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Ambala News: मकान मालकिन को हाईकोर्ट से राहत, अग्रिम जमानत मंजूर

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2026 03:12 AM IST
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High Court grants relief to landlady, grants anticipatory bail
धूलकोट में निर्माणाधीन इमारत गिरने से ठेकेदार की मौत के मामले में हुई सुनवाई
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला। धूलकोट में एक निर्माणाधीन इमारत में हुए हादसे और उसमें ठेकेदार की मौत के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने मकान मालकिन प्रीतम कौर को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उन्हें अग्रिम जमानत प्रदान करते हुए जांच में शामिल होने का निर्देश दिया है। यह पूरा मामला अंबाला के बलदेव नगर थाने का है, जहां 28 सितंबर 2026 को एपआईआर संख्या 335 दर्ज की गई थी। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 105, 110, 289 और 290 के तहत केस दर्ज किया है।
याचिकाकर्ता प्रीतम कौर की ओर से अदालत में पेश हुए अधिवक्ता ने दलील दी कि प्रीतम कौर उस जमीन की मालकिन हैं जिस पर इमारत का निर्माण कार्य चल रहा था। इस दुर्घटना के दौरान निर्माण कार्य कराने वाले ठेकेदार मलकित की मृत्यु हो चुकी है। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि यह ट्रायल के दौरान ही स्पष्ट हो पाएगा कि यह मामला गैर-इरादतन हत्या के अंतर्गत आता है या फिर लापरवाही से हुई मौत के दायरे में। ऐसी स्थिति में याचिकाकर्ता की हिरासत में पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है।
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हाईकोर्ट की शर्तें
न्यायमूर्ति जसजीत सिंह बेदी की अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले में नोटिस जारी कर दिया है, जिसकी अगली सुनवाई 7 दिसंबर को तय की गई है। इस मामले को एक अन्य याचिका के साथ सुना जाएगा। राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता पुनीता सेठी ने नोटिस स्वीकार किया है। याचिकाकर्ता को एसएचओ या जांच अधिकारी के समक्ष पेश होकर जांच में शामिल होना होगा। यदि उन्हें गिरफ्तार किया जाता है, तो जांच एजेंसी की संतुष्टि पर उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया जाएगा। याचिकाकर्ता को जांच के दौरान जब भी बुलाया जाएगा, उन्हें उपलब्ध रहना होगा।
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इसके अलावा, वह मामले से जुड़े किसी भी गवाह या व्यक्ति को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से धमकाएंगी नहीं और न ही कोई प्रलोभन देंगी। अदालत की पूर्व अनुमति के बिना वह देश नहीं छोड़ सकेंगी और अपना पासपोर्ट भी सरेंडर करना होगा। इसके साथ ही, हाईकोर्ट ने राज्य के वकील को निर्देश दिया है कि वह अगली तारीख से पहले याचिकाकर्ता की सटीक भूमिका और यदि कोई अन्य आपराधिक मामला लंबित है, तो उसका पूरा विवरण हलफनामे के रूप में अदालत में पेश करें।
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