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भगवान के नाम का भक्तिमय रस पीने से जीवन कभी नीरस नहीं होता : स्वामी ज्ञानानंद महाराज
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अंबाला सिटी। सेक्टर आठ स्थित श्री कृष्ण कृपा गीता मंदिर में रविवार को सत्संग समारोह का आयोजन हुआ। इसमें गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने प्रवचनों में कहा कि भजन भाव का एक अलग ही आनंद होता है। भजन के रस की महिमा का गुणगान करते हुए महाराज ने बताया कि रस कई प्रकार के होते हैं। यदि जीव को भगवान के नाम का रस पीना आ जाए तो उसका जीवन कभी नीरस नहीं होता।
इस भक्तिमय रस को लेने में कोई खर्च नहीं, कोई मेहनत नहीं करनी लगती, फिर भी इंसान इस नाम रस को आसानी से नहीं ले रहा है। स्वाद के लिए खाया गया मीठा पदार्थ जीभ को अच्छा लगता है, लेकिन जैसे ही वह शरीर के भीतर प्रवेश करता है तो शरीर के लिए हानिकारक साबित होता है। भगवान के नाम का रस जो हमारी वाणी और कानों द्वारा श्रवण किया जाता है, वह जब जीव के भीतर जाता है तो उसके लिए कल्याणकारी साबित होता है। वह अंर्तमन को छू जाता है। इससे जीव का जीवन महक उठता है।
उन्होंनेे कहा कि नाम रस विलक्षण रस है। यह नीरसता को दूर करता है। जीव को नियमित रूप से यज्ञ भाव के गीता मंत्रों का पाठ और हवन-यज्ञ अवश्य करना चाहिए। इस अवसर पर कपिल बंधुओं की ओर से भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी गई। जो इस दरबार में अर्जी तेरी मंजूर हो जाए तो गुनाहों का समुंदर तुझसे कोसों दूर हो जाए व तेरा दरबार सांवरा, जहां से न्यारा जिसने ध्याया उसने पाया तेरा सहारा और पवन गुंबर द्वारा गाए भजनों ने श्रोताओं का मन मोह लिया। इस अवसर पर राजू चावला, अशोक चावला, दिनेश ग्रोवर, केवल चावला, सतीश कपूर, सतीश चावला, रमेश सचदेवा, भारत भूषण बत्तरा, शाम जुनेजा, मुकेश कालड़ा उपस्थित रहे।
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इस भक्तिमय रस को लेने में कोई खर्च नहीं, कोई मेहनत नहीं करनी लगती, फिर भी इंसान इस नाम रस को आसानी से नहीं ले रहा है। स्वाद के लिए खाया गया मीठा पदार्थ जीभ को अच्छा लगता है, लेकिन जैसे ही वह शरीर के भीतर प्रवेश करता है तो शरीर के लिए हानिकारक साबित होता है। भगवान के नाम का रस जो हमारी वाणी और कानों द्वारा श्रवण किया जाता है, वह जब जीव के भीतर जाता है तो उसके लिए कल्याणकारी साबित होता है। वह अंर्तमन को छू जाता है। इससे जीव का जीवन महक उठता है।
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उन्होंनेे कहा कि नाम रस विलक्षण रस है। यह नीरसता को दूर करता है। जीव को नियमित रूप से यज्ञ भाव के गीता मंत्रों का पाठ और हवन-यज्ञ अवश्य करना चाहिए। इस अवसर पर कपिल बंधुओं की ओर से भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी गई। जो इस दरबार में अर्जी तेरी मंजूर हो जाए तो गुनाहों का समुंदर तुझसे कोसों दूर हो जाए व तेरा दरबार सांवरा, जहां से न्यारा जिसने ध्याया उसने पाया तेरा सहारा और पवन गुंबर द्वारा गाए भजनों ने श्रोताओं का मन मोह लिया। इस अवसर पर राजू चावला, अशोक चावला, दिनेश ग्रोवर, केवल चावला, सतीश कपूर, सतीश चावला, रमेश सचदेवा, भारत भूषण बत्तरा, शाम जुनेजा, मुकेश कालड़ा उपस्थित रहे।
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