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हाईकोर्ट पहुंचे अभिभावक, सरकार से जवाब मांगा
अंबाला
Updated Sun, 13 Oct 2013 11:54 PM IST
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अंबाला शहर के पुलिस लाइन स्थित राजकीय कन्या स्कूल को बंद करके उसकी जगह कालेज खोलने के मामले में अभिभावकों ने हाईकोर्ट में गुहार लगा दी है।
अभिभावकों ने इस बाबत हाईकोर्ट में याचिका डाली है, जिस पर हाईकोर्ट ने दो हफ्ते के भीतर सरकार से इस मामले में जवाब तलब किया है। सरकार को हाईकोर्ट में इस बाबत अपना जवाब पेश कर पूरे मामले की स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी है।
उल्लेखनीय है कि राजकीय कन्या स्कूल पुलिस लाइन 650 छात्राएं अपनी शिक्षा ग्रहण कर रही है। मगर अचानक हायर एजूकेशन डिपार्टमेंट के निदेशक ने डीसी अंबाला को पत्र भेजकर उनसे इस स्कूल की जमीन और भवन को स्कूल परिसर के दस कमरों में शुरू हुए राजकीय कालेज को हैंडओवर करने के आदेश दिए हैं।
इसके साथ ही डीसी अंबाला को राजस्व विभाग में स्कूल की जमीन और भवन कालेज के नाम दर्ज करवाने के भी निर्देश जारी किए थे। जबकि यहां पढ़ने वाली लड़कियों को आसपास सरकारी स्कूलों में भी एडजस्ट करने के निर्देश जारी किए हैं।
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लामबंद अभिभावक करेंगे संघर्ष
ये केस हाईकोर्ट में गुलाब सिंह व अन्य अभिभावकाें की ओर से दाखिल हुआ है। एडवोकेट दिलबाग सिंह दानीपुर के अनुसार इस मुद्दे को लेकर सभी अभिभावक लामबंद है और संघर्ष के मूड में हैं।
उनके अनुसार हाईकोर्ट में डाली गई याचिका में बताया गया है कि ये स्कूल बहुत पुराना ज्वाइंट पंजाब के समय का है और शहर की ऐसी लोकेशन में हैं, जहां बच्चियों का पहुंचना बहुत ही आसान है। जबकि ये जिले का ऐसा सरकारी स्कूल हैं, जहां 650 बच्चियां पढ़ रही है।
साथ ही इस स्कूल में अशक्त बच्चों के लिए चल रहे जिले के आईईडी रिसोर्स सेंटर और छात्राओं के वोकेशन एजुकेशन सेंटर पर भी चल रहे हैं। लेकिन सरकार के आदेश से इनके वजूद पर भी तलवार लटक गई है। इतना ही नहीं शहर में ही कई ऐसी जगह मौजूद है, जहां कालेज खुल सकता है। एडवोकेट के अनुसार दूसरा एक कालेज को स्थापित करने के लिए जितनी जमीन चाहिए, उतनी जमीन भी यहां नहीं है।
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अभिभावकों ने इस बाबत हाईकोर्ट में याचिका डाली है, जिस पर हाईकोर्ट ने दो हफ्ते के भीतर सरकार से इस मामले में जवाब तलब किया है। सरकार को हाईकोर्ट में इस बाबत अपना जवाब पेश कर पूरे मामले की स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी है।
उल्लेखनीय है कि राजकीय कन्या स्कूल पुलिस लाइन 650 छात्राएं अपनी शिक्षा ग्रहण कर रही है। मगर अचानक हायर एजूकेशन डिपार्टमेंट के निदेशक ने डीसी अंबाला को पत्र भेजकर उनसे इस स्कूल की जमीन और भवन को स्कूल परिसर के दस कमरों में शुरू हुए राजकीय कालेज को हैंडओवर करने के आदेश दिए हैं।
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इसके साथ ही डीसी अंबाला को राजस्व विभाग में स्कूल की जमीन और भवन कालेज के नाम दर्ज करवाने के भी निर्देश जारी किए थे। जबकि यहां पढ़ने वाली लड़कियों को आसपास सरकारी स्कूलों में भी एडजस्ट करने के निर्देश जारी किए हैं।
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लामबंद अभिभावक करेंगे संघर्ष
ये केस हाईकोर्ट में गुलाब सिंह व अन्य अभिभावकाें की ओर से दाखिल हुआ है। एडवोकेट दिलबाग सिंह दानीपुर के अनुसार इस मुद्दे को लेकर सभी अभिभावक लामबंद है और संघर्ष के मूड में हैं।
उनके अनुसार हाईकोर्ट में डाली गई याचिका में बताया गया है कि ये स्कूल बहुत पुराना ज्वाइंट पंजाब के समय का है और शहर की ऐसी लोकेशन में हैं, जहां बच्चियों का पहुंचना बहुत ही आसान है। जबकि ये जिले का ऐसा सरकारी स्कूल हैं, जहां 650 बच्चियां पढ़ रही है।
साथ ही इस स्कूल में अशक्त बच्चों के लिए चल रहे जिले के आईईडी रिसोर्स सेंटर और छात्राओं के वोकेशन एजुकेशन सेंटर पर भी चल रहे हैं। लेकिन सरकार के आदेश से इनके वजूद पर भी तलवार लटक गई है। इतना ही नहीं शहर में ही कई ऐसी जगह मौजूद है, जहां कालेज खुल सकता है। एडवोकेट के अनुसार दूसरा एक कालेज को स्थापित करने के लिए जितनी जमीन चाहिए, उतनी जमीन भी यहां नहीं है।