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जज बोले, सभी बाजारों से हटाओ अवैध कब्जे
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
Updated Fri, 22 Jan 2016 01:10 AM IST
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अंबाला कैंट में कुछेक बाजार क्यों? सभी बाजारों से अवैध कब्जे और अतिक्रमण हटने चाहिएं, ताकि लोगों को सहुलियत मिल सके, म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन अंबाला के अफसर अगली पेशी पर कब्जों को हटवाकर रिपोर्ट पेश करें।
यह आदेश वीरवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कैंट के बाजारों से अवैध कब्जे हटवाने के मामले में दिए गए। इस मामले में याचिकाकर्ता समेत एमसीए के अफसर और उनकी ओर से अधिवक्ता हाईकोर्ट में पेश हुए थे। एमसीए की ओर से पेश अधिवक्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि कैंट के कई बाजारों से पक्के अवैध कब्जों को म्यूनसिपल कॉरपोरेशन अंबाला (एमसीए) की ओर से हटा दिया गया है। जबकि कपड़ा-हनुमान मार्केट (ओल्ड सब्जी मंडी) से भी पक्के अवैध कब्जे हटा दिए गए हैं।
लेकिन दूसरी ओर जनहित याचिका लगाने वाले एडवोकेट एसकेएस बेदी ने हाईकोर्ट को बताया कि एमसीए अफसरों की ओर से बाजारों में नालों और सड़कों से हटाए गए अवैध कब्जों संबंधी जो शपथपत्र दिए हैं, वे पूरी तरह से सच्चे और तथ्यों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने हाईकोर्ट से कहा कि अभी भी कैंट में कई ऐसे बाजार हैं, जहां नालों व सड़कों पर पक्के कब्जे हैं। इतना ही नहीं इसके बावजूद वे सड़कों पर अपना सामान बाहर रखकर अतिक्रमण को भी बढ़ावा देते हैं।
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इसी दौरान कुछ और बाजारों की लिस्ट हाईकोर्ट में पेश करनी चाहिए, जहां से पक्के अवैध कब्जे हटाए जाने थे। लेकिन इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि कुछेक बाजार क्यों? कैंट के तमाम बाजारों से अवैध कब्जे और अतिक्रमण हटना चाहिए। एमसीए के अफसर इन कब्जों और अतिक्रमण को हटाकर हाईकोर्ट को इस बारे में बताए।
बहरहाल कैंट के तमाम बाजारों से पक्के अवैध कब्जे हटाने के लिए एमसीए अफसरों को छह माह का और वक्त मिल गया है, क्योंकि अब इस मामले की अगली पेशी 21 जुलाई को होगी। अगली पेशी पर एमसीए अफसर हाईकोर्ट को बताएंगे कि और कितने बाजारों से उन्होंने पक्के कब्जे हटा दिए हैं।
कपड़ा-हनुमान मार्केट के दुकानदारों की अर्जी खारिज
18 जनवरी को कैंट के कपड़ा-हनुमान मार्केट में हटाए गए पक्के अवैध कब्जों के मामले में इस मार्केट के दुकानदारों ने हाईकोर्ट में अर्जी लगाकर इसी जनहित याचिका में पार्टी बनने की अपील की थी। इन दुकानदारों का कहना था कि उन्हें भी केस का हिस्सा बनाया जाए और हाईकोर्ट एमसीए अफसरों को आदेश दे कि वे दुकानदारों को बताएं कि वे अपनी दुकानों के शटर कब्जे छोड़कर कितना पीछे लगाएं? दूसरा, एमसीए तब तक उनके बाजार में कार्रवाई न करें, जब तक उन्हें कारोबार के लिए दूसरी जगह उपलब्ध नहीं की जाती, क्योंकि यदि एमसीए इस बाजार में तोडफ़ोड़ करता है तो कई दुकानदारों का रोजगार पूरी तरह खत्म हो जाएगा। लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका की अर्जी को खारिज कर दिया है।
लोकल कमिश्नर की कार्रवाई पर ऑब्जेक्शन
इस मामले में याचिकाकर्ता एडवोकेट एसकेएस बेदी ने हाईकोर्ट में एक अर्जी देकर हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त किए गए लोकल कमिश्नर की कार्रवाई पर ऑब्जेक्शन फाइल कर दिया है। उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता के ऑब्जेक्शन के बाद हाईकोर्ट ने एक लोकल कमिश्नर नियुक्त किया था, जिसे ईदगाह रोड मार्केट मेें मुआयना कर कब्जों की स्थिति से हाईकोर्ट को अवगत करवाना था।
लोकल कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट को पेश कर दी थी, लेकिन याची ने इस मामले में लोकल कमिश्नर की कार्रवाई पर सवाल खड़े करते हुई एक अर्जी वीरवार को अदालत में लगाई है। याची एसकेएस बेदी ने बताया कि इस याचिका में उन्होंने हाईकोर्ट को बताया है कि लोकल कमिश्नर ने अपनी कार्रवाई उचित ढंग से नहीं की है।
उनके अनुसार लोकल कमिश्नर को एमसीए से कब्जों संबंधी दस्तावेज लेकर ये चेक करना था कि ईदगाह रोड मार्केट से कितने दुकानदारों से सही ढंग से कब्जे हटाए हैं? लेकिन ऐसा नहीं हुआ, लोकल कमिश्नर ने भी एमसीए से दुकानदारों द्वारा किए गए कब्जों संबंधी रिकॉर्ड नहीं मांगा और न ही एमसीए अफसरों ने खुद ये रिकॉर्ड लोकल कमिश्नर को दिया। याची ने हाईकोर्ट को बताया ईदगाह रोड मार्केट में दुकानदारों ने सही ढंग से कब्जे नहीं हटाए हैं। हाईकोर्ट ने ऑब्जेक्शन पर अगली सुनवाई के लिए 21 जुलाई निर्धारित की है।
चारों दुकानदारों को मिली जमानत
विगत दिनों कपड़ा-हनुमान मार्केट में एमसीए की कार्रवाई का विरोध करने पर पूर्व मंत्री समेत दुकानदारों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस ने चार दुकानदारों को गिरफ्तार कर लिया था। वीरवार को पुलिस ने चारों दुकानदारों को अदालत में पेश किया। इन पर सरकारी काम में बाधा डालने और हाईकोर्ट के आदेश पर की जा रही कार्रवाई का विरोध करने का आरोप था। ये दुकानदार न्यायिक हिरासत में चल रहे थे। लेकिन वीरवार को सुनवाई के दौरान एडिशनल सैशन जज की अदालत ने चारों को जमानत पर रिहा कर दिया।
एमसीए ने लगाया बोर्ड, दुकानदारों ने मांगी जगह
उधर, 18 जनवरी को कपड़ा-हनुमान मार्केट में अवैध कब्जे हटाने के बाद वीरवार को उस वक्त एमसीए ने दुकानदारों का दर्द और बढ़ा दिया। जब एमसीए की टीम बाजार में पहुंची और हटाए गए कब्जों की जगह पर ये बोर्ड 'ये जमीन सरकारी है, इस पर निर्माण करने वाले के खिलाफ कार्रवाई होगी... लगा दिया। ये बोर्ड एमसीए कमिश्नर के आदेशों पर लगाया गया। यानी एमसीए ने साफ कर दिया है कि कोई भी दुकानदार दोबारा अपनी हद से आगे बढ़ने की हिम्मत न करे। लेकिन उधर, दुकानदार तीसरे दिन भी मायूस चेहरों, उदास मन और नम आखों के साथ अपनी तोड़ी गई दुकानों का मलबा समेटने में जुटे रहे। इन दुकानदारों ने सरकार से मांग की है कि उनका रोजगार उजड़ गया है, सरकार उन्हें कारोबार के लिए नई जगह उपलब्ध करवाए।
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यह आदेश वीरवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कैंट के बाजारों से अवैध कब्जे हटवाने के मामले में दिए गए। इस मामले में याचिकाकर्ता समेत एमसीए के अफसर और उनकी ओर से अधिवक्ता हाईकोर्ट में पेश हुए थे। एमसीए की ओर से पेश अधिवक्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि कैंट के कई बाजारों से पक्के अवैध कब्जों को म्यूनसिपल कॉरपोरेशन अंबाला (एमसीए) की ओर से हटा दिया गया है। जबकि कपड़ा-हनुमान मार्केट (ओल्ड सब्जी मंडी) से भी पक्के अवैध कब्जे हटा दिए गए हैं।
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लेकिन दूसरी ओर जनहित याचिका लगाने वाले एडवोकेट एसकेएस बेदी ने हाईकोर्ट को बताया कि एमसीए अफसरों की ओर से बाजारों में नालों और सड़कों से हटाए गए अवैध कब्जों संबंधी जो शपथपत्र दिए हैं, वे पूरी तरह से सच्चे और तथ्यों के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने हाईकोर्ट से कहा कि अभी भी कैंट में कई ऐसे बाजार हैं, जहां नालों व सड़कों पर पक्के कब्जे हैं। इतना ही नहीं इसके बावजूद वे सड़कों पर अपना सामान बाहर रखकर अतिक्रमण को भी बढ़ावा देते हैं।
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इसी दौरान कुछ और बाजारों की लिस्ट हाईकोर्ट में पेश करनी चाहिए, जहां से पक्के अवैध कब्जे हटाए जाने थे। लेकिन इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि कुछेक बाजार क्यों? कैंट के तमाम बाजारों से अवैध कब्जे और अतिक्रमण हटना चाहिए। एमसीए के अफसर इन कब्जों और अतिक्रमण को हटाकर हाईकोर्ट को इस बारे में बताए।
बहरहाल कैंट के तमाम बाजारों से पक्के अवैध कब्जे हटाने के लिए एमसीए अफसरों को छह माह का और वक्त मिल गया है, क्योंकि अब इस मामले की अगली पेशी 21 जुलाई को होगी। अगली पेशी पर एमसीए अफसर हाईकोर्ट को बताएंगे कि और कितने बाजारों से उन्होंने पक्के कब्जे हटा दिए हैं।
कपड़ा-हनुमान मार्केट के दुकानदारों की अर्जी खारिज
18 जनवरी को कैंट के कपड़ा-हनुमान मार्केट में हटाए गए पक्के अवैध कब्जों के मामले में इस मार्केट के दुकानदारों ने हाईकोर्ट में अर्जी लगाकर इसी जनहित याचिका में पार्टी बनने की अपील की थी। इन दुकानदारों का कहना था कि उन्हें भी केस का हिस्सा बनाया जाए और हाईकोर्ट एमसीए अफसरों को आदेश दे कि वे दुकानदारों को बताएं कि वे अपनी दुकानों के शटर कब्जे छोड़कर कितना पीछे लगाएं? दूसरा, एमसीए तब तक उनके बाजार में कार्रवाई न करें, जब तक उन्हें कारोबार के लिए दूसरी जगह उपलब्ध नहीं की जाती, क्योंकि यदि एमसीए इस बाजार में तोडफ़ोड़ करता है तो कई दुकानदारों का रोजगार पूरी तरह खत्म हो जाएगा। लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी याचिका की अर्जी को खारिज कर दिया है।
लोकल कमिश्नर की कार्रवाई पर ऑब्जेक्शन
इस मामले में याचिकाकर्ता एडवोकेट एसकेएस बेदी ने हाईकोर्ट में एक अर्जी देकर हाईकोर्ट द्वारा नियुक्त किए गए लोकल कमिश्नर की कार्रवाई पर ऑब्जेक्शन फाइल कर दिया है। उल्लेखनीय है कि याचिकाकर्ता के ऑब्जेक्शन के बाद हाईकोर्ट ने एक लोकल कमिश्नर नियुक्त किया था, जिसे ईदगाह रोड मार्केट मेें मुआयना कर कब्जों की स्थिति से हाईकोर्ट को अवगत करवाना था।
लोकल कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट को पेश कर दी थी, लेकिन याची ने इस मामले में लोकल कमिश्नर की कार्रवाई पर सवाल खड़े करते हुई एक अर्जी वीरवार को अदालत में लगाई है। याची एसकेएस बेदी ने बताया कि इस याचिका में उन्होंने हाईकोर्ट को बताया है कि लोकल कमिश्नर ने अपनी कार्रवाई उचित ढंग से नहीं की है।
उनके अनुसार लोकल कमिश्नर को एमसीए से कब्जों संबंधी दस्तावेज लेकर ये चेक करना था कि ईदगाह रोड मार्केट से कितने दुकानदारों से सही ढंग से कब्जे हटाए हैं? लेकिन ऐसा नहीं हुआ, लोकल कमिश्नर ने भी एमसीए से दुकानदारों द्वारा किए गए कब्जों संबंधी रिकॉर्ड नहीं मांगा और न ही एमसीए अफसरों ने खुद ये रिकॉर्ड लोकल कमिश्नर को दिया। याची ने हाईकोर्ट को बताया ईदगाह रोड मार्केट में दुकानदारों ने सही ढंग से कब्जे नहीं हटाए हैं। हाईकोर्ट ने ऑब्जेक्शन पर अगली सुनवाई के लिए 21 जुलाई निर्धारित की है।
चारों दुकानदारों को मिली जमानत
विगत दिनों कपड़ा-हनुमान मार्केट में एमसीए की कार्रवाई का विरोध करने पर पूर्व मंत्री समेत दुकानदारों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस ने चार दुकानदारों को गिरफ्तार कर लिया था। वीरवार को पुलिस ने चारों दुकानदारों को अदालत में पेश किया। इन पर सरकारी काम में बाधा डालने और हाईकोर्ट के आदेश पर की जा रही कार्रवाई का विरोध करने का आरोप था। ये दुकानदार न्यायिक हिरासत में चल रहे थे। लेकिन वीरवार को सुनवाई के दौरान एडिशनल सैशन जज की अदालत ने चारों को जमानत पर रिहा कर दिया।
एमसीए ने लगाया बोर्ड, दुकानदारों ने मांगी जगह
उधर, 18 जनवरी को कपड़ा-हनुमान मार्केट में अवैध कब्जे हटाने के बाद वीरवार को उस वक्त एमसीए ने दुकानदारों का दर्द और बढ़ा दिया। जब एमसीए की टीम बाजार में पहुंची और हटाए गए कब्जों की जगह पर ये बोर्ड 'ये जमीन सरकारी है, इस पर निर्माण करने वाले के खिलाफ कार्रवाई होगी... लगा दिया। ये बोर्ड एमसीए कमिश्नर के आदेशों पर लगाया गया। यानी एमसीए ने साफ कर दिया है कि कोई भी दुकानदार दोबारा अपनी हद से आगे बढ़ने की हिम्मत न करे। लेकिन उधर, दुकानदार तीसरे दिन भी मायूस चेहरों, उदास मन और नम आखों के साथ अपनी तोड़ी गई दुकानों का मलबा समेटने में जुटे रहे। इन दुकानदारों ने सरकार से मांग की है कि उनका रोजगार उजड़ गया है, सरकार उन्हें कारोबार के लिए नई जगह उपलब्ध करवाए।