{"_id":"56fed11b4f1c1b4b4af00105","slug":"highcourt-notice-to-government-reply-till-19th-may","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस, 19 मई तक मांगा जवाब ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस, 19 मई तक मांगा जवाब
ब्यूरो /अमर उजाला, अंबाला
Updated Sat, 02 Apr 2016 01:20 AM IST
विज्ञापन
हाईकोर्ट
- फोटो : Amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पिछले करीब दो दशक से कैंट सदर एरिया (एक्साइज्ड) की रजिस्ट्री न होने के मामले में अब हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया है। एडवोकेट एसकेएस बेदी द्वारा डाली गई याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने सरकार से 19 मई तक जवाब मांगा है। कैंट सदर एरिया के बाशिंदों को अब उम्मीद बंध गई है कि इस मामले में कोई न कोई हल अवश्य निकलेगा, जबकि अपनी प्रापर्टी को लेकर लंबे समय से यह दंश झेल रहे लोगों को राहत मिलने के आसार बंधे हैं।
----
दो दशकों से चल रहा खेल
करीब दो दशकों से अंबाला कैंट के सदर एरिया की रजिस्ट्रियां नहीं हो रही हैं, जिसके कारण प्रापर्टी धारकों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। इसी तरह एनओसी को लेकर भी जनता परेशान है। इसी को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी राजनीतिक रोटियां भी खूब सेंकी और मंच से इसे खोलने का ऐलान तक किया। लेकिन अधिकारियों ने भी सरकार का हवाला देते हुए सदर एरिया की रजिस्ट्रियां करने से इनकार कर दिया। सूत्रों की मानें, तो यह सब मौखिक आदेश पर ही किया गया है, जबकि इस से जनता खासी परेशान रही।
----
जनता के लिए राहत के आसार
एडवोकेट एसकेएस बेदी द्वारा दायर जनहित याचिका पर कोर्ट द्वारा सरकार से 19 मई तक जवाब मांगे जाने के बाद जनता को राहत के आसार दिखाई दे रहे हैं। सदर एरिया के लोगों की मानें, तो अब लग रहा है कि इस राजनीतिक खेल का पटाक्षेप होगा और जनता को उसका हक अवश्य मिलेगा। सालों से सदर एरिया के बाशिंदे अपनी प्रापर्टी के लिए भटक रहे हैं, लेकिन राहत नहीं मिली। किसी भी जरूरत के समय अपनी प्रापर्टी तक को नहीं बेच सकते, लेकिन अब लगता है कि हाईकोर्ट में मामला जाने के बाद उनकी प्रापर्टियों की रजिस्ट्रियां होंगी।
विज्ञापन
यह कहते हैं लोग
कैंट के रहने वाले आनंद मोहन शुक्ला, पुरुषोत्तम शर्मा, विकास, संजीव का कहना है कि रजिस्ट्रियां बंद तो कर दी गई, लेकिन नेताओं ने तो अपनी राजनीति चमकाने के लिए यह सब किया है। जिसकी प्रापर्टी है, उसकी रजिस्ट्री तो प्रापर्टीधारक का हक है। लेकिन यह हक उसे नहीं दिया गया, जबकि नियमों में उलझाते हुए उसे परेशान किया गया।
मैंने कैंट के सदर एरिया की प्रापर्टी की रजिस्ट्री न होने को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इस याचिका पर कोई ने सरकार से 19 मई तक जवाब मांगा है। सरकार का जवाब मिलने के बाद आगे केस की तैयारी की जाएगी।
- एडवोकेट एसकेएस बेदी, याचिकाकर्ता
विज्ञापन
----
दो दशकों से चल रहा खेल
करीब दो दशकों से अंबाला कैंट के सदर एरिया की रजिस्ट्रियां नहीं हो रही हैं, जिसके कारण प्रापर्टी धारकों को काफी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। इसी तरह एनओसी को लेकर भी जनता परेशान है। इसी को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपनी राजनीतिक रोटियां भी खूब सेंकी और मंच से इसे खोलने का ऐलान तक किया। लेकिन अधिकारियों ने भी सरकार का हवाला देते हुए सदर एरिया की रजिस्ट्रियां करने से इनकार कर दिया। सूत्रों की मानें, तो यह सब मौखिक आदेश पर ही किया गया है, जबकि इस से जनता खासी परेशान रही।
विज्ञापन
----
जनता के लिए राहत के आसार
एडवोकेट एसकेएस बेदी द्वारा दायर जनहित याचिका पर कोर्ट द्वारा सरकार से 19 मई तक जवाब मांगे जाने के बाद जनता को राहत के आसार दिखाई दे रहे हैं। सदर एरिया के लोगों की मानें, तो अब लग रहा है कि इस राजनीतिक खेल का पटाक्षेप होगा और जनता को उसका हक अवश्य मिलेगा। सालों से सदर एरिया के बाशिंदे अपनी प्रापर्टी के लिए भटक रहे हैं, लेकिन राहत नहीं मिली। किसी भी जरूरत के समय अपनी प्रापर्टी तक को नहीं बेच सकते, लेकिन अब लगता है कि हाईकोर्ट में मामला जाने के बाद उनकी प्रापर्टियों की रजिस्ट्रियां होंगी।
विज्ञापन
यह कहते हैं लोग
कैंट के रहने वाले आनंद मोहन शुक्ला, पुरुषोत्तम शर्मा, विकास, संजीव का कहना है कि रजिस्ट्रियां बंद तो कर दी गई, लेकिन नेताओं ने तो अपनी राजनीति चमकाने के लिए यह सब किया है। जिसकी प्रापर्टी है, उसकी रजिस्ट्री तो प्रापर्टीधारक का हक है। लेकिन यह हक उसे नहीं दिया गया, जबकि नियमों में उलझाते हुए उसे परेशान किया गया।
मैंने कैंट के सदर एरिया की प्रापर्टी की रजिस्ट्री न होने को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इस याचिका पर कोई ने सरकार से 19 मई तक जवाब मांगा है। सरकार का जवाब मिलने के बाद आगे केस की तैयारी की जाएगी।
- एडवोकेट एसकेएस बेदी, याचिकाकर्ता