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न्याय व्यवस्था में सुधार की टिप्पणी का करता हूं स्वागत : विज
Mon, 14 Jul 2025 02:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
Updated Mon, 14 Jul 2025 02:43 AM IST
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अंबाला। हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने रविवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की ओर से न्याय व्यवस्था में सुधार करने के लिए कही गई टिप्पणी का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सुधार प्रकृति का नियम है और सुधार करते-करते हम यहां तक पहुंचे है क्योंकि हम भारतीय प्रगतिशील समाज है। वे मीडिया कर्मियों की ओर से भारत के मुख्य न्यायाधीश की ओर से दिए गए बयान भारतीय न्याय व्यवस्था को सुधार की सख्त जरूरत है, क्योंकि वह अनोखी चुनौतियों का सामना कर रही है, इनमें दशकों तक चलने वाले मुकदमे भी शामिल हैं, के संबंध में पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीश ने न्याय व्यवस्था में सुधार करने की बात कही है और वो इसका समर्थन तथा स्वागत करते हैं। कैबिनेट मंत्री ने उदाहरण देकर समझाया कि पुरानी सभ्यता में सुधार करके ही हम यहां तक पहुंचे हैं। पहले सती प्रथा थी, उसमें सुधार किया गया और तीन तलाक में सुधार किया गया। उन्होंने कहा कि समयानुसार जब ये प्रणाली बनी थी, उस वक्त की व्यवस्थाएं और समस्या भिन्न थीं। आज की स्थिति में समस्याएं अलग है क्योंकि कई नए प्रकार के अपराध पनप रहे हैं। जिनके लिए अलग किस्म से सजा होनी चाहिए। इसी को मद्देनजर रखते हुए देश के गृहमंत्री अमित शाह ने अंग्रेजों के समय के बने हुए कानून में सुधार करके बदलाव किया है। उन्होंने याद दिलाते हुए कहा कि पहले दादा केस दाखिल करता था और पोते के समय में फैसला आता था। अब 3 साल में केस का फैसला आ जाता है संवाद
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उन्होंने कहा कि मुख्य न्यायाधीश ने न्याय व्यवस्था में सुधार करने की बात कही है और वो इसका समर्थन तथा स्वागत करते हैं। कैबिनेट मंत्री ने उदाहरण देकर समझाया कि पुरानी सभ्यता में सुधार करके ही हम यहां तक पहुंचे हैं। पहले सती प्रथा थी, उसमें सुधार किया गया और तीन तलाक में सुधार किया गया। उन्होंने कहा कि समयानुसार जब ये प्रणाली बनी थी, उस वक्त की व्यवस्थाएं और समस्या भिन्न थीं। आज की स्थिति में समस्याएं अलग है क्योंकि कई नए प्रकार के अपराध पनप रहे हैं। जिनके लिए अलग किस्म से सजा होनी चाहिए। इसी को मद्देनजर रखते हुए देश के गृहमंत्री अमित शाह ने अंग्रेजों के समय के बने हुए कानून में सुधार करके बदलाव किया है। उन्होंने याद दिलाते हुए कहा कि पहले दादा केस दाखिल करता था और पोते के समय में फैसला आता था। अब 3 साल में केस का फैसला आ जाता है संवाद
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