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पाबंदी हटे तो बताएंगे आंदोलन में शामिल या नहीं : किसान
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शंभू सीमा पर पंजाब की तरफ टेंट में बैठे भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष
वैभव शर्मा
अंबाला सिटी। दिल्ली कूच के लिए चल रहे किसान आंदोलन में अभी तक कई लोग यह आरोप जड़ते दिख रहे थे कि इस आंदोलन में पंजाब के किसान शामिल हैं। हरियाणा के किसानों की आंदोलन से दूरी है, मगर ऐसा नहीं है।
मोर्चे में हरियाणा के किसान नेताओं को भी बराबर की जगह दी है। इसके साथ ही अभी तक दो हजार से अधिक किसान आंदोलन में आ चुके हैं। आंदोलन को संचालित कर रहे 250 किसान संगठनाें में प्रमुख तौर पर शामिल भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंबाला निवासी अमरजीत सिंह मोहड़ी और किसान नेता जय सिंह जलबेड़ा प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
किसान आंदोलन के संबंध में बात की तो उन्होंने कहा कि सरकार कह रही हे कि इस आंदोलन में हरियाणा के किसान नहीं हैं। मगर अभी तक दो से तीन हजार हरियाणा के किसान आ चुके हैं। अगर हरियाणा के किसान आंदोलन के साथ नहीं हैं तो सरकार ने गांवों में पाबंदियां क्यों लगाई हैं। एक बार पाबंदी हटाएं तब बताएंगे हरियाणा के किसान आंदोलन के साथ हैं या नहीं। हम अभी कॉल देंगे तो हजारों किसान हरियाणा में निकल आएंगे।
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शंभू सीमा पर पंजाब की तरफ भाकियू शहीद भगत सिंह ने एक अस्थाई कार्यालय बनाया है जहां पर हरियाणा के किसान दिनभर बैठते हैं तो किसान नेताओं से हालात पर जलेबी और किन्नू खाते चर्चा करते दिखे। यहां महिलाएं भी परिवार के साथ दिख रही हैं।
बेरिकेड तोड़ना प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं
अमरजीत सिंह मोहड़ी कहते हैं कि सरकार ने नेरेटिव सेट किया है कि किसान सिर्फ आंदोलन करते हैं वार्ता नहीं। हमारे लिए बेरिकेड तोड़ना कोई प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं है। हम सिर्फ वार्ता चाहते हैं। दो साल में हम बहुत भटके, दिल्ली जंतर मंतर गए, धरना दिया, ज्ञापन दिया मगर कोई समाधान नहीं निकला। इसलिए अब हम सरकार से वार्ता ही करेंगे। सरकार को हर हाल में किसानों की जायज मांगों पर समाधान देना होगा।
ऑर्डिनेंस लाने पर सरकार नहीं राजी
अमरजीत सिंह का कहना है कि हमारी एमएसपी गारंटी कानून, कर्जमुक्ति, जमीन अधिग्रहण बिल, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएं की मांगें हैं। सरकार अभी तक भी बैठकों में हल्की मांगें तो मान रही है मगर इन सभी बड़ी मांगों पर उलझाना चाहती है।
200 से अधिक लोगों के घर पर छापे
अमरजीत सिंह ने कहा कि दो फरवरी से वह अपने घर से गायब हैं। महिलाएं घर को संभाल रहीं हैं। पुलिस ने तो रात्रि के ढाई-ढाई बजे बिना महिला पुलिस को साथ लिए घरों पर दबिश दी है। 200 से अधिक लोगों के घरों पर छापे मारे जा चुके हैं। गांव में लंगर सेवा के लिए अनाउंसमेंट कराया जा रहा है उसे भी रोका जा रहा है।
वॉकीटॉकी संपर्क का बना जरिया
पंजाब और हरियाणा में जहां इंटरनेट बंद है। मोबाइल नेटवर्क भी काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे में किसान नेता आपस में बात करते के लिए वॉकीटॉकी का प्रयोग कर एक दूसरे से संपर्क करते दिख रहे हैं।
ये रहती है दिनचर्चा
अमरजीत सिंह मोहड़ी ने बताया कि इस आंदोलन को संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनैतिक, किसान मजदूर मोर्चा प्रमुख तौर पर चला रहा है। 100 के आसपास किसान नेताओं की जत्थेबंदियां हैं। जो सुबह से लेकर रात्रि तक चार बार विभिन्न मुद्दों पर बैठक करती हैं और व्यवस्थाओं को संभाल रही हैं।
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अंबाला सिटी। दिल्ली कूच के लिए चल रहे किसान आंदोलन में अभी तक कई लोग यह आरोप जड़ते दिख रहे थे कि इस आंदोलन में पंजाब के किसान शामिल हैं। हरियाणा के किसानों की आंदोलन से दूरी है, मगर ऐसा नहीं है।
मोर्चे में हरियाणा के किसान नेताओं को भी बराबर की जगह दी है। इसके साथ ही अभी तक दो हजार से अधिक किसान आंदोलन में आ चुके हैं। आंदोलन को संचालित कर रहे 250 किसान संगठनाें में प्रमुख तौर पर शामिल भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंबाला निवासी अमरजीत सिंह मोहड़ी और किसान नेता जय सिंह जलबेड़ा प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।
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किसान आंदोलन के संबंध में बात की तो उन्होंने कहा कि सरकार कह रही हे कि इस आंदोलन में हरियाणा के किसान नहीं हैं। मगर अभी तक दो से तीन हजार हरियाणा के किसान आ चुके हैं। अगर हरियाणा के किसान आंदोलन के साथ नहीं हैं तो सरकार ने गांवों में पाबंदियां क्यों लगाई हैं। एक बार पाबंदी हटाएं तब बताएंगे हरियाणा के किसान आंदोलन के साथ हैं या नहीं। हम अभी कॉल देंगे तो हजारों किसान हरियाणा में निकल आएंगे।
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शंभू सीमा पर पंजाब की तरफ भाकियू शहीद भगत सिंह ने एक अस्थाई कार्यालय बनाया है जहां पर हरियाणा के किसान दिनभर बैठते हैं तो किसान नेताओं से हालात पर जलेबी और किन्नू खाते चर्चा करते दिखे। यहां महिलाएं भी परिवार के साथ दिख रही हैं।
बेरिकेड तोड़ना प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं
अमरजीत सिंह मोहड़ी कहते हैं कि सरकार ने नेरेटिव सेट किया है कि किसान सिर्फ आंदोलन करते हैं वार्ता नहीं। हमारे लिए बेरिकेड तोड़ना कोई प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं है। हम सिर्फ वार्ता चाहते हैं। दो साल में हम बहुत भटके, दिल्ली जंतर मंतर गए, धरना दिया, ज्ञापन दिया मगर कोई समाधान नहीं निकला। इसलिए अब हम सरकार से वार्ता ही करेंगे। सरकार को हर हाल में किसानों की जायज मांगों पर समाधान देना होगा।
ऑर्डिनेंस लाने पर सरकार नहीं राजी
अमरजीत सिंह का कहना है कि हमारी एमएसपी गारंटी कानून, कर्जमुक्ति, जमीन अधिग्रहण बिल, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू की जाएं की मांगें हैं। सरकार अभी तक भी बैठकों में हल्की मांगें तो मान रही है मगर इन सभी बड़ी मांगों पर उलझाना चाहती है।
200 से अधिक लोगों के घर पर छापे
अमरजीत सिंह ने कहा कि दो फरवरी से वह अपने घर से गायब हैं। महिलाएं घर को संभाल रहीं हैं। पुलिस ने तो रात्रि के ढाई-ढाई बजे बिना महिला पुलिस को साथ लिए घरों पर दबिश दी है। 200 से अधिक लोगों के घरों पर छापे मारे जा चुके हैं। गांव में लंगर सेवा के लिए अनाउंसमेंट कराया जा रहा है उसे भी रोका जा रहा है।
वॉकीटॉकी संपर्क का बना जरिया
पंजाब और हरियाणा में जहां इंटरनेट बंद है। मोबाइल नेटवर्क भी काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे में किसान नेता आपस में बात करते के लिए वॉकीटॉकी का प्रयोग कर एक दूसरे से संपर्क करते दिख रहे हैं।
ये रहती है दिनचर्चा
अमरजीत सिंह मोहड़ी ने बताया कि इस आंदोलन को संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनैतिक, किसान मजदूर मोर्चा प्रमुख तौर पर चला रहा है। 100 के आसपास किसान नेताओं की जत्थेबंदियां हैं। जो सुबह से लेकर रात्रि तक चार बार विभिन्न मुद्दों पर बैठक करती हैं और व्यवस्थाओं को संभाल रही हैं।

शंभू सीमा पर पंजाब की तरफ टेंट में बैठे भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष