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नर्सिंग संस्थानों ने रेवड़ियों की तरह बांटी डिग्रियां
अंबाला /अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jul 2015 01:12 AM IST
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सूबे में चल रहे अवैध नर्सिंग स्कूलों व कालेजों ने नर्सिंग छात्राओं को नियम ताक पर रख रेवडिय़ों की तरह डिग्रियां बांटी। कई कालेज तो ऐसे हैं, जो जीएनएम और एएनएम के कोर्स तो करवा रहे हैं, मगर वहां छात्राओं को ट्रेनिंग देने के लिए एक इंजेक्शन तक नहीं है, यानी सब कुछ फर्जी ढंग से चल रहा है।
जबकि कुछ कालेज ऐसे हैं जहां सीटें तो 50-50 रखी गई है, मगर वे 150-150 छात्राओं को डिग्रियां बांट रहे हैं। इतना ही नहीं छात्राओं से भी एएनएम और जीएनएम के नाम पर मोटी फीस भी वसूली जा रही है। ये बातें स्वास्थ्य मंत्री द्वारा इस मामले में गठित की गई आला अफसरों की टीम द्वारा की जा रही जांच में सामने आ चुकी है।
जबकि इस टीम से पहले मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के डायरेक्ट रह चुके प्रदीप कासनी भी इस बारे में अपनी एक रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्री को सौंप चुके हैं। फिलहाल उनका निदेशक पद से तबादला हो गया है और अब दूसरे सीनियर आईएएस अफसर स्वास्थ्य मंत्री विज के निर्देशों पर इन फर्जी स्कूलों व कालेजों के संचालन संबंधी रिकार्ड खंगाल रहे हैं।
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दोषी अफसरों पर होगी कार्रवाई
इस पूरे गड़बड़झाले को लेकर सेहत मंत्री विज भी हैरान है, उन्होंने इस बारे में रिकार्ड खंगालने और इन फर्जी संस्थानों से जुड़ी नर्सिंग छात्राओं को राहत देने का रास्ता निकालने के लिए अपने सीनियर आईएएस अफसरों की टीम को लगा दिया है। सभी कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इस मसले पर अफसरों की माथापच्ची भी जारी है।
लेकिन सेहत मंत्री विज इस मसले से काफी खफा है। विज ने ये बात स्पष्ट कर दी है कि इस मामले में फिलहाल जांच चल रही है। लेकिन जांच में जो भी अफसर इस मसले में जिम्मेदार पाया गया, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। क्योंकि ये हजारों नर्सिंग छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्हे सिर्फ आला अफसरों की रिपोर्ट का इंतजार है।
अमर उजाला ने किया था खुलासा, अब आईएएस पर टेढ़ी नजर
इस पूरे मसले और गड़बड़झाले में एक आईएएस अफसर की अहम भूमिका है। ये आईएएस अफसर मिलीभगत से गैरकानूनी ढंग से चल रहे नर्सिंग स्कूलों व कालेजों के संचालन को देख रहा था। इतना ही नहीं संबंधित आईएएस अफसर ने इन नर्सिंग संस्थानों द्वारा परीक्षा आयोजित करवाने के लिए अपनी म्यूजिक टीचर पत्नी को परीक्षा नियंत्रक बनाकर बाकायदा अपने कार्यालय में ही बिठा रखा था।
सीनियर आईएएस अफसर प्रदीप कासनी ने भी सेहत मंत्री को इस बाबत सौंपी रिपोर्ट में संबंधित आईएएस अफसर और उसकी पत्नी की कार्यप्रणाली को प्रमुखता से इंगित करते हुए कार्रवाई की सिफारिश की है। अमर उजाला ने 29 जून के अंक में ईपीएस आईएएस ने दिखाई मेहरबानी, मंत्री हैरान शीर्षक से प्रकाशित समाचार में इस गड़बड़झाले का खुलासा किया था। जिसे के बाद मंत्री ने भी जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है।
एएनएम और जीएनएम स्टूडेंट्स के मामले में शीघ्र फैसला लिया जाएगा। छात्रों का साल और रुपया बच जाए, इस बारे में सोच रहे हैं, मगर कानूनी पहलु को मद्देनजर रखते हुए। एक आईएएस अफसर और उसकी पत्नी की भी इस गड़बड़ी में भूमिका बताई जा रही है। सीनियर अफसरों के माध्यम से जांच भी कराई जा रही है कि कौन-कौन इस गड़बड़झाले में संलिप्त हैं। ताकि उनके विरुद्घ उचित कार्रवाई की जा सके। ये डिग्रियां भी दिल्ली के कानून मंत्री तोमर की नकली डिग्री जैसी ही हैं।
-अनिल विज, स्वास्थ्य मंत्री, हरियाणा।
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जबकि कुछ कालेज ऐसे हैं जहां सीटें तो 50-50 रखी गई है, मगर वे 150-150 छात्राओं को डिग्रियां बांट रहे हैं। इतना ही नहीं छात्राओं से भी एएनएम और जीएनएम के नाम पर मोटी फीस भी वसूली जा रही है। ये बातें स्वास्थ्य मंत्री द्वारा इस मामले में गठित की गई आला अफसरों की टीम द्वारा की जा रही जांच में सामने आ चुकी है।
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जबकि इस टीम से पहले मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च के डायरेक्ट रह चुके प्रदीप कासनी भी इस बारे में अपनी एक रिपोर्ट स्वास्थ्य मंत्री को सौंप चुके हैं। फिलहाल उनका निदेशक पद से तबादला हो गया है और अब दूसरे सीनियर आईएएस अफसर स्वास्थ्य मंत्री विज के निर्देशों पर इन फर्जी स्कूलों व कालेजों के संचालन संबंधी रिकार्ड खंगाल रहे हैं।
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दोषी अफसरों पर होगी कार्रवाई
इस पूरे गड़बड़झाले को लेकर सेहत मंत्री विज भी हैरान है, उन्होंने इस बारे में रिकार्ड खंगालने और इन फर्जी संस्थानों से जुड़ी नर्सिंग छात्राओं को राहत देने का रास्ता निकालने के लिए अपने सीनियर आईएएस अफसरों की टीम को लगा दिया है। सभी कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इस मसले पर अफसरों की माथापच्ची भी जारी है।
लेकिन सेहत मंत्री विज इस मसले से काफी खफा है। विज ने ये बात स्पष्ट कर दी है कि इस मामले में फिलहाल जांच चल रही है। लेकिन जांच में जो भी अफसर इस मसले में जिम्मेदार पाया गया, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। क्योंकि ये हजारों नर्सिंग छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्हे सिर्फ आला अफसरों की रिपोर्ट का इंतजार है।
अमर उजाला ने किया था खुलासा, अब आईएएस पर टेढ़ी नजर
इस पूरे मसले और गड़बड़झाले में एक आईएएस अफसर की अहम भूमिका है। ये आईएएस अफसर मिलीभगत से गैरकानूनी ढंग से चल रहे नर्सिंग स्कूलों व कालेजों के संचालन को देख रहा था। इतना ही नहीं संबंधित आईएएस अफसर ने इन नर्सिंग संस्थानों द्वारा परीक्षा आयोजित करवाने के लिए अपनी म्यूजिक टीचर पत्नी को परीक्षा नियंत्रक बनाकर बाकायदा अपने कार्यालय में ही बिठा रखा था।
सीनियर आईएएस अफसर प्रदीप कासनी ने भी सेहत मंत्री को इस बाबत सौंपी रिपोर्ट में संबंधित आईएएस अफसर और उसकी पत्नी की कार्यप्रणाली को प्रमुखता से इंगित करते हुए कार्रवाई की सिफारिश की है। अमर उजाला ने 29 जून के अंक में ईपीएस आईएएस ने दिखाई मेहरबानी, मंत्री हैरान शीर्षक से प्रकाशित समाचार में इस गड़बड़झाले का खुलासा किया था। जिसे के बाद मंत्री ने भी जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है।
एएनएम और जीएनएम स्टूडेंट्स के मामले में शीघ्र फैसला लिया जाएगा। छात्रों का साल और रुपया बच जाए, इस बारे में सोच रहे हैं, मगर कानूनी पहलु को मद्देनजर रखते हुए। एक आईएएस अफसर और उसकी पत्नी की भी इस गड़बड़ी में भूमिका बताई जा रही है। सीनियर अफसरों के माध्यम से जांच भी कराई जा रही है कि कौन-कौन इस गड़बड़झाले में संलिप्त हैं। ताकि उनके विरुद्घ उचित कार्रवाई की जा सके। ये डिग्रियां भी दिल्ली के कानून मंत्री तोमर की नकली डिग्री जैसी ही हैं।
-अनिल विज, स्वास्थ्य मंत्री, हरियाणा।