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शिवमहापुराण कथा के सातवें दिन कन्यादान की दी जानकारी : पंडित राकेश

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jul 2024 06:31 AM IST
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Information given about Kanyadan on the seventh day of Shiva Mahapuran Katha: Pandit Rakesh
अंबाला सिटी। जट्टां वाले शिव मंदिर में चल रही शिवमहापुराण कथा के सातवें दिन पंडित राकेश शर्मा ने हिमालय की ओर से कन्यादान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि उसी समय हिमालय-पुरोहित गर्गाचार्य ने हिमालय और मैना को यथोचित बैठा कर उनसे कहा कि अब कन्या-दान कीजिए। हिमालय ने अध्ये, पाद्य सहित वस्त्र और चंदन लेकर वर का वरण किया। तिथि आदि का कीर्तन हुआ।
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इसके बाद हिमालय ने सृष्टिकर्त्ता शिवजी से हंसते हुए कहा कि, हे शंकर आप अपना गोत्र, प्रवर और कुल कहिये तथा नाम, वेद और शाखा बतलाएं। हिमालय के इस प्रकार कहने पर चिन्तारहित भगवान शंकर चिंतित हो गए और उनसे कुछ भी कहते न बना। तब उन्हें निरुत्तर देख, हे नारद! तुम अपने हृदय में शिव को स्मरण कर हिमालय से बोले-हे शैलराज भला तुम कितने मूर्ख हो जो महेश्वर से नो ऐसा प्रश्न करते हो महादेवजी के गोत्र और कुल को तो विष्णु और ब्रह्मा भी नहीं जानते, अन्यों का तो कहना ही क्या है यह तो अरूप, परब्रह्म, प्रकृति से परे, निर्विकार, निराकर, मायाधीश और पर से भी पर मात्र हैं।
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तब इन स्वतंत्र भक्तवत्सल का गोत्र और नाम क्या होगा । तुम प्रसन्न हो कन्यादान करो। महेश का गोत्र और कुल केवल नाद ही है। नादमय शिव तथा शिवमय नाद में कोई अन्तर नहीं है। हे नारद तुम्हारे इन वचनों को सुन कर गिरिराज हिमाद्रि विस्मयरहित हुए। तदनंतर हिमालय और मेरु आदि से एक ही साथ कहा कि, हे गिरिराज ! अब कन्या दान में विलंब न कीजिए।
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तब मित्रों का वाक्य सुन कर हिमालय ने भगवान को सविधि कन्या दान किया और कहा कि, हे परमेश्वर! मैं आपको यह कन्या अर्पित करता हूं। फिर तो मंत्रों द्वारा हिमाचल ने महाशिव भगवान को अपनी कन्या दान की। हिमाचल के बंधुवर्गों ने शिवजी को सुद्रव्य दान दिये। हिमाचल ने भी दहेज में नाना प्रकार के द्रव्य दान किये। इस प्रकार अपनी पुत्री पार्वती को शिवजी के लिए विधिपूर्वक अर्पित कर हिमाचल कृतार्थ हुए। वेदपाठी ब्राह्मणों ने पार्वतीजी का शिवजी के साथ महोत्सव अभिषेक किया।
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