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हाईकोर्ट में दाखिल होगा ऐतराज, एमसीए नहीं हटा रहा कब्जे
अमर उजाला/ब्यूरो/अंबाला
Updated Mon, 07 Nov 2016 12:15 AM IST
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अवैध अतिक्रमण
- फोटो : amar ujala
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हाईकोर्ट के आदेश पर कैंट के सभी बाजारों से अवैध कब्जे और अतिक्रमण हटाए जाने के मामले में कार्रवाई कर रहा एमसीए (म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला) विवादों में घिर गया है। पहले तो एमसीए समय रहते उचित ढंग से इन बाजारों के कब्जों को पुख्ता ढंग से हटवाता नहीं और जब हाईकोर्ट के तारीख नजदीक होती है, तो कुछेक बाजारों में अवैध कब्जों को हटवाने की खानापूर्ति करके हाईकोर्ट में रिपोर्ट पेश कर फिर कार्रवाई के नाम पर महीनों लंबी अगली तारीख की मांग करता है।
एमसीए के खिलाफ अब यही ऐतराज इस मामले में आगामी तारीख ग्यारह नवंबर को हाईकोर्ट में जनहित याचिका डालने वाले सीनियर एडवोकेट एसकेएस बेदी द्वारा हाईकोर्ट दाखिल किया जाएगा। सीनियर एडवोकेट ने इसकी तैयारी कर ली है और उससे पहले वे स्वयं अंबाला के बाजारों का मुआयना कर मौजूदा स्टेट्स देखकर जाएंगे।
साढ़े पांच साल से पेंडिंग है याचिका
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011 में हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट एसकेएस बेदी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाकर कैंट के बाजारों से अवैध कब्जे और अतिक्रमण हटाने की मांग की थी। बेदी ने हाईकोर्ट को बताया था कि अंबाला कैंट एक बाढ़ ग्रस्त इलाका है। यहां थोड़ी देर की बारिश बाजारों में लबालब पानी जमा हो जाता है। एडवोकेट ने बताया कि इसकी सबसे बड़ी वजह है यहां बाजारों में नालों और सड़कों पर पांच से पंद्रह फीट तक पक्के अवैध कब्जे।
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एडवोकेट बेदी ने बताया कि ये बाजार बहुत ज्यादा चौड़े हैं, लेकिन सड़क के दोनों ओर अतिक्रमण की वजह से सड़कें सिकुड़ चुकी हैं। दुकानदारों ने अपना सामान कई-कई फीट सड़कों पर सजा रखा है, जिस वजह से अधिकतर बाजार जाम की जद में रहते हैं। इसलिए कैंट के बाजारों को इन पक्के अवैध कब्जों और अतिक्रमण की जद से मुक्त करवाया जाए। हाईकोर्ट ने इस मामले में कैंट के तमाम बाजारों से अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे।
लेकिन बार-बार एमसीए खानापूर्ति करता रहा, जिसके बाद याचीकर्ता को इस जनहित याचिका पर एमसीए के खिलाफ अवमानना याचिका भी लगानी पड़ी। अब अवमानना याचिका में हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है, लेकिन उसके बावजूद भी साढ़े पांच बीतने के बाद भी बाजारों से अतिक्रमण नहीं हटा है।
बेदी बोले, हाईकोर्ट को बताएंगे
इस मामले में याचीकर्ता एसकेएस बेदी ने कहा कि वे अगली डेट से पहले खुद कैंट के बाजारों का मुआयना कर स्टेटस रिपोर्ट तैयार करेंगे और फिर एमसीए अफसरों की शिकायत हाईकोर्ट में करते हुए आब्जेक्शन फाइल करेंगे। बेदी ने कहा कि वे हाईकोर्ट को बताएंगे किस तरह से एमसीए कब्जे हटवाने में मिलीभगत के चलते खानापूर्ति कर हाईकोर्ट को गुमराह कर रही है।
उनके अनुसार सड़कों के दोनों ओर नालों से अवैध पक्के कब्जे नहीं हटाए जा रहे हैं, नाले आज भी अंडरग्राउंड है, जिस वजह से सालों उनकी सफाई नहीं हो पाती और यही गाद जलभराव का कारण बनती है। बेदी ने कहा कि अवैध कब्जों तो दूर यहां एमसीए अतिक्रमण तक नहीं हटा रही है। जिस वजह से लोग हमेशा जाम की स्थिति से जूझते रहते हैं। लेकिन अब वे ऐतराज दाखिल हाईकोर्ट से एमसीए अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करेंगे। क्योंकि कार्रवाई के नाम पर महीनों लंबी तारीख लेने के बाद भी एमसीए अफसर तारीख से कुछ दिन पहले खानापूर्ति वाली कार्रवाई करके हाईकोर्ट को गुमराह करते हैं।
कब्जे हटवाने को लेकर हाईकोर्ट ने जो भी आदेश दिए हैं। एमसीए उसकी पूरी तरह से पालन करेगा। बाजारों में कब्जे हटवाने की कार्रवाई पिछले दो दिन में की गई है। बाजार काफी ज्यादा है, कब्जे भी ज्यादा है। थोड़ा वक्त तो लगता ही है। लेकिन एमसीए अपना काम पूरी गंभीरता से कर रही है। सभी अवैध कब्जे हटवाए जाएंगे।
-रमेश लाल मल, मेयर, म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला
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एमसीए के खिलाफ अब यही ऐतराज इस मामले में आगामी तारीख ग्यारह नवंबर को हाईकोर्ट में जनहित याचिका डालने वाले सीनियर एडवोकेट एसकेएस बेदी द्वारा हाईकोर्ट दाखिल किया जाएगा। सीनियर एडवोकेट ने इसकी तैयारी कर ली है और उससे पहले वे स्वयं अंबाला के बाजारों का मुआयना कर मौजूदा स्टेट्स देखकर जाएंगे।
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साढ़े पांच साल से पेंडिंग है याचिका
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011 में हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट एसकेएस बेदी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाकर कैंट के बाजारों से अवैध कब्जे और अतिक्रमण हटाने की मांग की थी। बेदी ने हाईकोर्ट को बताया था कि अंबाला कैंट एक बाढ़ ग्रस्त इलाका है। यहां थोड़ी देर की बारिश बाजारों में लबालब पानी जमा हो जाता है। एडवोकेट ने बताया कि इसकी सबसे बड़ी वजह है यहां बाजारों में नालों और सड़कों पर पांच से पंद्रह फीट तक पक्के अवैध कब्जे।
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एडवोकेट बेदी ने बताया कि ये बाजार बहुत ज्यादा चौड़े हैं, लेकिन सड़क के दोनों ओर अतिक्रमण की वजह से सड़कें सिकुड़ चुकी हैं। दुकानदारों ने अपना सामान कई-कई फीट सड़कों पर सजा रखा है, जिस वजह से अधिकतर बाजार जाम की जद में रहते हैं। इसलिए कैंट के बाजारों को इन पक्के अवैध कब्जों और अतिक्रमण की जद से मुक्त करवाया जाए। हाईकोर्ट ने इस मामले में कैंट के तमाम बाजारों से अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे।
लेकिन बार-बार एमसीए खानापूर्ति करता रहा, जिसके बाद याचीकर्ता को इस जनहित याचिका पर एमसीए के खिलाफ अवमानना याचिका भी लगानी पड़ी। अब अवमानना याचिका में हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है, लेकिन उसके बावजूद भी साढ़े पांच बीतने के बाद भी बाजारों से अतिक्रमण नहीं हटा है।
बेदी बोले, हाईकोर्ट को बताएंगे
इस मामले में याचीकर्ता एसकेएस बेदी ने कहा कि वे अगली डेट से पहले खुद कैंट के बाजारों का मुआयना कर स्टेटस रिपोर्ट तैयार करेंगे और फिर एमसीए अफसरों की शिकायत हाईकोर्ट में करते हुए आब्जेक्शन फाइल करेंगे। बेदी ने कहा कि वे हाईकोर्ट को बताएंगे किस तरह से एमसीए कब्जे हटवाने में मिलीभगत के चलते खानापूर्ति कर हाईकोर्ट को गुमराह कर रही है।
उनके अनुसार सड़कों के दोनों ओर नालों से अवैध पक्के कब्जे नहीं हटाए जा रहे हैं, नाले आज भी अंडरग्राउंड है, जिस वजह से सालों उनकी सफाई नहीं हो पाती और यही गाद जलभराव का कारण बनती है। बेदी ने कहा कि अवैध कब्जों तो दूर यहां एमसीए अतिक्रमण तक नहीं हटा रही है। जिस वजह से लोग हमेशा जाम की स्थिति से जूझते रहते हैं। लेकिन अब वे ऐतराज दाखिल हाईकोर्ट से एमसीए अफसरों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करेंगे। क्योंकि कार्रवाई के नाम पर महीनों लंबी तारीख लेने के बाद भी एमसीए अफसर तारीख से कुछ दिन पहले खानापूर्ति वाली कार्रवाई करके हाईकोर्ट को गुमराह करते हैं।
कब्जे हटवाने को लेकर हाईकोर्ट ने जो भी आदेश दिए हैं। एमसीए उसकी पूरी तरह से पालन करेगा। बाजारों में कब्जे हटवाने की कार्रवाई पिछले दो दिन में की गई है। बाजार काफी ज्यादा है, कब्जे भी ज्यादा है। थोड़ा वक्त तो लगता ही है। लेकिन एमसीए अपना काम पूरी गंभीरता से कर रही है। सभी अवैध कब्जे हटवाए जाएंगे।
-रमेश लाल मल, मेयर, म्यूनिसिपल कारपोरेशन अंबाला