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जज ने लैपटॉप पर देखी हमले की सीडी, फिर जमानत याचिका की रद्द
अमर उजाला/ब्यूरो/अंबाला
Updated Thu, 28 Jul 2016 12:09 AM IST
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कोर्ट में नए अवसर
- फोटो : Getty
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कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला कैंट के पार्षद एवं पूर्व उपाध्यक्ष वीरेंद्र गांधी के घर हमले एवं तोड़फोड़ मामले में बुधवार को अतिरिक्त चीफ जूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में सुनवाई हुई। पुलिस ने गत दिवस इस मामले में काफी दबाव के बाद पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया था, जिन्हें एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। बुधवार को फिर से अदालत में पांचों आरोपियों को पेश किया और उनके वकील की ओर से अदालत से आरोपियों को जमानत देने की गुहार लगाई गई।
लेकिन तभी पीड़ित के वकील एडवोकेट विशाल मित्तल ने अदालत से आग्रह किया कि अदालत पांचों आरोपियों की जमानत याचिका पर फैसला देने से पूर्व एक बार इस हमले की सीसीटीवी फुटेज और फोटो का अवलोकन कर ले। इस दौरान पीड़ित और उनके वकील बाकायदा लैपटॉप लेकर कोर्ट रूम में पहुंचे थे। पीड़ित के वकील के आग्रह को स्वीकार करते हुए अतिरिक्त चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने पूरे घटनाक्रम की सीडी दिखाने की अनुमति प्रदान कर दी।
एडवोकेट विशाल मित्तल ने तुरंत लैपटॉप निकाला और हमले की सीसीटीवी फुटेज की तीन सीडी जज को दिखाई। एडवोकेट विशाल मित्तल ने बताया कि पहली सीडी में यह दिखाया गया कि एक हमलावर हाथ में तेजधार हथियार लेकर घर के आसपास घूमता है और फिर रेकी कर थोड़ी देर बाद वापस चला जाता है। दूसरी सीडी में अचानक 15 से 20 लोग हथियारों के साथ शिकायतकर्ता के घर पहुंचते हैं और ताबड़तोड़ हमला शुरू कर देते हैं। तीसरी सीडी में हमलावर लगातार कार को तोड़ रहे हैं और घर पर पत्थर व ईंटें बरसा रहे हैं।
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जज ने तीनों सीडी देखने के बाद हमले की फोटोग्राफ भी देखी। एडवोकेट विशाल ने बताया कि जज ने सीडी और फोटोग्राफ को केस की फाइल में अटैच करवा दिया और पांचों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर उन्हें फिर से न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
इस तरह पुलिस कार्रवाई पर खड़ा हुआ बड़ा सवाल
एडवोकेट विशाल मित्तल और पीड़ित पार्षद वीरेंद्र गांधी ने बताया कि पुलिस ने इस सारे मामले में बड़ी लापरवाही बरती है। पीड़ित पार्षद के अनुसार उनके घर हमला करने वाले लोग शराब माफिया से जुड़े हुए हैं। इनका विवाद उनके भतीजे से हल्की बाइक लगने पर हुआ था, लेकिन उन्होंने देर रात हथियारों से घर में हमला कर तोड़फोड़ की और जमकर पथराव किया। पीड़ित पार्षद के अनुसार इस हमले में उनके घर की एक महिला को भी चोट आई थी। पार्षद ने बताया कि यह सारी वारदात उनके घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। एडवोकेट विशाल ने बताया कि पुलिस को इस मामले में कार्रवाई करते हुए पीड़ितों से सीसीटीवी फुटेज और फोटोग्राफ को जांच में शामिल करना चाहिए था और अदालत से आरोपियों का रिमांड लेकर उनसे वे हथियार बरामद करने चाहिए थे, जिनसे आरोपियों ने पीड़ितों के घर हमला कर तोड़फोड़ की। इसलिए पीड़ित परिवार अब पुलिस कमिश्नर और डीसीपी अरबन से मिलकर पुलिस की ढुलमुल कार्यप्रणाली की शिकायत करेगा। उधर, पीड़ित पार्षद ने भी पुलिस पर केस को कमजोर करने का आरोप लगाया है। पार्षद ने बताया कि हमले के बाद कईं दिनों तक आरोपियों को गिरफ्तार ही नहीं किया। जब उनके समर्थकों और तोपखाना बाजार के दुकानदारों ने एसीपी से मिलने के बाद गिरफ्तारी न होने पर तोपखाना बाजार बंद करने की चेतावनी दी, तब जाकर पुलिस ने घटना के कईं दिन बाद इन पांच आरोपियों को तो गिरफ्तार किया, लेकिन संबंधित हथियारों की बरामदगी के लिए अदालत से रिमांड की मांग नहीं की।
वर्जन
इस मामले में कार्रवाई निष्पक्षता से की गई है। पीड़ित पक्ष की पूरी बात सुनी गई और हर पहलू पर जांच हुई है। आरोपी पक्ष ने अदालत में जमानत के लिए याचिका दी थी, जबकि पीड़ित पक्ष ने इस याचिका विरोध किया था। अदालत ने जमानत याचिका रद्द कर आरोपियों को जेल भेजा है। पुलिस इस मामले में तथ्यों के आधार पर कार्रवाई कर रही है।
- जोराजीत सिंह, तोपखाना चौकी प्रभारी
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लेकिन तभी पीड़ित के वकील एडवोकेट विशाल मित्तल ने अदालत से आग्रह किया कि अदालत पांचों आरोपियों की जमानत याचिका पर फैसला देने से पूर्व एक बार इस हमले की सीसीटीवी फुटेज और फोटो का अवलोकन कर ले। इस दौरान पीड़ित और उनके वकील बाकायदा लैपटॉप लेकर कोर्ट रूम में पहुंचे थे। पीड़ित के वकील के आग्रह को स्वीकार करते हुए अतिरिक्त चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने पूरे घटनाक्रम की सीडी दिखाने की अनुमति प्रदान कर दी।
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एडवोकेट विशाल मित्तल ने तुरंत लैपटॉप निकाला और हमले की सीसीटीवी फुटेज की तीन सीडी जज को दिखाई। एडवोकेट विशाल मित्तल ने बताया कि पहली सीडी में यह दिखाया गया कि एक हमलावर हाथ में तेजधार हथियार लेकर घर के आसपास घूमता है और फिर रेकी कर थोड़ी देर बाद वापस चला जाता है। दूसरी सीडी में अचानक 15 से 20 लोग हथियारों के साथ शिकायतकर्ता के घर पहुंचते हैं और ताबड़तोड़ हमला शुरू कर देते हैं। तीसरी सीडी में हमलावर लगातार कार को तोड़ रहे हैं और घर पर पत्थर व ईंटें बरसा रहे हैं।
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जज ने तीनों सीडी देखने के बाद हमले की फोटोग्राफ भी देखी। एडवोकेट विशाल ने बताया कि जज ने सीडी और फोटोग्राफ को केस की फाइल में अटैच करवा दिया और पांचों आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर उन्हें फिर से न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
इस तरह पुलिस कार्रवाई पर खड़ा हुआ बड़ा सवाल
एडवोकेट विशाल मित्तल और पीड़ित पार्षद वीरेंद्र गांधी ने बताया कि पुलिस ने इस सारे मामले में बड़ी लापरवाही बरती है। पीड़ित पार्षद के अनुसार उनके घर हमला करने वाले लोग शराब माफिया से जुड़े हुए हैं। इनका विवाद उनके भतीजे से हल्की बाइक लगने पर हुआ था, लेकिन उन्होंने देर रात हथियारों से घर में हमला कर तोड़फोड़ की और जमकर पथराव किया। पीड़ित पार्षद के अनुसार इस हमले में उनके घर की एक महिला को भी चोट आई थी। पार्षद ने बताया कि यह सारी वारदात उनके घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। एडवोकेट विशाल ने बताया कि पुलिस को इस मामले में कार्रवाई करते हुए पीड़ितों से सीसीटीवी फुटेज और फोटोग्राफ को जांच में शामिल करना चाहिए था और अदालत से आरोपियों का रिमांड लेकर उनसे वे हथियार बरामद करने चाहिए थे, जिनसे आरोपियों ने पीड़ितों के घर हमला कर तोड़फोड़ की। इसलिए पीड़ित परिवार अब पुलिस कमिश्नर और डीसीपी अरबन से मिलकर पुलिस की ढुलमुल कार्यप्रणाली की शिकायत करेगा। उधर, पीड़ित पार्षद ने भी पुलिस पर केस को कमजोर करने का आरोप लगाया है। पार्षद ने बताया कि हमले के बाद कईं दिनों तक आरोपियों को गिरफ्तार ही नहीं किया। जब उनके समर्थकों और तोपखाना बाजार के दुकानदारों ने एसीपी से मिलने के बाद गिरफ्तारी न होने पर तोपखाना बाजार बंद करने की चेतावनी दी, तब जाकर पुलिस ने घटना के कईं दिन बाद इन पांच आरोपियों को तो गिरफ्तार किया, लेकिन संबंधित हथियारों की बरामदगी के लिए अदालत से रिमांड की मांग नहीं की।
वर्जन
इस मामले में कार्रवाई निष्पक्षता से की गई है। पीड़ित पक्ष की पूरी बात सुनी गई और हर पहलू पर जांच हुई है। आरोपी पक्ष ने अदालत में जमानत के लिए याचिका दी थी, जबकि पीड़ित पक्ष ने इस याचिका विरोध किया था। अदालत ने जमानत याचिका रद्द कर आरोपियों को जेल भेजा है। पुलिस इस मामले में तथ्यों के आधार पर कार्रवाई कर रही है।
- जोराजीत सिंह, तोपखाना चौकी प्रभारी