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लाखों देकर भी पानी नसीब नहीं
अंबाला
Updated Mon, 30 Sep 2013 12:02 AM IST
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सेना क्षेत्र को नहरी पानी की सप्लाई करने को लेकर सेना की ही दो विंग
कैंटोनमेंट बोर्ड और मिलिटरी इंजीनियरिंग सर्विस (एमईएस) आमने-सामने हैं।
नहरी पानी के लिए कैंटोनमेंट बोर्ड जहां पिछले करीब 25 सालों से इंतजार कर रहा है, वहीं एमईएस अफसर लगातार बोर्ड अफसरों व बोर्ड सदस्यों को आश्वासन देकर टरका देते हैं।
मगर अब कैंटोनमेंट बोर्ड की सीईओ, बोर्ड के वाइस प्रेजीडेंट व बोर्ड सदस्यों ने इस बारे में सब एरिया हेडक्वार्टर के आर्मी कमांडर को शिकायत भेजी है। बोर्ड सदस्यों का कहना है कि या तो पूरे सैन्य क्षेत्र को एमईएस नहरी पानी मुहैय्या करवाए, या फिर ये राशि ब्याज समेत वापस कैंटोनमेंट बोर्ड को दे दें।
यह थी योजना
पूरे सैन्य क्षेत्र में लोगों को पानी की सप्लाई करने के लिए एमईएस ने एक विशेष नहरी पानी योजना बनाई। इस योजना के तहत नरवाना ब्रांच का पानी सैन्य क्षेत्र तक लाकर स्टोर करना और फिर पूरे सैन्य क्षेत्र में इसकी सप्लाई करना है।
यह योजना इसलिए बनाई गई क्योंकि सैन्य क्षेत्र में बरसों पुराने लगे ट्यूबवेल धीरे-धीरे जवाब देने लगे थे। इसी के चलते एमईएस ने कैंटोनमेंट बोर्ड से भी आग्रह किया कि यदि वे भी इस प्रोजेक्ट बजट में हिस्सा डालता है, तो बोर्ड के अंतर्गत पूरे हिस्से में भी नहरी पानी की सप्लाई दी जाएगी। लिहाजा करीब 25 साल पहले बोर्ड ने 35 लाख एमईएस को नहरी पानी के लिए दिए।
लेकिन इसकी एवज में कैंटोनमेंट बोर्ड के सभी इलाके को आज तक पानी नहीं मिला।
बड़ी मुश्किल से दी थी राशि
करीबन 25 साल पहले जब ये राशि कैंटोनमेंट बोर्ड ने एमईएस को दी थी जो बोर्ड के माली हालात बहुत ही नाजुक थे। उस वक्त बोर्ड का कुल वित्तीय बजट ही 89 लाख था। जबकि इस वर्ष में बजट 9.27 करोड़ है।
इस स्थिति से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुल 89 लाख के वित्तीय बजट में से कैसे 35 लाख रुपये निकालकर एमईएस को दिए होंगे और कैसे पूरा वित्त वर्ष चलाया होगा। लेकिन उसके बदले में पूरे बोर्ड को अभी तक नहरी पानी नसीब नहीं हुआ।
बहुत जरूरी है नहरी पानी
कैंटोनमेंट बोर्ड के पूरे क्षेत्र में नहरी पानी जरूरी है। क्योंकि बोर्ड ट्यूबवेल के पानी की सप्लाई लोगों को करता है और बरसों पुराने ट्यूबवेल ठप होने लगे हैं।
अब इस वक्त एक ट्यूबवेल लगाने का खर्च ही बोर्ड को 15 से 20 लाख पड़ जाता है। इसलिए बोर्ड चाहता है कि एमईएस अपना वायदा निभाए और नहरी पानी पूरे बोर्ड क्षेत्र को उपलब्ध करवाए।
25 साल पहले जो 35 लाख दिए थे। यह बोर्ड अफसरों व सदस्यों को ही मालूम है, कितनी मुश्किल से ये राशि अदा की थी। एफडी भी बैंक में साढ़े छह साल बाद दोगुनी हो जाती है। लेकिन एमईएस ने न तो नहरी पानी दिया और न ही लाखों रुपये वापस किए। इसलिए आर्मी कमांडर से एमईएस की शिकायत की है, उन्होंने इस बारे में एमईएस से बात करने जल्द पानी दिलवाने का आश्वासन दिया है।
-वीरेंद्र कुमार, वाइस प्रेसिडेंट, कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला-
नहरी पानी के लिए कैंटोनमेंट बोर्ड जहां पिछले करीब 25 सालों से इंतजार कर रहा है, वहीं एमईएस अफसर लगातार बोर्ड अफसरों व बोर्ड सदस्यों को आश्वासन देकर टरका देते हैं।
मगर अब कैंटोनमेंट बोर्ड की सीईओ, बोर्ड के वाइस प्रेजीडेंट व बोर्ड सदस्यों ने इस बारे में सब एरिया हेडक्वार्टर के आर्मी कमांडर को शिकायत भेजी है। बोर्ड सदस्यों का कहना है कि या तो पूरे सैन्य क्षेत्र को एमईएस नहरी पानी मुहैय्या करवाए, या फिर ये राशि ब्याज समेत वापस कैंटोनमेंट बोर्ड को दे दें।
यह थी योजना
पूरे सैन्य क्षेत्र में लोगों को पानी की सप्लाई करने के लिए एमईएस ने एक विशेष नहरी पानी योजना बनाई। इस योजना के तहत नरवाना ब्रांच का पानी सैन्य क्षेत्र तक लाकर स्टोर करना और फिर पूरे सैन्य क्षेत्र में इसकी सप्लाई करना है।
यह योजना इसलिए बनाई गई क्योंकि सैन्य क्षेत्र में बरसों पुराने लगे ट्यूबवेल धीरे-धीरे जवाब देने लगे थे। इसी के चलते एमईएस ने कैंटोनमेंट बोर्ड से भी आग्रह किया कि यदि वे भी इस प्रोजेक्ट बजट में हिस्सा डालता है, तो बोर्ड के अंतर्गत पूरे हिस्से में भी नहरी पानी की सप्लाई दी जाएगी। लिहाजा करीब 25 साल पहले बोर्ड ने 35 लाख एमईएस को नहरी पानी के लिए दिए।
लेकिन इसकी एवज में कैंटोनमेंट बोर्ड के सभी इलाके को आज तक पानी नहीं मिला।
बड़ी मुश्किल से दी थी राशि
करीबन 25 साल पहले जब ये राशि कैंटोनमेंट बोर्ड ने एमईएस को दी थी जो बोर्ड के माली हालात बहुत ही नाजुक थे। उस वक्त बोर्ड का कुल वित्तीय बजट ही 89 लाख था। जबकि इस वर्ष में बजट 9.27 करोड़ है।
इस स्थिति से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कुल 89 लाख के वित्तीय बजट में से कैसे 35 लाख रुपये निकालकर एमईएस को दिए होंगे और कैसे पूरा वित्त वर्ष चलाया होगा। लेकिन उसके बदले में पूरे बोर्ड को अभी तक नहरी पानी नसीब नहीं हुआ।
बहुत जरूरी है नहरी पानी
कैंटोनमेंट बोर्ड के पूरे क्षेत्र में नहरी पानी जरूरी है। क्योंकि बोर्ड ट्यूबवेल के पानी की सप्लाई लोगों को करता है और बरसों पुराने ट्यूबवेल ठप होने लगे हैं।
अब इस वक्त एक ट्यूबवेल लगाने का खर्च ही बोर्ड को 15 से 20 लाख पड़ जाता है। इसलिए बोर्ड चाहता है कि एमईएस अपना वायदा निभाए और नहरी पानी पूरे बोर्ड क्षेत्र को उपलब्ध करवाए।
25 साल पहले जो 35 लाख दिए थे। यह बोर्ड अफसरों व सदस्यों को ही मालूम है, कितनी मुश्किल से ये राशि अदा की थी। एफडी भी बैंक में साढ़े छह साल बाद दोगुनी हो जाती है। लेकिन एमईएस ने न तो नहरी पानी दिया और न ही लाखों रुपये वापस किए। इसलिए आर्मी कमांडर से एमईएस की शिकायत की है, उन्होंने इस बारे में एमईएस से बात करने जल्द पानी दिलवाने का आश्वासन दिया है।
-वीरेंद्र कुमार, वाइस प्रेसिडेंट, कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला-