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पांव पसार रहा हेपेटाइटिस 4 साल में 377 मामले, 100 ने दी काले पीलिया को मात

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jul 2021 12:06 AM IST
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Hepatitis is spreading, 377 cases in 4 years, 100 beat black jaundice
उमेश भार्गव
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अंबाला। जानलेवा हेपेटाइटिस बी और सी यानी काला पीलिया जिले में लगातार पांव पसार रहा है। वर्ष 2017 में हेपेटाइटिस की रोकथाम के लिए हरियाणा सरकार ने जीवन रेखा अभियान के तहत स्क्रीनिंग शुरू की थी, जोकि वर्ष 2019 से नेशनल वायरस हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम के नाम से चल रही है। स्क्रीनिंग तेज होने के कारण इस समय तक जिले में 377 मरीजों में हेपेटाइटिस सी की पुष्टि हो चुकी है, इनमें 77 मरीज हेपेटाइटिस बी का शिकार हो चुके हैं। राहत भरी बात यह है कि इनमें से मात्र 7 मरीजों की ही अब तक मौत हुई है। इनमें एक कैदी भी शामिल था। अब तक करीब 100 मरीजों ने हेपेटाइटिस सी को मात दी है। वर्ष 2020 में करीब 30 ने इस बीमारी को मात दी। इन सभी को आज विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर प्रमाणपत्र देकर इनका हौसला बढ़ाया जाएगा। बता दें कि हेपेटाइटिस बी और सी पर मरीज के प्रति माह पहले 30-40 हजार रुपये तक खर्च होते थे, लेकिन इस समय प्रदेशभर में हेपेटाइटिस बी-सी का निशुल्क इलाज मुहैया करवाया जा रहा है।
छावनी और आसपास के लोगों के लिए अच्छी खबर है। अभी तक जिले में केवल शहर नागरिक अस्पताल में ही हेपेटाइटिस बी और सी का उपचार मिलता था। अब छावनी नागरिक अस्पताल में विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर इसकी स्क्रीनिंग की व्यवस्था शुरू की जाएगी। डॉ. संजीव गोयल को इसका नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इससे जहां मरीजों को लाभ होगा, वहीं शहर नागरिक अस्पताल से दबाव कम होगा। वहां भी मरीजों को पहले से बेहतर सेवाएं दी जा सकेंगी। वहीं पहले जेल में बंदी और कैदियों की स्क्रीनिंग भी जिला नागरिक अस्पताल में ही हो रही थी, लेकिन अब फाइंड इंडिया एनजीओ के माध्यम से इनकी जेलों में ही स्क्रीनिंग की व्यवस्था पिछले 2 माह से शुरू कर दी गई है। अब तक प्रदेशभर की सभी जेलों के करीब 12 हजार बंदी और कैदियों की स्क्रीनिंग करवाई जा चुकी है।
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यहां से मिल रहे सबसे ज्यादा केस
अंबाला शहर में रतनगढ़ और उपमंडल नारायणगढ़ का शहजादपुर ऐसे दो क्षेत्र हैं, जहां सबसे ज्यादा केस काले पीलिया के आ रहे हैं। नशीले पदार्थों का सेवन और इंजेक्शन इसका मुख्य कारण माना जाता है। समय पर स्क्रीनिंग नहीं होने के कारण मरीज की जान चली जाती है। बता दें कि बराड़ा और शहजादपुर में इसके लिए व्यवस्था नहीं होने के कारण यहां के मरीजों को भी इलाज के लिए जिला नागरिक अस्पताल ही आना पड़ता है।
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लक्षण
भूख कम लगना, बुखार आना, उल्टी लगना, वजन कम होना, लीवर में सूजन इत्यादि सामान्य लक्षण होने के कारण काले पीलिया की पहचान करना आसान नहीं होता। इसकी पहचान के लिए स्क्रीनिंग जरूरी होती है, जोकि प्रदेशभर के सभी जिला अस्पतालों में निशुल्क करवाई जा रही है।
क्या है उपचार, किस तरह से मिल रही निशुल्क सेवाएं
हेपेटाइटिस से पीड़ित मरीज को टेनोफोवीर, सोफोसबोवीर, डेकेल्टासीवर और सोफोवैल्पेटासवीर नामक दवाएं दी जाती हैं। कम से कम तीन से छह महीने इन दवाओं का कोर्स करवाया जाता है। हेपेटाइटिस बी में तीन महीने से लेकर आजीवन भी मरीज को दवा देनी पड़ सकती है। बाजार में हेपेटाइटिस सी की दवाएं प्रति माह 10 हजार रुपये में मिलती हैं, जबकि नागरिक अस्पतालों में निशुल्क व्यवस्था करवाई गई है। टेस्टिंग की बात करें तो जिले की मॉलिक्यूलर लैब में वायरल लोड निशुल्क किया जा रहा है, जोकि बाहर से 5 से 8 हजार रुपये में होता है। हेपेटाइटिस बी के मरीजों को हर छह महीने में व हेपेटाइटिस सी के मरीजों को साल में दो बार और फिर उसकी स्थिति के हिसाब से टेस्टिंग करवाई जाती है।

छावनी नागरिक अस्पताल में विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर स्क्रीनिंग की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। डॉ. संजीव गोयल को इसका नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इस साल 30 मरीजों को इस बीमारी को मात दी है, जिन्हें आज प्रमाणपत्र वितरित किए जाएंगे।
-डॉ. सुनील हरी, एपीडमोलॉजिस्ट
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