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काकरू डंपिंग साइट : प्रदूषित हो सकता है भूमिगत जल
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काकरू प्लांट में पड़ा हुआ कचरा। आर्काइव
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। काकरू डंपिंग साइट को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के नियमों की अवहेलना होने के आरोप पहले ही लगते रहे हैं। वहीं, नगर निगम इन आरोपों को नकारते हुए हमेशा ही कहता रहा है कि यह उसका कचरा संग्रहण केंद्र है।
मगर 25 अक्तूबर को हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान यह उजागर हो गया कि यहां पर कचरा डंप किया जा रहा है। 25 अक्तूबर को ही कोर्ट के सामने सुबह की साइट की फोटो के साथ साक्ष्य भी प्रस्तुत कर दिया गया।
ऐसे में यह स्पष्ट हो गया है कि नगर निगम जिस साइट को सेकेंडरी साइट बोलता रहा वहां से तो असल में कचरा उठ ही नहीं रहा है। अगर कचरा नहीं उठ रहा है तो बारिश के दिनों में कचरे के भीगने से दूषित जल भूमि में भी जा रहा होगा।
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ऐसे में काकरू डंपिंग साइट पर भूमिगत चल के प्रदूषित होने की भी पूरी संभावना बनी हुई है। ऐसे में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) इसको लेकर सचेत हो गया है।
नगर निगम ने आदेशों की अवहेलना की तो लगेगा जुर्माना
हाईकोर्ट में पीसीबी के अधिकारियों ने बताया कि एनजीटी के नियम 22 और ठोस कचरा प्रबंधन एक्ट की अवहेलना मिलने पर नगर निगम पर अभी 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है जोकि 10 जनवरी से लेकर 10 अक्तूबर तक का था।
अगर नगर निगम अभी भी तय नियमों को पूरा नहीं करता है तो 10 अक्तूबर के बाद भी यह जुर्माना जारी रहेगा। गौरतलब है कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट के अनुसार नगर निगम को डंपिंग प्वाइंट को लेकर करीब 11 नियमों को पूरा करना है। इसमें उस साइट की चार दीवारी होनी चाहिए।
आने जाने का सड़क मार्ग हो इसके साथ ही अन्य नियमों का भी पालन करना होगा। मगर साइट पर इस प्रकार के कोई भी प्रबंध नहीं है। हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 14 नवंबर को है, जिसमें नगर निगम के आयुक्त को हलफनामा पेश करना होगा।
वर्जन
कोर्ट ने नगर निगम को नियमों को पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इस पर हमारी निगाह बनी हुई है। मौके पर जाकर निरीक्षण भी कर रहे हैं। सुखरान मोहर, एसडीओ, पीसीबी
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अंबाला सिटी। काकरू डंपिंग साइट को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के नियमों की अवहेलना होने के आरोप पहले ही लगते रहे हैं। वहीं, नगर निगम इन आरोपों को नकारते हुए हमेशा ही कहता रहा है कि यह उसका कचरा संग्रहण केंद्र है।
मगर 25 अक्तूबर को हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान यह उजागर हो गया कि यहां पर कचरा डंप किया जा रहा है। 25 अक्तूबर को ही कोर्ट के सामने सुबह की साइट की फोटो के साथ साक्ष्य भी प्रस्तुत कर दिया गया।
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ऐसे में यह स्पष्ट हो गया है कि नगर निगम जिस साइट को सेकेंडरी साइट बोलता रहा वहां से तो असल में कचरा उठ ही नहीं रहा है। अगर कचरा नहीं उठ रहा है तो बारिश के दिनों में कचरे के भीगने से दूषित जल भूमि में भी जा रहा होगा।
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ऐसे में काकरू डंपिंग साइट पर भूमिगत चल के प्रदूषित होने की भी पूरी संभावना बनी हुई है। ऐसे में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) इसको लेकर सचेत हो गया है।
नगर निगम ने आदेशों की अवहेलना की तो लगेगा जुर्माना
हाईकोर्ट में पीसीबी के अधिकारियों ने बताया कि एनजीटी के नियम 22 और ठोस कचरा प्रबंधन एक्ट की अवहेलना मिलने पर नगर निगम पर अभी 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है जोकि 10 जनवरी से लेकर 10 अक्तूबर तक का था।
अगर नगर निगम अभी भी तय नियमों को पूरा नहीं करता है तो 10 अक्तूबर के बाद भी यह जुर्माना जारी रहेगा। गौरतलब है कि सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट एक्ट के अनुसार नगर निगम को डंपिंग प्वाइंट को लेकर करीब 11 नियमों को पूरा करना है। इसमें उस साइट की चार दीवारी होनी चाहिए।
आने जाने का सड़क मार्ग हो इसके साथ ही अन्य नियमों का भी पालन करना होगा। मगर साइट पर इस प्रकार के कोई भी प्रबंध नहीं है। हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 14 नवंबर को है, जिसमें नगर निगम के आयुक्त को हलफनामा पेश करना होगा।
वर्जन
कोर्ट ने नगर निगम को नियमों को पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इस पर हमारी निगाह बनी हुई है। मौके पर जाकर निरीक्षण भी कर रहे हैं। सुखरान मोहर, एसडीओ, पीसीबी