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जवाब न देने पर हाईकोर्ट सख्त, कमिश्नर को जुर्माना
ब्यूरो/अमर उजाला अंबाला
Updated Sat, 06 Feb 2016 12:57 AM IST
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अंबाला कैंट के सुभाष पार्क के सामने एक संस्था को प्लेनेटेरियम बनाने के लिए दी गई जमीन के व्यवसायिक इस्तेमाल किए जाने के मामले में हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका पर अब हाईकोर्ट सख्त हो गया है। इस मामले में हाईकोर्ट ने अब अंबाला प्रशासन के तत्कालीन कमिश्नर को समय पर अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में न देने पर हजारों रुपये का जुर्माना लगाया है। उन्हें ये जुर्माने ‘लॉयर वेलफेयर फंड हाईकोर्ट’ में जमा करवाने के बाद अगली तारीख 07 जुलाई को हाईकोर्ट में पेश होने के आदेश दिए गए हैं।
हाईकोर्ट ने इस मामले में ये भी कहा है कि इस केस में दस माह से अंबाला प्रशासन द्वारा कोई जवाब न दिया जाना बेहद अनुचित है और कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है। इसलिए हाईकोर्ट ने अब तत्कालीन कमिश्रर को समय पर अपना जवाब दावा पेश न करने पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। अब तत्कालीन कमिश्नर को इस मामले में 25 हजार रुपये जुर्माना भरकर अंबाला प्रशासन की ओर से 7 जुलाई को खुद पेश होकर हाईकोर्ट में जवाब देना है।
ये है मामला...
दरअसल, सन 1998 में स्थानीय निकाय हरियाणा ने अंबाला की एक संस्था को 4300 वर्ग गज जमीन एक प्रोजेक्ट के लिए महज 300 रुपये प्रति वर्गगज के दर पर बेची थी। परियोजना थी कि ये संस्था इस जमीन पर प्लेनेटेरियम खोलेगी, जिसका अंबाला के छात्रों को बहुत फायदा होगा, यहां छात्रों को खगोलीय ज्ञान भी दिया जाएगा। इस दौरान विभाग की ओर से बकायदा चार शर्तें लगाई गई थी। पहली शर्त थी इस भूमि का प्रयोग केवल प्लेनेटेरियम के लिए ही किया जाएगा और कभी इस जमीन का उद्देश्य नहीं बदला जाएगा। दूसरी शर्त के मुताबिक इस भूमिका का कॉमर्शियल इस्तेमाल नहीं किया जाएगा और न ही इस भूमि को किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को स्थानांतरित किया जाएगा।
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तीसरी शर्त के अनुसार एक वर्ष के भीतर प्लेनेटेरियम तैयार कर उसे शुरू कर दिया जाएगा। चौथी शर्त के मुताबिक यदि संस्था ने उक्त तीनों शर्तों का उल्लंघन किया या भूमि का प्रयोग का उद्देश्य बदला गया तो सरकार भूमि वापस ले लेगी, लेकिन अब नरेंद्र शर्मा व अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका डालकर आरोप लगाया है कि संस्था ने प्लेनेटेरियम तो खोला था, लेकिन वो बरसों पहले ही बंद हो चुका है, अब इस जमीन पर बड़ा हॉल बना हुआ है, जिसका व्यवसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है। दूसरा, यहां इसी परिसर में एक शैक्षणिक संस्थान भी खोल दिया गया है और इसका भी व्यवसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी बात की तसदीक म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला के सचिव भी अपनी एक रिपोर्ट में कर चुके हैं।
अब इसी मामले में हाईकोर्ट ने भी अंबाला रेंज के कमिश्नर से मार्च 2015 में प्रशासन को जवाब दाखिल करने को कहा था, लेकिन अभी तक अंबाला प्रशासन ने हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। जिसके बाद अब हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए तत्कालीन कमिश्नर पर 25 हजार रुपये पेनेल्टी लगा दी है और उन्हें अगली तारीख 7 जुलाई 2016 को खुद हाईकोर्ट में पेश होकर जवाब दाखिल करने को कहा है।
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इस मामले में हाईकोर्ट ने दो बार अंबाला प्रशासन को जवाब दावा दाखिल करने को कहा था, लेकिन हाईकोर्ट में कोई जवाब नहीं आया। इसलिए हाईकोर्ट ने कमिश्नर को 25 हजार की पेनेल्टी लगाकर अगली पेशी पर इस मामले में जवाब दावा दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
-एडवोकेट संजीव शर्मा, याचीकर्ता का वकील-
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हाईकोर्ट ने इस मामले में ये भी कहा है कि इस केस में दस माह से अंबाला प्रशासन द्वारा कोई जवाब न दिया जाना बेहद अनुचित है और कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है। इसलिए हाईकोर्ट ने अब तत्कालीन कमिश्रर को समय पर अपना जवाब दावा पेश न करने पर 25 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। अब तत्कालीन कमिश्नर को इस मामले में 25 हजार रुपये जुर्माना भरकर अंबाला प्रशासन की ओर से 7 जुलाई को खुद पेश होकर हाईकोर्ट में जवाब देना है।
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ये है मामला...
दरअसल, सन 1998 में स्थानीय निकाय हरियाणा ने अंबाला की एक संस्था को 4300 वर्ग गज जमीन एक प्रोजेक्ट के लिए महज 300 रुपये प्रति वर्गगज के दर पर बेची थी। परियोजना थी कि ये संस्था इस जमीन पर प्लेनेटेरियम खोलेगी, जिसका अंबाला के छात्रों को बहुत फायदा होगा, यहां छात्रों को खगोलीय ज्ञान भी दिया जाएगा। इस दौरान विभाग की ओर से बकायदा चार शर्तें लगाई गई थी। पहली शर्त थी इस भूमि का प्रयोग केवल प्लेनेटेरियम के लिए ही किया जाएगा और कभी इस जमीन का उद्देश्य नहीं बदला जाएगा। दूसरी शर्त के मुताबिक इस भूमिका का कॉमर्शियल इस्तेमाल नहीं किया जाएगा और न ही इस भूमि को किसी अन्य व्यक्ति या संस्था को स्थानांतरित किया जाएगा।
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तीसरी शर्त के अनुसार एक वर्ष के भीतर प्लेनेटेरियम तैयार कर उसे शुरू कर दिया जाएगा। चौथी शर्त के मुताबिक यदि संस्था ने उक्त तीनों शर्तों का उल्लंघन किया या भूमि का प्रयोग का उद्देश्य बदला गया तो सरकार भूमि वापस ले लेगी, लेकिन अब नरेंद्र शर्मा व अन्य लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका डालकर आरोप लगाया है कि संस्था ने प्लेनेटेरियम तो खोला था, लेकिन वो बरसों पहले ही बंद हो चुका है, अब इस जमीन पर बड़ा हॉल बना हुआ है, जिसका व्यवसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है। दूसरा, यहां इसी परिसर में एक शैक्षणिक संस्थान भी खोल दिया गया है और इसका भी व्यवसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी बात की तसदीक म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला के सचिव भी अपनी एक रिपोर्ट में कर चुके हैं।
अब इसी मामले में हाईकोर्ट ने भी अंबाला रेंज के कमिश्नर से मार्च 2015 में प्रशासन को जवाब दाखिल करने को कहा था, लेकिन अभी तक अंबाला प्रशासन ने हाईकोर्ट में अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। जिसके बाद अब हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए तत्कालीन कमिश्नर पर 25 हजार रुपये पेनेल्टी लगा दी है और उन्हें अगली तारीख 7 जुलाई 2016 को खुद हाईकोर्ट में पेश होकर जवाब दाखिल करने को कहा है।
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इस मामले में हाईकोर्ट ने दो बार अंबाला प्रशासन को जवाब दावा दाखिल करने को कहा था, लेकिन हाईकोर्ट में कोई जवाब नहीं आया। इसलिए हाईकोर्ट ने कमिश्नर को 25 हजार की पेनेल्टी लगाकर अगली पेशी पर इस मामले में जवाब दावा दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
-एडवोकेट संजीव शर्मा, याचीकर्ता का वकील-