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काल करे सो आज कर, आज करे सो अब का महत्व बताया
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अंबाला। आर्य गर्ल्स कॉलेज के हिंन्दी विभाग और हिंदी साहित्य परिषद द्वारा संत कबीर जयंती के अवसर पर कबीर दोहा लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रो. ममता जैन ने कबीर दास के दोहे काल करे सो आज कर, आज करे सो अब, पल में प्रलय होएगी बहुरि करेगा कब... के माध्यम से बताया कि हमें अपने काम समय पर करने चाहिए। हमें आलस का त्याग करना चाहिए। प्रतियोगिता में लगभग 35 छात्राओं ने भाग लिया। प्रतियोगिता में अंजलि व उत्पलाक्षी प्रथम, रजमीत कौर व सृष्टि द्वितीय, शोभा व मोनिका तृतीय और कमलप्रीत कौर व शुभनीत कौर ने सांत्वना पुरस्कार हासिल किया। इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. संध्या गौतम, हिंदी विभागाध्यक्ष ने सरस्वती वंदना से किया।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अनुपमा आर्य ने कहा कि कबीर लेखन का समाज पर बड़ा प्रभाव है। उनका साहित्य 14वीं शताब्दी से लेकर अब तक समाज को दिशा देता रहा है और निरंतर देता रहेगा। उन्होंने कहा कि गुरु बिन ज्ञान नहीं और गुरु को भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है। उन्होंने जिंदगी जीने के नियम अपने दोहों के जरिये बताए जो आज भी उतने ही कारगर हैं जितने उस वक्त थे। अत: हमें उनके जीवन और लेखन से हमेशा प्रेरणा लेनी चाहिए। डॉ. अनीता गोदारा व डॉ. सुनीता देवी ने संत कबीरदास के दोहों का उच्चारण किया। कार्यक्रम में पूनम, एमए फाइनल की छात्रा ने संत कबीर के दोहे उच्चारित किए। अंजलि शर्मा बीकॉम द्वितीय व खुशबू एमए द्वितीय ने संत कबीर के जीवन पर प्रकाश डाला। शोभा बीकॉम द्वितीय ने संत कबीर का परिचय और उनकी शिक्षाओं के बारे में बताया।
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महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अनुपमा आर्य ने कहा कि कबीर लेखन का समाज पर बड़ा प्रभाव है। उनका साहित्य 14वीं शताब्दी से लेकर अब तक समाज को दिशा देता रहा है और निरंतर देता रहेगा। उन्होंने कहा कि गुरु बिन ज्ञान नहीं और गुरु को भगवान से भी ऊंचा दर्जा दिया गया है। उन्होंने जिंदगी जीने के नियम अपने दोहों के जरिये बताए जो आज भी उतने ही कारगर हैं जितने उस वक्त थे। अत: हमें उनके जीवन और लेखन से हमेशा प्रेरणा लेनी चाहिए। डॉ. अनीता गोदारा व डॉ. सुनीता देवी ने संत कबीरदास के दोहों का उच्चारण किया। कार्यक्रम में पूनम, एमए फाइनल की छात्रा ने संत कबीर के दोहे उच्चारित किए। अंजलि शर्मा बीकॉम द्वितीय व खुशबू एमए द्वितीय ने संत कबीर के जीवन पर प्रकाश डाला। शोभा बीकॉम द्वितीय ने संत कबीर का परिचय और उनकी शिक्षाओं के बारे में बताया।
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