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14 तोले सोना चोरी के मामले में तथ्य जुटाने बनारस से अंबाला पहुंची आरपीएफ टीम
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अंबाला। 14 तोले सोना चोरी मामले की जांच के लिए बनारस आरपीएफ की टीम सोमवार अंबाला पहुंच गई। टीम की अध्यक्षता बनारस एएससी कर रहे हैं। टीम इस मामले से जुड़े प्रत्येक मामले की गहनता से जांच कर तथ्य जुटाएगी, वहीं मामले की कड़ियों को खंगालने के लिए अंबाला के आरपीएफ अधिकारियों से भी मंत्रणा की जाएगी। कोलकाता-अमृतसर एक्सप्रेस ट्रेन नंबर 02357 के एसी कोच बी-4 में हुई चोरी की घटना हो 15 दिन हो गए हैं।
जांच एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं और आरोपी अभी खुलेआम बाहर घूम रहा है। ट्रेनों में चोरी करने की महारत हासिल करने वाले गिरोह का मास्टरमाइंड लाखन अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। सूत्रों से जानकारी मिली है कि यह वही लाखन है जो मुरादाबाद से जम्मू तक कई ट्रेनों में हुई चोरी की वारदात में संलिप्त है। इसकी कार्यशैली से प्रत्येक एजेंसी वाकिफ है। यह इसका कोई पहला केस नहीं है, इससे पहले भी लाखन ने कई ट्रेनों में इसी प्रकार चोरी की वारदातों को अंजाम दिया है। 20 सितंबर को हुई चोरी में लाखन की पहचान खुद पीड़ित एयरफोर्स कर्मी ने छावनी जीआरपी के सामने की थी, वहीं अब एयरफोर्स कर्मी का 14 तोले सोना किसके पास है, इसकी पुख्ता जानकारी आज तक सामने नहीं आ पाई है।
दबी जुबान में लग रहे आरोप-प्रत्यारोप
जांच करने वाली दोनों सुरक्षा एजेंसियां दबी जुबान में इसे एक दूसरे का षड्यंत्र भी बता रही हैं, लेकिन कोई भी अधिकारी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। इसमें यह जानकारी भी सामने आई है कि अपने-आप को पीड़ित बताने वाला चोरी का मास्टरमाइंड लाखन की शिकायत पर एक सुरक्षा एजेंसी ने जांच के नाम पर लंबी चौड़ी फाइल तैयार कर ली, जबकि एयरफोर्स कर्मी की शिकायत पर जवाब दिया गया कि यह तो बनारस जीआरपी का मामला है, वो ही जांच करेगी।
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जांच एजेंसियां अपने-अपने स्तर पर मामले की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं और आरोपी अभी खुलेआम बाहर घूम रहा है। ट्रेनों में चोरी करने की महारत हासिल करने वाले गिरोह का मास्टरमाइंड लाखन अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। सूत्रों से जानकारी मिली है कि यह वही लाखन है जो मुरादाबाद से जम्मू तक कई ट्रेनों में हुई चोरी की वारदात में संलिप्त है। इसकी कार्यशैली से प्रत्येक एजेंसी वाकिफ है। यह इसका कोई पहला केस नहीं है, इससे पहले भी लाखन ने कई ट्रेनों में इसी प्रकार चोरी की वारदातों को अंजाम दिया है। 20 सितंबर को हुई चोरी में लाखन की पहचान खुद पीड़ित एयरफोर्स कर्मी ने छावनी जीआरपी के सामने की थी, वहीं अब एयरफोर्स कर्मी का 14 तोले सोना किसके पास है, इसकी पुख्ता जानकारी आज तक सामने नहीं आ पाई है।
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दबी जुबान में लग रहे आरोप-प्रत्यारोप
जांच करने वाली दोनों सुरक्षा एजेंसियां दबी जुबान में इसे एक दूसरे का षड्यंत्र भी बता रही हैं, लेकिन कोई भी अधिकारी खुलकर बोलने को तैयार नहीं है। इसमें यह जानकारी भी सामने आई है कि अपने-आप को पीड़ित बताने वाला चोरी का मास्टरमाइंड लाखन की शिकायत पर एक सुरक्षा एजेंसी ने जांच के नाम पर लंबी चौड़ी फाइल तैयार कर ली, जबकि एयरफोर्स कर्मी की शिकायत पर जवाब दिया गया कि यह तो बनारस जीआरपी का मामला है, वो ही जांच करेगी।
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