़ास निकाली। लेकिन याची दुकानदारों से बार-बार पक्के कब्जे खुद ही हटाए जाने का आग्रह करते रहे।
याची ने लोकल कमिश्नर के सामने ही साफ कहा कि पक्के कब्जे करवाने में एमसीए कर्मियों, अफसरों व कुछ राजनीतिज्ञों का हाथ है, जिसका खामियाजा आज जाम और जलभराव के रूप में जनता भुगत रही है। याची एडवोकेट बेदी ने कहा कि यदि समय पर एमसीए कर्मी इन पक्के कब्जों को हटा देते तो आज बाजार, कॉलोनियों व मोहल्लों में लोगों को जाम की समस्या न झेलनी पड़ती, बल्कि बरसाती पानी की वजह से जलभराव भी ज्यादा देर तक न होता।
अभी भी कई जगह है अतिक्रमण
उधर, लोकल कमिश्नर एडवोकेट आदित्य जैन ने कहा कि सर्वे में उन्होंने देखा है कि एमसीए ने कब्जे हटाने में काम जरूर किया है, लेकिन कई जगह अभी तक पक्के कब्जे काबिज है। सभी जगह से कब्जे व अतिक्रमण नहीं हटाया गया है। वे इस बारे में हाईकोर्ट में रिपोर्ट बनाकर देंगे। उनके अनुसार धार्मिक स्थलों व स्कूलों तक ने पक्के अवैध कब्जे कर रखे हैं। खोखे तक नहीं हटाए गए हैं।
ये है मामला
वर्ष 2010 में एडवोकेट एसकेएस बेदी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाकर अंबाला कैंट के बाजारों से पक्के अवैध कब्जे हटवाने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने इस बारे में एमसीए को कब्जा हटवाने के आदेश दिए थे। लेकिन उसके बावजूद बाजारों से कब्जे नहीं हटाए गए। याची ने कोर्ट में अवमानना याचिका लगाई। हाईकोर्ट ने इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए एमसीए अफसरों को जल्द कब्जे हटाकर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था।
लेकिन अब याची ने फिर से कोर्ट में अर्जी लगाकर कहा है कि हाईकोर्ट के बार-बार कहने पर भी एमसीए कर्मी कब्जा नहीं हटा रहे हैं। इस पर हाईकोर्ट ने एक लोकल कमिश्नर को ये देखने के लिए नियुक्त किया है कि क्या वाकई बाजारों से कब्जे हट चुके हैं या नहीं? लोकल कमिश्नर इस बाबत अब हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट देगा।