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जम्मूतवी-काठगोदाम गरीबरथ का आरामदायक होगा सफर, आज से लगेंगे एलएचबी रैक
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एलबीएच की फाइल फोटो।
- फोटो : Ambala
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अंबाला। जम्मूतवी-काठगोदाम गरीबरथ एक्सप्रेस का सफर आरामदायक होगा। ट्रेन में सोमवार से एलएचबी (लिंक हॉफ मन बुश) रैक लगाए जाएंगे। रेल प्रशासन ने बताया कि यह सुविधा ट्रेन नंबर 12208/12207 जम्मूतवी-काठगोदाम-जम्मूतवी गरीबरथ साप्ताहिक एक्सप्रेस में मिलेगी। वहीं तेज गति से चलने वाली अन्य ट्रेनों में भी इस तरह के कोच लगाने का कार्य किया जा रहा है।
एलएचबी जर्मन तकनीक आधारित रैक है। इसी कारण इसे अधिकतर तेज गति वाली ट्रेनों में इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही ज्यादा जगह होने से यात्रियों को आराम से सीट पर बैठने व लेटने की सुविधा मिलेगी। इस कोच के लगने के बाद दुर्घटना होने की संभावना भी कम रहती है। इस कोच को 160 से 180 किमी प्रति घंटे तक की गति से चलाया जा सकता है। अगर भविष्य में कोई हादसा होता है तो एलएचबी कोच आपस में नहीं टकराएंगे। इस कारण दुर्घटना में नुकसान होने की आशंका बहुत कम रह जाती है। वहीं पारंपरिक कोच का मेंटेनेंस डेढ़ से लेकर दो साल में करवाना जरूरी होता है। दूसरी ओर, इन कोचों का ओवरऑल मेंटेनेंस तीन साल में एक बार होता है।
एलएचबी रैक पारंपरिक कोच की तुलना में 1.5 मीटर लंबे होते हैं। इनमें बड़ी विंडो और सीटें आरामदायक होती है। इसमें बॉयो टॉयलेट की व्यवस्था, ज्यादा जगह, एंटी टेलीस्कोपिक सिस्टम होने से डिब्बों का पटरी से उतरने का खतरा कम होता है। एलएचबी कोच स्टेलनेस स्टील व एल्यूमिनियम से बने हैं। इनमें लगे ब्रेक सिस्टम से ट्रेन को जल्दी रोका जा सकता है। वहीं एलएचबी में माइक्रोप्रोसेसर और कोच के तापमान को कंट्रोल करने वाला सेंट्रल एयर कंडीश्निंग सिस्टम लगा है।
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एलएचबी जर्मन तकनीक आधारित रैक है। इसी कारण इसे अधिकतर तेज गति वाली ट्रेनों में इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही ज्यादा जगह होने से यात्रियों को आराम से सीट पर बैठने व लेटने की सुविधा मिलेगी। इस कोच के लगने के बाद दुर्घटना होने की संभावना भी कम रहती है। इस कोच को 160 से 180 किमी प्रति घंटे तक की गति से चलाया जा सकता है। अगर भविष्य में कोई हादसा होता है तो एलएचबी कोच आपस में नहीं टकराएंगे। इस कारण दुर्घटना में नुकसान होने की आशंका बहुत कम रह जाती है। वहीं पारंपरिक कोच का मेंटेनेंस डेढ़ से लेकर दो साल में करवाना जरूरी होता है। दूसरी ओर, इन कोचों का ओवरऑल मेंटेनेंस तीन साल में एक बार होता है।
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एलएचबी रैक पारंपरिक कोच की तुलना में 1.5 मीटर लंबे होते हैं। इनमें बड़ी विंडो और सीटें आरामदायक होती है। इसमें बॉयो टॉयलेट की व्यवस्था, ज्यादा जगह, एंटी टेलीस्कोपिक सिस्टम होने से डिब्बों का पटरी से उतरने का खतरा कम होता है। एलएचबी कोच स्टेलनेस स्टील व एल्यूमिनियम से बने हैं। इनमें लगे ब्रेक सिस्टम से ट्रेन को जल्दी रोका जा सकता है। वहीं एलएचबी में माइक्रोप्रोसेसर और कोच के तापमान को कंट्रोल करने वाला सेंट्रल एयर कंडीश्निंग सिस्टम लगा है।
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