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Ambala News: कालू माजरा में नहीं मूलभूत सुविधाएं
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अंबाला सिटी में नगर निगम के अधीन कालू माजरा गांव में गंदगी व जोहड़ के हालात। संवाद
- फोटो : आंख अस्पताल में यही होंगी निशुल्क जांचे।
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। छह साल पहले अंबाला सिटी के 11 गांव नगर निगम में शामिल हुए थे लेकिन ये अब तक मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। इनमें निजामपुर, घेलकलां, घेलखुर्द, डंगडेहरी, लिहारसा, लोहगढ़, मानकपुर, देवीनगर और डडियाना सहित कालू माजरा गांव शामिल हैं। इनमें से कालू माजरा ऐसा गांव है जो सबसे छोटा है, यहां मात्र 50 के करीब घर हैं और आबादी भी दो से तीन हजार के बीच है।
इन गांवों को नगर निगम ने कागजों में तो अपने खाते में शामिल कर लिया, लेकिन आज भी यहां मूलभूत सुविधाओं की काफी कमी है। न तो पानी निकासी की उचित व्यवस्था है और न ही सड़कें, जबकि सीवर का तो नाम निशान ही नहीं हैं।
लोग गंदगी भरे माहौल में जीने को मजबूर हैं। नालियों में आज भी गंदा पानी बहता है जो गांव में मौजूद जोहड़ों में समाता है और यहां से हमेशा ग्रामीणों को बदबू आती रहती है। कालू माजरा गांव के लोगों ने बताया कि लोग मेहनत-मजदूरी करने वाले हैं। सुबह जाकर शाम को घर वापस आते हैं और जो कुछ लोग घर में अपना काम धंधा करते हैं, उन्हें सारा दिन बिताना मुश्किल हो जाता है हालांकि गांव में एक ट्यूबवेल भी है। इससे ग्रामीणों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता।
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अंबाला। छह साल पहले अंबाला सिटी के 11 गांव नगर निगम में शामिल हुए थे लेकिन ये अब तक मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। इनमें निजामपुर, घेलकलां, घेलखुर्द, डंगडेहरी, लिहारसा, लोहगढ़, मानकपुर, देवीनगर और डडियाना सहित कालू माजरा गांव शामिल हैं। इनमें से कालू माजरा ऐसा गांव है जो सबसे छोटा है, यहां मात्र 50 के करीब घर हैं और आबादी भी दो से तीन हजार के बीच है।
इन गांवों को नगर निगम ने कागजों में तो अपने खाते में शामिल कर लिया, लेकिन आज भी यहां मूलभूत सुविधाओं की काफी कमी है। न तो पानी निकासी की उचित व्यवस्था है और न ही सड़कें, जबकि सीवर का तो नाम निशान ही नहीं हैं।
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लोग गंदगी भरे माहौल में जीने को मजबूर हैं। नालियों में आज भी गंदा पानी बहता है जो गांव में मौजूद जोहड़ों में समाता है और यहां से हमेशा ग्रामीणों को बदबू आती रहती है। कालू माजरा गांव के लोगों ने बताया कि लोग मेहनत-मजदूरी करने वाले हैं। सुबह जाकर शाम को घर वापस आते हैं और जो कुछ लोग घर में अपना काम धंधा करते हैं, उन्हें सारा दिन बिताना मुश्किल हो जाता है हालांकि गांव में एक ट्यूबवेल भी है। इससे ग्रामीणों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता।
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