{"_id":"64a1dfd6cdc259568701ef6c","slug":"life-is-incomplete-without-spirituality-swami-gyananand-ambala-news-c-36-1-sknl1001-6185-2023-07-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"अध्यात्म के बिना अधूरा है जीवन : स्वामी ज्ञानानंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अध्यात्म के बिना अधूरा है जीवन : स्वामी ज्ञानानंद
विज्ञापन
अंबाला सिटी। व्यास पूर्णिमा के पावन अवसर पर रविवार को अंबाला सिटी के सेक्टर-8 स्थित श्रीकृष्ण कृपा गीता मंदिर में प्रवचन हुए। महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को व्यास पूर्णिमा के प्रंसग पर कहा कि व्यास एक नाम ही नहीं बल्कि एक परंपरा है। व्यास एक तत्व है जहां से हमें चार वेद मिले, जिनके द्वारा सब शास्त्र निर्मित हैं। उन्होंने कहा कि अध्यात्म के बिना यह जीवन अधूरा है।
उन्होंने कहा कि सारे पुराण भी व्यास ऋषि जी की ही रचना हैं। महाराज ने कहा कि महाभारत ग्रंथ में एक लाख श्लोक हैं। वह सब भी वेद व्यास ऋषि के द्वारा ही रचित हैं। श्रीमद्भागवत गीता भी हमें इन्हीं ऋषि की कृपा से मिली है। अध्यात्म ज्ञान के पुरोधा महर्षि व्यास गुरुओं के भी गुरु मानें जाते हैं। बिना अध्यात्म के यह जीवन अधूरा है। जहां से यही प्रेरणा मिलती है कि उस तत्व का नाम ही गुरु है। हजारों में कोई एक होता है जो इस मार्ग पर चलता है। उन्होंने कहा कि जीव को जो प्रेरणा अंदर से जगाती है कि भगवान का पाठ कर लो वह प्रेरणा उसे गुरु से ही मिलती है।
जीव के जीवन में अगर गुरु न आए होते तो यह जीवन कैसा होता। उन्होंने कहा कि जिस आसन पर बैठकर सत्संग होता है उसको हम व्यास पीठ कहते हैं। कथा वाचक इस आसन को प्रणाम करके बैठते हैं। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि व्यास पीठ एक मर्यादा है। हमारी परंपरा तो यह है कि हम जब मकान बनवाते हैं, तो सबसे पहले उस राज मिस्त्री के हाथ में जो हथौड़ी व करनी होती है, उसको भी कलेवा बांधते हैं। अर्थात उसका सम्मान करते हैं। हिन्दू सनातन संस्कृति में जहां से कुछ मिलता है उसके प्रति हम सम्मान का भाव रखते हैं। इस अवसर पर पवन गुम्बर व रसिक रतन तथा श्रीकृष्ण कृपा महिला संकीर्तन मंडल लुधियाना व पठानकोट की भजन मंडलियों द्वारा गाए भजनों ने श्रोताओं का मन मोह लिया। श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदर्शन अग्रवाल, अशोक चावला, दिनेश ग्रोवर, राजू चावला, जगदीश सचदेवा, हैप्पी चावला, मनमोहन कपूर, सतीश चावला, सतीश कपूर, पवन चावला, मोनू चावला सत्संग आदि ने सत्संग में व्यवस्था बनाए रखने में अपना विशेष योगदान दिया। सत्संग के समापन पर विशाल भंडारा लगाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि सारे पुराण भी व्यास ऋषि जी की ही रचना हैं। महाराज ने कहा कि महाभारत ग्रंथ में एक लाख श्लोक हैं। वह सब भी वेद व्यास ऋषि के द्वारा ही रचित हैं। श्रीमद्भागवत गीता भी हमें इन्हीं ऋषि की कृपा से मिली है। अध्यात्म ज्ञान के पुरोधा महर्षि व्यास गुरुओं के भी गुरु मानें जाते हैं। बिना अध्यात्म के यह जीवन अधूरा है। जहां से यही प्रेरणा मिलती है कि उस तत्व का नाम ही गुरु है। हजारों में कोई एक होता है जो इस मार्ग पर चलता है। उन्होंने कहा कि जीव को जो प्रेरणा अंदर से जगाती है कि भगवान का पाठ कर लो वह प्रेरणा उसे गुरु से ही मिलती है।
विज्ञापन
जीव के जीवन में अगर गुरु न आए होते तो यह जीवन कैसा होता। उन्होंने कहा कि जिस आसन पर बैठकर सत्संग होता है उसको हम व्यास पीठ कहते हैं। कथा वाचक इस आसन को प्रणाम करके बैठते हैं। स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि व्यास पीठ एक मर्यादा है। हमारी परंपरा तो यह है कि हम जब मकान बनवाते हैं, तो सबसे पहले उस राज मिस्त्री के हाथ में जो हथौड़ी व करनी होती है, उसको भी कलेवा बांधते हैं। अर्थात उसका सम्मान करते हैं। हिन्दू सनातन संस्कृति में जहां से कुछ मिलता है उसके प्रति हम सम्मान का भाव रखते हैं। इस अवसर पर पवन गुम्बर व रसिक रतन तथा श्रीकृष्ण कृपा महिला संकीर्तन मंडल लुधियाना व पठानकोट की भजन मंडलियों द्वारा गाए भजनों ने श्रोताओं का मन मोह लिया। श्रीकृष्ण कृपा सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुदर्शन अग्रवाल, अशोक चावला, दिनेश ग्रोवर, राजू चावला, जगदीश सचदेवा, हैप्पी चावला, मनमोहन कपूर, सतीश चावला, सतीश कपूर, पवन चावला, मोनू चावला सत्संग आदि ने सत्संग में व्यवस्था बनाए रखने में अपना विशेष योगदान दिया। सत्संग के समापन पर विशाल भंडारा लगाया गया।
विज्ञापन